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सितंबर में भारत की कारोबारी गतिविधियों ने पकड़ी रफ्तार, फ्लैश PMI 56.5 पर पहुंचा
सर्वे के अनुसार, सितंबर में भारत के निजी क्षेत्र में नए कारोबार में तेजी आई. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में मांग में सुधार हुआ, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नए ऑर्डर की वृद्धि अधिक मजबूत रही.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
सितंबर में भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है. HSBC के फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में आउटपुट और नए ऑर्डर बढ़ने से निजी क्षेत्र की गतिविधियां तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं. सितंबर में कंपोजिट फ्लैश PMI अगस्त के 54.3 से बढ़कर 56.5 हो गया.
62 महीने से 50 के स्तर से ऊपर PMI
S&P Global की ओर से तैयार HSBC फ्लैश PMI लगातार 62वें महीने 50 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर रहा. PMI में 50 से ऊपर का आंकड़ा निजी क्षेत्र की गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर गिरावट को दर्शाता है.
सर्वे के अनुसार, सितंबर में भारत के निजी क्षेत्र में नए कारोबार में तेजी आई. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में मांग में सुधार हुआ, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नए ऑर्डर की वृद्धि अधिक मजबूत रही. कुल नए कारोबार में वृद्धि सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई.
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों में सुधार
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त के 52.8 से बढ़कर सितंबर में 55.7 हो गया. वहीं, फ्लैश इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स 54.1 से बढ़कर 55.8 पर पहुंच गया.
सर्विस सेक्टर में मार्केटिंग गतिविधियों के साथ नए ऑर्डर बढ़े. प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट, ट्रैवल, सॉफ्टवेयर और डिजिटल सॉल्यूशंस जैसी सेवाओं की मांग में सुधार दर्ज किया गया. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एल्युमीनियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य उत्पादों, दवाओं और नए प्रोडक्ट मॉडल की मांग बढ़ी. इससे फैक्ट्रियों में उत्पादन और नए ऑर्डर दोनों को समर्थन मिला.
HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में तेज सुधार ने निजी क्षेत्र की गतिविधियों को गति दी. उन्होंने कहा कि आउटपुट और घरेलू नए ऑर्डर में तेजी रही, हालांकि मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के बीच कंपनियां अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सुरक्षा उपाय भी कर रही हैं.
एक्सपोर्ट ऑर्डर बढ़े, लेकिन रफ्तार धीमी
सितंबर में नए एक्सपोर्ट ऑर्डर में भी बढ़ोतरी जारी रही. हालांकि, इन ऑर्डर की वृद्धि दर पिछले तीन वर्षों में सबसे धीमी रही. इसके बावजूद घरेलू मांग में सुधार ने कंपनियों की कुल ऑर्डर बुक को मजबूती दी.
नए ऑर्डर और उत्पादन बढ़ने के साथ सितंबर में रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में कंपनियों ने नई नियुक्तियां कीं और दोनों क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की रफ्तार लगभग समान रही.
इनपुट लागत का दबाव घटा
सर्वे के मुताबिक, निजी क्षेत्र में इनपुट लागत बढ़ने की रफ्तार जनवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई. सर्विस कंपनियों पर लागत का दबाव कम होने से मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बढ़ी लागत का असर काफी हद तक संतुलित हुआ. हालांकि, कुछ कंपनियों ने इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, खाद्य उत्पादों, ईंधन, धातुओं, दवाओं और टेक्नोलॉजी संसाधनों की लागत बढ़ने की जानकारी दी.
सितंबर में कंपनियों ने बिक्री कीमतों में भी बढ़ोतरी की. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में फैक्ट्री-गेट कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार तेज हुई, जबकि सर्विस कंपनियों की ओर से ली जाने वाली कीमतों में वृद्धि की गति कुछ धीमी रही.
तैयार माल का स्टॉक साढ़े 11 साल के उच्च स्तर पर
भंडारी के मुताबिक, इनपुट की खरीदारी में तेजी आई है और तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स करीब साढ़े 11 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है. मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने के कारण आउटपुट कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. यह कंपनियों की मार्जिन को बनाए रखने की कोशिश को दर्शाता है.
फ्लैश PMI पूरे महीने के PMI के शुरुआती संकेत देता है. यह महीने के दौरान मिले करीब 90 फीसदी सर्वे जवाबों पर आधारित होता है. मैन्युफैक्चरिंग PMI का अंतिम आंकड़ा 1 अक्टूबर और सर्विस PMI का अंतिम आंकड़ा 6 अक्टूबर को जारी किया जाएगा.
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