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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का निर्यात मजबूत, लेकिन मार्च में 7.44% की गिरावट
वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए निर्यात के लिहाज से सकारात्मक रहा है. वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय संकट के बावजूद देश ने संतुलित प्रदर्शन किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
वित्त वर्ष 2025-26 में वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के बावजूद भारत ने निर्यात के मोर्चे पर मजबूती दिखाई है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर मार्च के आंकड़ों में साफ दिखा, जहां निर्यात में 7.44% की गिरावट दर्ज की गई. इसके बावजूद पूरे साल का प्रदर्शन संतुलित और लचीला रहा.
पूरे साल में निर्यात ने दिखाया दम
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल (माल और सेवाएं) निर्यात 4.22% बढ़कर करीब 860 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह पिछले साल के मुकाबले मजबूत बढ़त है और दिखाता है कि वैश्विक दबावों के बीच भी भारतीय निर्यात सेक्टर ने स्थिरता बनाए रखी. सिर्फ मर्चेंडाइज (माल) निर्यात की बात करें तो यह 0.93% की बढ़त के साथ 441.78 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. यह आंकड़ा बताता है कि सीमित वृद्धि के बावजूद निर्यात में गिरावट नहीं आई.
आयात बढ़ा, व्यापार घाटा बना चुनौती
पूरे वित्त वर्ष में आयात 7.45% बढ़कर लगभग 775 अरब डॉलर हो गया. खासतौर पर सोना और चांदी के आयात में उछाल ने व्यापार घाटे को बढ़ाकर 333.2 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया. हालांकि मार्च में आयात में कमी देखने को मिली, जिससे मासिक व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया, जो 9 महीनों का निचला स्तर है.
मार्च में पश्चिम एशिया संकट का असर
फरवरी के अंत से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा. भारत हर महीने पश्चिम एशिया को करीब 6 अरब डॉलर का निर्यात करता है, लेकिन संघर्ष के कारण यह घटकर लगभग 2 से 2.5 अरब डॉलर रह गया. इसका असर मार्च के आंकड़ों में दिखा, जहां कुल माल निर्यात 7.44% घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया. यह पिछले 5 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है.
आयात में गिरावट से मिली थोड़ी राहत
मार्च में आयात भी 6.51% घटकर 59.59 अरब डॉलर रहा. कच्चे तेल और सोने के आयात में कमी इसका प्रमुख कारण रही. इससे व्यापार घाटा सीमित होकर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अप्रैल में भी निर्यात पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, सर्विसेज एक्सपोर्ट में मजबूती और नए व्यापार समझौते भविष्य में सहारा दे सकते हैं. भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से निर्यात को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. साथ ही, सेवाओं का निर्यात आने वाले समय में और तेजी पकड़ सकता है.
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