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ईपीसी क्षेत्र में सुस्ती: FY25 में सिर्फ 4% राजस्व वृद्धि, मुनाफा बहु-वर्षीय निचले स्तर पर
अगले वित्त वर्ष में ट्रांसमिशन, अर्बन इन्फ्रा से वापसी की उम्मीद
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत के इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में सुस्त प्रदर्शन किया. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) के अनुसार 22 सूचीबद्ध ईपीसी कंपनियों की कुल आय में केवल 4 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई. EBITDA मार्जिन भी गिरकर महामारी के बाद के सबसे निचले स्तर 10.6 प्रतिशत पर पहुंच गया.
FY25 की चौथी तिमाही और पूरे वर्ष में राजस्व वृद्धि समान रूप से 4 प्रतिशत रही. पिछले वर्ष यह आंकड़ा क्रमशः 16 और 17 प्रतिशत था. गिरावट की मुख्य वजह सड़कों और जल परियोजनाओं के क्षेत्रों में सुस्ती रही. सड़क परियोजनाओं से राजस्व 10 प्रतिशत से ज्यादा घटा.
मार्जिन पर दबाव, T&D ने दिखाई मजबूती
FY25 में समग्र EBITDA मार्जिन 50 बेसिस पॉइंट घटकर 10.6 प्रतिशत रह गया. चौथी तिमाही में यह 10.4 प्रतिशत पर आ गया. सड़क और सिविल निर्माण क्षेत्रों में मार्जिन में 80 बीपीएस की गिरावट आई. वहीं ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 15 प्रतिशत राजस्व वृद्धि और 70 बीपीएस मार्जिन सुधार दर्ज किया.
"ईपीसी क्षेत्र में FY25 में मंदी देखी गई. सड़कों और रेलवे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में चुनावों और परिचालन चुनौतियों के चलते ऑर्डर फ्लो कमजोर रहा" इंडिया रेटिंग्स में कॉरपोरेट रेटिंग्स के निदेशक कृष्ण बिनानी ने कहा. "हम FY26 में राजस्व में निम्न-दो अंकों की वृद्धि और सीमित मार्जिन सुधार की उम्मीद करते हैं. हालांकि जोखिम नकारात्मक दिशा में बने हुए हैं."
FY26 में रिकवरी की उम्मीद
Ind-Ra ने FY26 के लिए 10–12 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि और 30–40 बीपीएस मार्जिन विस्तार का अनुमान जताया है. कंपनियों की गाइडेंस 13–14 प्रतिशत की ग्रोथ का संकेत देती है. इसमें T&D में 18–19 प्रतिशत, अर्बन इंफ्रा में 15–16 प्रतिशत और बिल्डिंग्स व फैक्ट्रीज सेगमेंट में 12–13 प्रतिशत ग्रोथ शामिल है. सड़क क्षेत्र में रिकवरी धीमी रहने की संभावना है और 5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है.
ऑर्डर बुक में सुधार. टेंडर घोषणाओं में गिरावट
22 कंपनियों की कुल ऑर्डर बुक FY25 में 10 प्रतिशत बढ़कर Rs 4.4 लाख करोड़ पर पहुंच गई. ऑर्डर बुक की दृश्यता FY24 के 2.6 गुना से बढ़कर 2.7 गुना हो गई. हालांकि टेंडर घोषणाएं 8 प्रतिशत घटकर Rs 15.6 लाख करोड़ पर आ गईं. वहीं आवंटित टेंडर स्थिर रहे और Rs 6.9 लाख करोड़ पर टिके रहे.
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