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भारत का अमेरिका से पहला LPG आयात सौदा, 2026 की 10% जरूरत एक कॉन्ट्रैक्ट में पूरी
अमेरिका से LPG आयात के लिए भारत का पहला स्ट्रक्चर्ड कॉन्ट्रैक्ट ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत ने पहली बार अमेरिका से एलपीजी (LPG) आयात के लिए एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार का कहना है कि यह समझौता देश की बढ़ती घरेलू मांग को सुरक्षित रखने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
अमेरिकी LPG के लिए भारत का पहला स्ट्रक्चर्ड कॉन्ट्रैक्ट
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत ने अमेरिकी उत्पादकों के साथ अपने पहले औपचारिक LPG आयात समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने इसे “दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते LPG बाजार” के लिए ऐतिहासिक शुरुआत बताया.
पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती और स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है.
IOC–BPCL–HPCL ने मिलकर किया एक साल का सौदा
सरकारी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने संयुक्त रूप से अमेरिका के साथ 2026 के लिए 22 लाख टन प्रति वर्ष (MTPA) LPG खरीदने का करार किया है. यह मात्रा भारत के कुल वार्षिक आयात का लगभग 10% होगी. यह पहला मौका है जब अमेरिकी LPG के लिए भारतीय कंपनियों ने एक औपचारिक, स्ट्रक्चर्ड सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट किया है.
Mount Belvieu बेंचमार्क पर आधारित होगी कीमत
पुरी ने बताया कि सौदा अमेरिका के Mount Belvieu प्राइस बेंचमार्क पर आधारित है, जो वैश्विक LPG मूल्य निर्धारण में प्रमुख भूमिका निभाता है. IOC, BPCL और HPCL के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम पिछले महीनों में अमेरिका जाकर प्रमुख उत्पादकों से वार्ता कर चुकी थी, जिसके बाद यह करार अंतिम रूप तक पहुंचा.
वैश्विक महंगाई के बीच उपभोक्ताओं को मिली राहत
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG कीमतें 60% से ज्यादा बढ़ गई थीं, लेकिन सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को इसका पूरा असर नहीं झेलने दिया. उन्होंने बताया कि जब वैश्विक दरें ₹1100 प्रति सिलेंडर से ऊपर पहुंच गई थीं, तब भी उज्ज्वला उपभोक्ताओं को केवल ₹500–550 में सिलेंडर उपलब्ध करवाए गए. सरकार ने सब्सिडी के तौर पर पिछले साल ₹40,000 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर लोगों को राहत दी.
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