ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत को संभावनाओं वाले देश से तकनीक, प्रतिभा, विनिर्माण और उद्यमिता के दम पर उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी बदलती तस्वीर दुनिया के सामने रखने का अवसर देता है.
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डॉ. अनुराग बत्रा
वर्षों से भारत को संभावनाओं वाले देश के रूप में देखा जाता रहा है. लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है. आज भारत के पास वैश्विक विमर्श को प्रभावित करने का पैमाना, प्रतिभा, तकनीक और महत्वाकांक्षा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत को इस बदलाव और अपनी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दुनिया के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर देती है.
संभावनाओं से वैश्विक शक्ति तक
एक समय था जब भारत की वैश्विक छवि काफी हद तक उसकी आबादी, लोकतांत्रिक साख और अंग्रेजी बोलने वाली प्रतिभाओं के समूह के इर्द-गिर्द बनी थी. ये अब भी महत्वपूर्ण ताकतें हैं, लेकिन आज का भारत इससे कहीं व्यापक तस्वीर पेश करता है. यह एक ऐसा देश है जो बड़े पैमाने पर तकनीक विकसित कर रहा है, वैश्विक कारोबार खड़ा कर रहा है, कुशल पेशेवर तैयार कर रहा है और पूंजी तथा विनिर्माण के लिए तेजी से महत्वपूर्ण गंतव्य बन रहा है.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस नए भारत को एक मंच देता है. जब दुनिया की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता भारत पहुंचते हैं, तो देश केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम की मेजबानी नहीं कर रहा होता. वह खुद को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा होता है.
और यह महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय छवि, बिल्कुल कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा की तरह, केवल इस बात से नहीं बनती कि कोई देश अपने बारे में क्या कहता है, बल्कि इस बात से बनती है कि दुनिया को वास्तव में क्या देखने को मिलता है.
तकनीक भारत की नई पहचान
शायद कहीं भी बदलाव तकनीक के क्षेत्र से अधिक स्पष्ट नहीं है. भारत की तकनीकी कहानी सॉफ्टवेयर सेवाओं और आईटी आउटसोर्सिंग से शुरू हुई थी. अब यह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष तकनीक, डीप टेक और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम तक काफी आगे बढ़ चुकी है.
भारत के डिजिटल बदलाव का पैमाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. देश ने यह दिखाया है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल छोटी और संपन्न आबादी के लिए ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के बीच भी किया जा सकता है.
बड़े पैमाने के लिए तकनीक विकसित करने की यह क्षमता भारत की सबसे शक्तिशाली वैश्विक संपत्तियों में से एक बन सकती है. दुनिया ऐसे समाधानों की तलाश में है जो किफायती, अनुकूलन योग्य और बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों. भारत पहले ही घरेलू स्तर पर इस मॉडल के साथ प्रयोग कर रहा है.
मानवीय प्रतिभा अब भी सबसे बड़ी ताकत
हालांकि, तकनीक कहानी का केवल एक हिस्सा है. भारत का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ अब भी उसके लोग हो सकते हैं. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से लेकर डॉक्टरों, उद्यमियों, डिजाइनरों, वित्तीय पेशेवरों और कॉर्पोरेट लीडर्स तक, भारतीय प्रतिभा तेजी से वैश्विक कार्यबल का हिस्सा बन गई है. भारतीय मूल के पेशेवर दुनियाभर में तकनीक, कारोबार और शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावशाली पदों पर हैं. लेकिन एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है. भारत अब केवल प्रतिभाओं को विदेश नहीं भेज रहा है. वह तेजी से देश के भीतर ही इन प्रतिभाओं के लिए अवसर पैदा कर रहा है.
यह संयोजन तकनीक के समर्थन वाली मानवीय प्रतिभा और एक विशाल घरेलू बाजार, एक मजबूत आर्थिक लाभ बन सकता है.
उभर रहा है विनिर्माण वाला भारत
दशकों तक भारत की आर्थिक कहानी में सेवाओं का असमान रूप से अधिक योगदान रहा. अब यह बदल रहा है. चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा या अन्य उभरते क्षेत्र हों, विनिर्माण देश की वैश्विक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है. आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिश कर रही वैश्विक कंपनियां भारत को अपने विकल्पों में तेजी से शामिल कर रही हैं.
ब्रांड इंडिया के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि विनिर्माण एक अलग धारणा बनाता है. यह दुनिया को बताता है कि भारत केवल ऐसा बाजार नहीं है जहां उत्पाद बेचे या सेवाएं प्रदान की जाती हैं. यह वह जगह भी हो सकती है जहां उत्पादों को डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किया जाता है.
उद्यमिता की ऊर्जा
एक और ताकत जिस पर ध्यान देने की जरूरत है, वह है भारत की उद्यमशील संस्कृति. स्टार्टअप इकोसिस्टम ने ऐसी पीढ़ी तैयार की है जो पहले दिन से ही वैश्विक स्तर पर सोचने में सहज है. युवा उद्यमी फिनटेक, ई-कॉमर्स, SaaS, हेल्थकेयर, शिक्षा, मोबिलिटी और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में कंपनियां बना रहे हैं.
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उद्यमिता अब कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहर और उपभोक्ताओं की नई पीढ़ी भी भारत के डिजिटल और आर्थिक विस्तार का हिस्सा बन रही है. यह उद्यमशील ऊर्जा राष्ट्रीय ब्रांड में एक महत्वपूर्ण बात जोड़ती है: ऐसे देश की धारणा जो प्रयोग करने के लिए तैयार है.
बुनियादी ढांचा बदल रहा है अनुभव
ब्रांड इंडिया तेजी से इस बात से भी आकार ले रहा है कि आगंतुक वास्तव में क्या अनुभव करते हैं. नए हवाई अड्डे, राजमार्ग, मेट्रो सिस्टम, डिजिटल सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और बेहतर कनेक्टिविटी देश के भौतिक अनुभव को बदल रहे हैं. बदलाव असमान है और अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन दिशा स्पष्ट है.
शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले किसी अंतरराष्ट्रीय आगंतुक के लिए ये भौतिक अनुभव कभी-कभी सरकारी प्रस्तुति से कहीं अधिक प्रभावशाली तरीके से संदेश दे सकते हैं.
संस्कृति भारत को भावनात्मक बढ़त देती है
एक और आयाम है जिसे आर्थिक आंकड़े नहीं दर्शा सकते.
भारत की सांस्कृतिक पहुंच ऐसी है, जिसकी बराबरी बहुत कम देश कर सकते हैं. इसका खान-पान, सिनेमा, संगीत, योग, त्योहार, फैशन, आध्यात्मिकता और विविध परंपराएं देश की सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंच चुकी हैं. यह ब्रांड इंडिया को ऐसी चीज देता है जिसे बनाने के लिए कई आर्थिक शक्तियां संघर्ष करती हैं, एक भावनात्मक जुड़ाव.
अवसर यह है कि इस सांस्कृतिक ताकत को भारत की आर्थिक और तकनीकी कहानी के साथ जोड़ा जाए. आधुनिक भारत को अपनी विरासत और अपनी महत्वाकांक्षा के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. दोनों साथ-साथ चल सकते हैं.
दुनिया की नजर भारत पर
आखिरकार, यही वजह है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है. भारत को एक वैश्विक मंच पर कूटनीति, कारोबार, तकनीक, संस्कृति और मानवीय प्रतिभा को एक साथ लाने का अवसर मिलता है. नेता बैठकों के लिए आ सकते हैं, लेकिन दुनिया उस देश को भी देख रही होगी जहां ये बैठकें हो रही हैं.
बड़ा अवसर वैश्विक नैरेटिव को “भारत में संभावनाएं हैं” से बदलकर “भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति है” करने का है.
यह बदलाव किसी एक शिखर सम्मेलन की वजह से नहीं होगा. यह निरंतर आर्थिक विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे, नवाचार, संस्थागत मजबूती और भारत की विशाल मानवीय पूंजी को वैश्विक मूल्य में बदलने की क्षमता के जरिए होगा, लेकिन हर देश को ऐसे पलों की जरूरत होती है जब दुनिया ठहरकर उसे एक अलग नजरिए से देखे.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ऐसा ही एक पल हो सकता है. और अगर ब्रांड इंडिया इस अवसर का सही इस्तेमाल कर पाता है, तो इसका लाभ शिखर सम्मेलन से कहीं आगे तक पहुंच सकता है.
डॉ. अनुराग बत्रा, BW रिपोर्टर्स
डॉ. अनुराग बत्रा BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ हैं. वह exchange4media ग्रुप के संस्थापक भी हैं. पहली पीढ़ी के उद्यमी और मीडिया लीडर होने के साथ-साथ वह एंजल निवेशक, लेखक, टेलीविजन होस्ट और उद्यमियों तथा मीडिया पेशेवरों के मेंटोर भी हैं. वह कई कॉर्पोरेट और संस्थागत बोर्डों में कार्यरत हैं और प्रबंधन शिक्षा से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है. MDI Gurgaon के पूर्व छात्र और इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कार्य कर चुके हैं और MDI Alumni Association के अध्यक्ष भी रहे हैं. वह International Academy of Television Arts & Sciences के सदस्य भी हैं. डॉ. बत्रा का मानना है कि जब जुनून किसी का पेशा बन जाता है, तो काम उद्देश्य की गहरी भावना हासिल कर लेता है.
Tracxn के अनुसार, भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़ी कुल 3,557 कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें 281 कंपनियों को फंडिंग मिली है, जबकि 142 कंपनियों ने इक्विटी कैपिटल जुटाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 281 फंडेड कंपनियों ने अब तक कुल 1.4 अरब डॉलर की इक्विटी फंडिंग जुटाई है. इसमें से करीब 701 मिलियन डॉलर यानी लगभग आधी रकम 2025 के बाद जुटाई गई है. सेक्टर में बढ़ती फंडिंग ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
भारत में 3,557 कंपनियां सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़ी
Tracxn के अनुसार, भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़ी कुल 3,557 कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें 281 कंपनियों को फंडिंग मिली है, जबकि 142 कंपनियों ने इक्विटी कैपिटल जुटाया है. साल 2026 में अब तक इस सेक्टर में 228 मिलियन डॉलर की फंडिंग हो चुकी है. इससे संकेत मिलता है कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में पूंजी का प्रवाह बना हुआ है.
Tessolve Semiconductor को सबसे ज्यादा फंडिंग
Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक, Tessolve Semiconductor ने अब तक सबसे ज्यादा 213 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. इसके बाद ILJIN Electronics को 198 मिलियन डॉलर और VVDN को 129 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है. ये तीनों कंपनियां भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में सबसे बड़ी घोषित इक्विटी फंडिंग हासिल करने वाली कंपनियों में शामिल हैं.
इलेक्ट्रिक मैन्यूफैक्चरिंग सर्विसेज में सबसे ज्यादा निवेश
2025 के बाद इलेक्ट्रिक मैन्यूफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर में सबसे ज्यादा फंडिंग आई है. इस अवधि में इस बिजनेस मॉडल से जुड़ी कंपनियों ने 313 मिलियन डॉलर जुटाए. इसके बाद इमबेडिड हार्डवेयर का स्थान रहा, जिसमें 51.9 मिलियन डॉलर की फंडिंग हुई. इसके अलावा पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटिड सर्किट्स और फैबलेस सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को भी निवेश मिला है.
2021 से 2025 के बीच फंडिंग में तेज बढ़ोतरी
Tracxn के अनुसार, भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में फंडिंग 2021 में 49 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 473 मिलियन डॉलर हो गई. इस दौरान पांच साल की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 36 फीसदी से अधिक रही. फंडिंग में यह तेजी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, हार्डवेयर, चिप डिजाइन और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी में काम कर रही कंपनियों तक पहुंची है.
बेंगलुरु बना सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर हब
बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर हब बना हुआ है. Tracxn के मुताबिक, शहर में इस सेक्टर से जुड़ी 626 कंपनियां हैं, जो देश में ट्रैक की गई कुल 3,557 कंपनियों का करीब 18 फीसदी है. कुल इक्विटी फंडिंग में भी बेंगलुरु की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 40.1 फीसदी रही है. इसके बाद नोएडा की हिस्सेदारी 16.4 फीसदी, गुरुग्राम की 10.7 फीसदी, कोच्चि की 8.8 फीसदी और हैदराबाद की 6.2 फीसदी रही.
IPO से ज्यादा अधिग्रहण बने एग्जिट का रास्ता
Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए IPO की तुलना में अधिग्रहण ज्यादा सामान्य एग्जिट रूट रहा है. सेक्टर में अब तक 62 अधिग्रहण हुए हैं, जबकि 42 कंपनियां IPO के जरिए शेयर बाजार में पहुंची हैं.
जिन कंपनियों का अधिग्रहण हुआ, उन्हें अपनी पहली फंडिंग से एग्जिट तक पहुंचने में औसतन 11.8 साल लगे. वहीं, IPO के जरिए बाजार में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों को औसतन 16.5 साल लगे.
सेक्टर में सबसे बड़ा दर्ज अधिग्रहण eInfochips का रहा, जिसे 282 मिलियन डॉलर में अधिग्रहित किया गया. इसके बाद Narayan Powertech का 262 मिलियन डॉलर और SmartPlay Technologies का 180 मिलियन डॉलर का अधिग्रहण हुआ.
Semicon India 2026 से पहले सामने आए आंकड़े
ये आंकड़े Semicon India 2026 के पांचवें संस्करण से पहले सामने आए हैं. यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. इस आयोजन में वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों, सरकार, राज्यों और इंडस्ट्री से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है.
हाल के महीनों में सेक्टर में पब्लिक मार्केट गतिविधियां भी बढ़ी हैं. Tempsens Instruments अगस्त 2026 में 263 मिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई, जबकि Merritronix ने जून 2026 में लिस्टिंग की थी. इससे अधिग्रहण और इक्विटी फंडिंग के साथ सेमीकंडक्टर सेक्टर की एग्जिट गतिविधियों में भी तेजी दिख रही है.
Vi को अगले 10 वर्षों में अपने नेटवर्क को अपग्रेड और विस्तार करने के लिए कुल करीब ₹60,000 करोड़ की जरूरत होने का अनुमान है. इसमें से लगभग ₹35,000 करोड़ का इंतजाम लोन के जरिए किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वोडाफोन आइडिया (Vi) अपने नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए करीब ₹35,000 करोड़ का कर्ज जुटाने की तैयारी में है. इस लोन के लिए 8 से 10 बैंकों का कंसोर्टियम बनाए जाने की योजना है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) करीब ₹7,000 करोड़ के कर्ज के साथ इस कंसोर्टियम का सबसे बड़ा कर्जदाता हो सकता है. हालांकि, इतनी बड़ी फंडिंग देने से पहले बैंकों ने कंपनी के सामने कई शर्तें रखी हैं.
SBI देगा करीब ₹7,000 करोड़
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SBI ने Vi को करीब ₹7,000 करोड़ का कर्ज देने का प्रस्ताव मंजूर किया है. यह प्रस्तावित ₹35,000 करोड़ के लोन का करीब 20 फीसदी है. बाकी रकम अन्य सरकारी और निजी बैंकों से जुटाई जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, कंसोर्टियम में शामिल प्रत्येक बैंक को कम से कम ₹1,500 करोड़ का कर्ज देना होगा. NaBFID करीब ₹4,000 करोड़ के एक्सपोजर के साथ दूसरा बड़ा कर्जदाता हो सकता है.
नेटवर्क अपग्रेड पर खर्च होंगे ₹60,000 करोड़
Vi को अगले 10 वर्षों में अपने नेटवर्क को अपग्रेड और विस्तार करने के लिए कुल करीब ₹60,000 करोड़ की जरूरत होने का अनुमान है. इसमें से लगभग ₹35,000 करोड़ का इंतजाम लोन के जरिए किया जाएगा. इसके अलावा करीब ₹25,000 करोड़ कंपनी अपनी आंतरिक कमाई और भविष्य में इक्विटी के जरिए जुटाने की योजना बना सकती है.
बैंकों ने रखीं कई शर्तें
इतनी बड़ी रकम का कर्ज देने से पहले बैंकों ने Vi के सामने कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें सबसे अहम शर्त यह है कि लोन की अवधि के दौरान कुमार मंगलम बिड़ला को कंपनी का चेयरमैन बने रहना होगा. बिड़ला मई 2026 में दोबारा Vi के चेयरमैन बने थे. इसके अलावा SBI कंपनी के कैश फ्लो पर निगरानी रख सकता है. कंपनी के फंड के लेन-देन को बैंकिंग सिस्टम के जरिए ट्रैक करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है. बैंकों ने आदित्य बिड़ला ग्रुप से कंपनी में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बनाए रखने और कर्ज के लिए मजबूत गारंटी देने की मांग भी की है.
कई सरकारी और निजी बैंक बातचीत में शामिल
Vi के प्रस्तावित कंसोर्टियम में पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे सरकारी बैंक शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा HDFC Bank और ICICI Bank जैसे निजी बैंक भी कर्ज देने को लेकर बातचीत का हिस्सा हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, लोन की पूरी रूपरेखा अक्टूबर के मध्य तक तैयार होने की उम्मीद है.
Vi में सरकार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
वोडाफोन आइडिया में भारत सरकार की करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है. यह हिस्सेदारी कंपनी के बकाये को इक्विटी में बदलने के बाद बनी थी. ब्रिटेन की Vodafone Group के पास करीब 19 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिस्सेदारी लगभग 6.64 फीसदी है. बैंकों की ओर से बिड़ला ग्रुप से गारंटी मांगने के पीछे कंपनी की पिछली वित्तीय स्थिति भी एक अहम वजह मानी जा रही है. वर्ष 2021 में कंपनी पर भारी कर्ज के दबाव के बीच कुमार मंगलम बिड़ला ने Vi के बोर्ड से इस्तीफा दिया था. ऐसे में बैंक चाहते हैं कि प्रस्तावित कर्ज के दौरान कंपनी के प्रबंधन और प्रमोटर समर्थन को लेकर पर्याप्त भरोसा बना रहे.
इस हफ्ते सबसे बड़ा IPO NSE का होगा. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का IPO 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने इसके लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इस हफ्ते प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए कई मौके आने वाले हैं. 16 से 21 सितंबर के बीच NSE, Hero Motors, Jindal Supreme, SS Retail और Sona Selection India समेत 5 मेनबोर्ड कंपनियां IPO लेकर आ रही हैं. इनमें NSE का करीब ₹22,561 करोड़ का इश्यू सबसे बड़ा है. इसके अलावा SME सेगमेंट में भी 6 कंपनियां IPO लॉन्च करेंगी. ज्यादातर मेनबोर्ड IPO में रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट की कीमत करीब ₹14,000 से ₹15,000 के बीच रखी गई है.
NSE IPO पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
इस हफ्ते सबसे बड़ा IPO NSE का होगा. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का IPO 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने इसके लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 8 शेयर होंगे. अपर प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशक को एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने होंगे. NSE का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है. इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे.
Hero Motors IPO में ₹14,952 का न्यूनतम निवेश
Hero Motors का IPO 16 सितंबर को खुलेगा और 18 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹79 से ₹84 तय किया है. एक लॉट में 178 शेयर होंगे. अपर प्राइस बैंड के आधार पर एक लॉट के लिए ₹14,952 का निवेश करना होगा. Hero Motors ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पावरट्रेन और इंजीनियरिंग से जुड़े समाधान तैयार करती है. कंपनी IPO के जरिए करीब ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है.
Jindal Supreme और SS Retail भी बाजार में
Jindal Supreme का IPO भी 16 सितंबर से 18 सितंबर तक खुला रहेगा. इसका प्राइस बैंड ₹88 से ₹93 प्रति शेयर है और लॉट साइज 161 शेयर का है. अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट खरीदने के लिए ₹14,973 की जरूरत होगी. कंपनी स्टील पाइप, ट्यूब और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उत्पादों के कारोबार में है. वहीं, SS Retail का IPO 16 सितंबर को खुलेगा और 18 सितंबर को बंद होगा. कंपनी ने प्राइस बैंड ₹403 से ₹424 तय किया है. एक लॉट में 35 शेयर होंगे. अपर बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए ₹14,840 का निवेश करना होगा. कंपनी मोबाइल फोन, एक्सेसरीज और इलेक्ट्रॉनिक सामान की रिटेल बिक्री से जुड़ी है.
Sona Selection India IPO 17 सितंबर से
Sona Selection India का IPO 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर तक इसमें बोली लगाई जा सकेगी. कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹94 से ₹99 तय किया है. एक लॉट में 150 शेयर होंगे. अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,850 का निवेश करना होगा. कंपनी IPO के जरिए करीब ₹142 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. यह पूरा इश्यू फ्रेश शेयरों का है, यानी इससे मिलने वाली रकम कंपनी के पास जाएगी.
SME सेगमेंट में भी 6 IPO
मेनबोर्ड IPO के अलावा SME सेगमेंट में भी इस हफ्ते 6 कंपनियां IPO लेकर आ रही हैं. इनमें Axiom Gas Engineering, Kheria Autocomp, Spectra Technology Solutions, Quanto Agroworld, Shakti Polytarp और Vama Wovenfab शामिल हैं. इस तरह 16 से 21 सितंबर के बीच प्राइमरी मार्केट में कुल 11 IPO निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे. हालांकि, SME IPO में निवेश से जुड़े नियम, जोखिम और शेयरों की ट्रेडिंग की शर्तें मेनबोर्ड IPO से अलग हो सकती हैं.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, IPO में निवेश करने से पहले केवल इश्यू के आकार या ग्रे मार्केट प्रीमियम को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. निवेशकों को कंपनी का कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, कर्ज, IPO से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल और संभावित जोखिमों का आकलन करना चाहिए. खासकर SME IPO में निवेश करते समय जोखिम और शेयरों की लिक्विडिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग की और ग्लोबल साउथ को ‘रूल-टेकर’ से ‘रूल-शेपर’ बनाने पर जोर दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की जोरदार वकालत की. ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) समेत प्रमुख वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों की ‘फ्रंट रो’ में रहते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में ‘बैक रो’ में हैं. उन्होंने मौजूदा ‘विशेषाधिकार की पिरामिड व्यवस्था’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने का आह्वान किया.
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत
मोदी ने कहा कि वैश्विक शासन की मौजूदा व्यवस्थाओं को आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला ‘रूल-टेकर’ बने रहने के बजाय नियमों को आकार देने वाला ‘रूल-शेपर’ बनना चाहिए.
युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं की बातचीत एवं वार्ता क्षमता मजबूत करने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया. इसके तहत युवा अधिकारियों को बातचीत और नेगोशिएशन, व्यावहारिक नीति निर्माण और कानूनी विशेषज्ञता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया. इसका उद्देश्य वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की प्रभावी भागीदारी और बातचीत की क्षमता को मजबूत करना है.
समुद्री कर्मचारियों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क
मोदी ने वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने में सीफर्स यानी समुद्री कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संकट के समय अक्सर इन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती. प्रधानमंत्री ने ऐसे हालात में समुद्री कर्मचारियों की मदद के लिए ‘सीफर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा.
नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणा पत्र को अपनाया गया
सत्र के अंत में ब्रिक्स नेताओं ने नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स डिक्लेरेशन को अपनाया. इसमें समूह की साझा प्राथमिकताओं और भविष्य में सहयोग की दिशा तय की गई है. अपने संबोधन के समापन पर मोदी ने कहा कि जब भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए. उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के लिए ‘आवाज से प्रभाव’ और ‘विशेषाधिकार से साझेदारी’ की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया.
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार, डिजिटल इकोनॉमी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख पहलों का प्रस्ताव रखा. इनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), व्यापार और निवेश, डिजिटल इंडस्ट्री, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और विज्ञान एवं तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर है.
शी ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच ब्रिक्स देशों को अपने सहयोग की नींव मजबूत करनी होगी. इसके साथ ही उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ मिलकर अधिक एकीकृत बाजार, सुरक्षित औद्योगिक एवं सप्लाई चेन और नवाचार को बढ़ावा देना होगा.
ब्रिक्स AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी का प्रस्ताव
शी की पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर है. चीन ने ब्रिक्स एआई ओपन-सोर्स कम्युनिटी स्थापित करने में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है. इस पहल के तहत बड़े भाषा मॉडल (LLM) के विकास और इस्तेमाल, विशेष एआई सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक खुले इकोसिस्टम के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा.
शी ने कहा कि एआई का विकास लोगों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए. साथ ही, वैश्विक एआई गवर्नेंस के लिए सहमति आधारित व्यवस्था बनाने की दिशा में काम होना चाहिए, ताकि नई तकनीक का फायदा साझा समृद्धि में बदले.
व्यापार और निवेश को आसान बनाने पर जोर
दूसरी पहल व्यापार और निवेश को सुविधाजनक बनाने से जुड़ी है. चीन ने ब्रिक्स स्पेशल इकोनॉमिक जोन पार्टनरशिप स्थापित करने का सुझाव दिया है. शी के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत सदस्य देश नीतियों के बीच समन्वय के लिए एक इंटेलिजेंट पोर्टल स्थापित कर सकेंगे और सहयोग के नए अवसर तलाश सकेंगे. उन्होंने कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स फोरम ऑन ट्रेड इन सर्विसेज की मेजबानी करेगा और इसमें ब्रिक्स देशों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया.
डिजिटल इकोनॉमी के लिए क्लाउड प्लेटफॉर्म
शी की तीसरी पहल डिजिटल इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाने से संबंधित है. चीन ब्रिक्स डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने की दिशा में काम करेगा. इसके साथ डिजिटल स्किल ट्रेनिंग, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों में डिजिटल इकोनॉमी के विकास और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है.
स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ेगा सहयोग
चौथी पहल स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की है. शी ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों को स्मार्ट फैक्ट्रियां स्थापित करने, मानक और नियम विकसित करने तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बदलाव और अपग्रेडेशन में मदद करने के लिए तैयार है. इस पहल के जरिए उन्नत विनिर्माण को औद्योगिक क्षमता के आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों के केंद्र में रखा गया है.
इंजीनियर और वैज्ञानिक प्रतिभाओं के विकास की योजना
पांचवीं पहल विज्ञान एवं तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर केंद्रित है. चीन ने ब्रिक्स इंजीनियर कल्टिवेशन अलायंस बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसके जरिए इंजीनियरों को संयुक्त रूप से प्रशिक्षित करने और उनकी दक्षता के मानकों को आपसी मान्यता देने की योजना है.
शी ने विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार पर केंद्रित ब्रिक्स युवा विनिमय कार्यक्रम शुरू करने की भी घोषणा की. इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी प्रतिभाओं को विकसित करना है.
ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की अपील
अपने संबोधन में शी ने ग्लोबल साउथ से अंतरराष्ट्रीय मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने और बहुपक्षवाद, संप्रभु समानता तथा संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने विकासशील देशों की भागीदारी और आवाज बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई. साथ ही वैश्विक व्यापार संस्थानों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी का समर्थन किया.
शी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को औद्योगिक और सप्लाई चेन को स्थिर और सुचारु बनाए रखने, खुले सहयोग को बढ़ावा देने और एक बड़े एकीकृत बाजार के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने चीन की ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव और उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट एंड रोड सहयोग के लिए समर्थन भी दोहराया.
शी ने कहा कि इस साल चीन की आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ी 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत हुई है. उन्होंने कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाना और उच्च मानकों के साथ अर्थव्यवस्था को खोलना जारी रखेगा. उन्होंने ब्रिक्स देशों से सहयोग मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के लिए एक अधिक मजबूत मंच तैयार करने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया.
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में आयोजित कारोबारी बैठकों के तहत हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से इतर रामाफोसा के भारत दौरे के दौरान हुई कारोबारी बैठकों का हिस्सा थी. दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना था.
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में आयोजित कारोबारी बैठकों के तहत हुई.
भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच निवेश बढ़ाने पर जोर
रामाफोसा ने नई दिल्ली में Motherson Modules and Polymer Division के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टॉम जोसेफ से भी मुलाकात की. इन बैठकों के जरिए दक्षिण अफ्रीका भारत के साथ व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है.
BRICS बिजनेस फोरम में बोले रामाफोसा
इससे पहले शुक्रवार को रामाफोसा ने BRICS बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार के बदलते स्वरूप, तकनीकी प्रगति और जलवायु परिस्थितियों में बदलाव के कारण देशों और कंपनियों को अपनी सोर्सिंग, उत्पादन और निवेश से जुड़े फैसलों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है.रामाफोसा ने कहा कि BRICS के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है और बदलती वैश्विक परिस्थितियां ग्लोबल साउथ के लिए अधिक लचीली, विविध और समावेशी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने का अवसर हैं.
निजी क्षेत्र की भूमिका को बताया अहम
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने BRICS में आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि 2013 में दक्षिण अफ्रीका की पहली BRICS अध्यक्षता के दौरान BRICS Business Council की स्थापना की गई थी. रामाफोसा ने कहा कि आर्थिक सहयोग केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि BRICS बिजनेस फोरम में दक्षिण अफ्रीका की करीब 120 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं.
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी
दक्षिण अफ्रीका ने भारत के साथ आर्थिक सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए फार्मास्यूटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी वैल्यू चेन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की पहचान की है.
12-13 सितंबर को हो रहा BRICS Summit
रामाफोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं. भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. BRICS Business Forum में कारोबारी नेता, मंत्री और सदस्य देशों के प्रमुख व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं.
अगस्त 2024 में लॉन्च हुए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का नेटवर्क करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंचा, Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार 25 गुना बढ़ा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फ्लिपकार्ट (Flipkart) की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स (Flipkart Minutes) ने लॉन्च के करीब दो साल में तेज विस्तार दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, अगस्त 2024 में शुरुआत के बाद से प्लेटफॉर्म की सालाना वृद्धि 4 गुना रही है. इसका नेटवर्क अब 150 से ज्यादा शहरों में करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंच गया है. कंपनी का कहना है कि इस अवधि में प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की संख्या 4 लाख से ज्यादा रही है. फ्लिपकार्ट मिनट्स के करीब 60 फीसदी ग्राहक दोबारा प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करते हैं. कंपनी के अनुसार, यह क्विक कॉमर्स के प्रति ग्राहकों की बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है.
टियर दो शहरों में 25 गुना बढ़ा ग्राहक आधार
फ्लिपकार्ट मिनट्स की ग्रोथ में छोटे शहरों की भूमिका तेजी से बढ़ी है. अंबाला, बाराबंकी, भागलपुर, दुर्गापुर, कानपुर, रुड़की, सिलीगुड़ी, सलेम और तिरुप्पुर जैसे Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार सालाना आधार पर करीब 25 गुना बढ़ा है. इन शहरों में ग्राहकों की मांग अब केवल रोजमर्रा की जरूरतों तक सीमित नहीं है. कोरियन नूडल्स, सॉस और रेडी-टू-ईट मील्स के अलावा प्रीमियम स्किनकेयर और पर्सनल केयर जैसे उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है.
Gen Z बना तेजी से बढ़ता ग्राहक वर्ग
प्लेटफॉर्म पर Gen Z ग्राहकों की संख्या पिछले 12 महीनों में सालाना आधार पर करीब 5 गुना बढ़ी है. ब्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, गेमिंग, वियरेबल्स, फ्रेगरेंस, हेल्थ एवं न्यूट्रिशन और ग्रूमिंग जैसी कैटेगरी में 45 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर Gen Z ग्राहकों से आ रहे हैं.
गॉरमेट कैटेगरी में भी हर तीन में से करीब एक ऑर्डर Gen Z ग्राहक कर रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि युवा ग्राहक क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल सिर्फ किराना और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और प्रीमियम उत्पादों की खरीदारी के लिए भी कर रहे हैं.
गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी में 8 गुना वृद्धि
कंपनी के मुताबिक, पिछले एक साल में लॉन्च की गई गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी कैटेगरी में 8 गुना वृद्धि हुई है. इनमें कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल, इम्पोर्टेड चीज, एवोकाडो की अंतरराष्ट्रीय किस्मों और कोरियन रेडी-टू-ईट मील्स जैसे उत्पाद शामिल हैं. वहीं, मेन्स ग्रूमिंग कैटेगरी में सालाना आधार पर करीब 6 गुना और पेट फूड कैटेगरी में 5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स पर अब तक का सबसे बड़ा एकल ऑर्डर 6 लाख रुपये का रहा, जिसमें पांच स्मार्टफोन शामिल थे. यह ऑर्डर दिखाता है कि क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल अब किराना और रोजमर्रा के सामान से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कैटेगरी में भी हो रहा है.
करीब 500 D2C ब्रांड्स जुड़े
अगस्त 2024 से अब तक फ्लिपकार्ट मिनट्स ने करीब 500 D2C ब्रांड्स को अपने पार्टनर इकोसिस्टम से जोड़ा है. कंपनी के अनुसार, इससे इन ब्रांड्स को हाइपरलोकल मांग और नए ग्राहक वर्गों तक पहुंचने का अवसर मिला है. किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ साझेदारी के जरिए प्लेटफॉर्म ने किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का माध्यम भी उपलब्ध कराया है. कंपनी का कहना है कि इससे किसानों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल रही है.
इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग पर जोर
फ्लिपकार्ट मिनट्स अपने डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. कंपनी के मुताबिक, माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर में बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. फल और सब्जियों की प्रमुख कैटेगरी में हल्की कम्पोस्टेबल और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग शुरू की गई है. इसका उद्देश्य वर्जिन प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड कुणाल गुप्ता ने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्लेटफॉर्म रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी से आगे बढ़कर कई अन्य कैटेगरी के उत्पादों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी देखने को मिल रहा है.
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया, कहा- BRICS का मकसद किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज और भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है.
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता शामिल हुए. BRICS चेयर के तौर पर उद्घाटन भाषण देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का असर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में इन देशों की भूमिका अभी भी सीमित है.
ग्लोबल साउथ को नियम बनाने में मिले बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसमें ताकत और निर्णय लेने की प्रक्रिया ऊपर के स्तर पर केंद्रित है. वहीं, नीचे के स्तर पर मौजूद देशों पर इन फैसलों का असर तो पड़ता है, लेकिन उन्हें फैसलों को आकार देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि अब इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक संस्थानों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’
मोदी ने BRICS को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ खड़ा होने वाला मंच नहीं है. इसका उद्देश्य सहयोग, संवाद और सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम करना होगा. उन्होंने सदस्य देशों से संगठन की एकता और आपसी सहमति को ठोस नतीजों में बदलने का आह्वान किया.
अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन को अपनी भूमिका और प्राथमिकताओं को और व्यापक बनाना होगा. मोदी के मुताबिक, BRICS देशों की सामूहिक ताकत का इस्तेमाल वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए किया जाना चाहिए.
मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर भी सहमति बनी. यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे सदस्य देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं.
इन मतभेदों के बावजूद भारत ने सदस्य देशों के बीच संवाद और आम सहमति बनाने पर जोर दिया. भारत की कोशिश BRICS की एकता बनाए रखने और अलग-अलग मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति का रास्ता तैयार करने की रही.
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था कि BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत करने के लिए भी प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक तीन चरणों में करेगा OMO बिक्री, RBI गवर्नर ने कहा- नकदी प्रबंधन के लिए सभी विकल्प खुले
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सितंबर में तीन चरणों में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के सरकारी बॉन्ड बेचने जा रहा है. केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत बॉन्ड बिक्री का यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी अधिशेष काफी बढ़ गया है.
RBI के इस कदम का मकसद सिस्टम में लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को बाहर निकालना है. इससे पहले अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए की गई लंबी अवधि की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी को बैंकों की ओर से सीमित प्रतिक्रिया मिली थी.
बैंकिंग सिस्टम में 10.43 लाख करोड़ रुपये का नकदी अधिशेष
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध अतिरिक्त नकदी 10.43 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, कोर लिक्विडिटी 13 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है.
केंद्रीय बैंक के मुताबिक, OMO बिक्री के जरिए लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को कम किया जाएगा, जबकि VRRR नीलामी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम अवधि की नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
RBI गवर्नर ने कहा- नकदी घटाने के कई विकल्प मौजूद
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास कई विकल्प मौजूद हैं. CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने OMO और स्वैप जैसे उपायों का जिक्र किया. उन्होंने संकेत दिया कि VRRR के जरिए नकदी कम करने से शायद ज्यादा मदद नहीं मिले.
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि बैंकों के नकदी आरक्षी अनुपात (CRR) में बदलाव की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि रियायती स्वैप विंडो के तहत जुटाई गई FCNR(B) जमा को CRR से छूट दी गई थी.
FCNR(B) जमा से बढ़ी सिस्टम में नकदी
बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी का एक बड़ा कारण बैंकों की ओर से जुटाई गई 127 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा है. इस अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से निकालने के लिए RBI अब OMO बिक्री का सहारा ले रहा है.
VRRR नीलामी में बैंकों की सीमित दिलचस्पी
शुक्रवार को हुई 26 दिन की VRRR नीलामी में बैंकों ने 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले सिर्फ 60,449 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. इसके मुकाबले चार दिन की VRRR नीलामी में 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के सामने 3.44 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं. मल्होत्रा के मुताबिक, RBI का मुख्य उद्देश्य मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य यानी वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को रेपो रेट के करीब बनाए रखना है.
WACR रेपो रेट से नीचे
ओवरनाइट WACR गुरुवार को 5.02 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि इससे पिछले सत्र में यह 4.98 प्रतिशत था. यह दर स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर के आसपास बनी हुई है. RBI गवर्नर के मुताबिक, सिस्टम में अतिरिक्त नकदी के कारण WACR पर दबाव बना हुआ है. अगर 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए WACR को 5.25 प्रतिशत की मौजूदा रेपो दर के करीब लाना अहम होगा.
बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
बाजार के कारोबारियों का मानना है कि RBI की ओर से बड़े पैमाने पर OMO के तहत बॉन्ड बेचने से सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है. बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने से उनकी कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका असर यील्ड में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे सकता है.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्नाटक सरकार अगले तीन वर्षों में करीब 100 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने 11 सितंबर को अपनी नई ‘Government First’ पहल की घोषणा की. इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर दिए जा सकेंगे, जिनके समाधान वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है, ताकि नई तकनीकों को वास्तविक सरकारी परिस्थितियों में परखा जा सके. सफल रहने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे सरकारी खरीद और बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिल सकेगा.
स्टार्टअप्स खुद भी दे सकेंगे समाधान
इस पहल की खास बात यह है कि स्टार्टअप्स को केवल सरकार की ओर से जारी चुनौतियों या समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. वे खुद भी अपने ऐसे समाधान सरकारी विभागों के सामने पेश कर सकेंगे, जो सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. यह ‘Startup-Initiated Route’ सरकारी विभागों की ओर से जारी किए जाने वाले औपचारिक चैलेंज के साथ समानांतर रूप से काम करेगा. इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए पहले से सरकारी विभागों के साथ काम करने का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा. इससे नए और छोटे स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार में प्रवेश आसान हो सकेगा.
पहल के तहत स्टार्टअप्स अपनी तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार यानी Intellectual Property Rights (IPR) भी अपने पास रख सकेंगे.
पायलट से सरकारी खरीद तक का रास्ता
इस योजना को केवल तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें ‘टेस्ट, वैलिडेट और प्रोक्योर’ मॉडल अपनाया जाएगा. तकनीकी मूल्यांकन और मंजूरी के बाद चुने गए समाधानों को सरकारी विभागों में पायलट के तौर पर लागू किया जाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तय मानकों के आधार पर उसके नतीजों का आकलन किया जाएगा. सफल समाधान आगे परिणामों के मूल्यांकन, खरीद की सिफारिश, वर्क ऑर्डर जारी करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया से गुजर सकेंगे. अगर किसी समाधान से एक सरकारी विभाग में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो उसे दूसरे विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकेगा.
AI, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर फोकस
इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का फोकस शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट पर नहीं, बल्कि ऐसे समाधानों पर होगा जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. पायलट शुरू होने से पहले प्रस्तावित तकनीकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा.
तीन स्तरीय व्यवस्था से होगी निगरानी
कार्यक्रम की निगरानी के लिए तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाई गई है. इसमें Selection Committee, Technical Committee और Review Committee शामिल होंगी. Selection Committee स्टार्टअप्स के चयन और पायलट की मंजूरी से जुड़े काम देखेगी. Technical Committee तकनीक के क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी, जबकि Review Committee वित्तीय निगरानी से जुड़े मामलों को देखेगी.
सरकारी बाजार में स्टार्टअप्स की पहुंच बढ़ाने की कोशिश
इस पहल के तहत सरकारी विभाग अपनी जरूरतों और समस्याओं की पहचान कर स्टार्टअप्स के लिए समस्या विवरण जारी कर सकेंगे. वहीं, स्टार्टअप्स बिना किसी औपचारिक चैलेंज के भी अपने तैयार समाधान सरकार के सामने रख सकेंगे. सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना, नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और सरकारी सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार करना है. साथ ही, सफल तकनीकी समाधानों को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता तैयार किया जाएगा.