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भारत का एनर्जी स्टोरेज सेक्टर 2026 में 10 गुना बढ़ेगा, कई बड़े प्रोजेक्ट होंगे शुरू : रिपोर्ट
2026 भारत के एनर्जी स्टोरेज सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाला है. बड़े प्रोजेक्ट्स के काम शुरू होने, टैरिफ में गिरावट और सरकारी समर्थन के कारण सेक्टर की क्षमता तेजी से बढ़ेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सेक्टर 2026 में नई ऊंचाइयों को छूने वाला है. इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) की रिपोर्ट के अनुसार, देश की बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता 2025 के 507 MWh से बढ़कर 2026 में लगभग 5 GWh तक पहुंच जाएगी. यह तेज बढ़ोतरी पहले से चल रहे और अब पूरा होने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण संभव होगी.
रिकॉर्ड टेंडरिंग से अब असली काम शुरू
2025 में भारत में रिकॉर्ड स्तर पर टेंडर जारी किए गए थे. कुल 69 टेंडर निकले, जिनकी कुल क्षमता 102 GWh रही, जो 2018-2024 के बीच जारी सभी टेंडरों के बराबर है. 2026 वह साल होगा, जब ये टेंडर जमीन पर काम करते हुए नजर आएंगे. 2023 के बाद दिए गए प्रोजेक्ट्स अब अपनी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे होने लगेंगे.
60 GWh के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू
IESA की रिपोर्ट बताती है कि 2026 में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा. 2025 में चल रहे प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता 84% बढ़कर 224 GWh तक पहुंच गई थी. अब लगभग 60 GWh के प्रोजेक्ट्स पर असली काम शुरू होने वाला है, जिससे सेक्टर की गति और तेज होगी.
IESA के अध्यक्ष देबमाल्य सेन का कहना है, “सबकी नजर इस बात पर होगी कि ये प्रोजेक्ट्स तय किए गए प्रदर्शन पर खरे उतरते हैं या नहीं. अगली बड़ी चुनौती इन प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की होगी, खासकर कम टैरिफ वाले प्रोजेक्ट्स के लिए.”
टैरिफ में बड़ी गिरावट, प्रतिस्पर्धा बढ़ी
2025 की सबसे बड़ी घटना टैरिफ में भारी गिरावट रही. 2 घंटे की स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का टैरिफ साल की शुरुआत में ₹2.21 लाख प्रति MW प्रति माह था, जो साल के अंत तक घटकर ₹1.48 लाख प्रति MW प्रति माह रह गया. सोलर के साथ 4 घंटे वाले BESS प्रोजेक्ट्स में टैरिफ घटकर ₹2.70-2.76 प्रति यूनिट (kWh) रह गया. 50 से ज्यादा नए बिडर बाजार में आए, जिससे प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई.
मार्च 2026 में अडानी गुजरात में दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन BESS प्रोजेक्ट में से एक को शुरू करेंगे, जिसकी क्षमता 1,126 MW / 3,530 MWh होगी.
भारत के सबसे बड़े सोलर-प्लस-BESS प्रोजेक्ट के लिए टेंडर
जनवरी 2026 में राजस्थान के पुगल सोलर पार्क में भारत के सबसे बड़े सोलर-प्लस-BESS प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी होंगे. कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी तेजी दिख रही है, खासकर जूनिपर ग्रीन एनर्जी के 60 MWh के BESS प्रोजेक्ट के बाद.
सरकार ने भी सेक्टर को मजबूत समर्थन दिया है. 5,400 करोड़ रुपये की Viability Gap Funding (VGF) की दूसरी किस्त जारी की गई है, जिससे 30 GWh के स्टैंडअलोन BESS प्रोजेक्ट्स को मदद मिलेगी. इसके साथ ही VGF प्रोजेक्ट्स में 20% घरेलू वैल्यू जोड़ना अनिवार्य किया गया है. पंप्ड स्टोरेज और सोलर-प्लस-BESS प्रोजेक्ट्स के लिए इंटरस्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) चार्ज में छूट 2028 तक बढ़ा दी गई है.
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