यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
कर्नाटक सरकार अगले तीन वर्षों में करीब 100 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने 11 सितंबर को अपनी नई ‘Government First’ पहल की घोषणा की. इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर दिए जा सकेंगे, जिनके समाधान वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है, ताकि नई तकनीकों को वास्तविक सरकारी परिस्थितियों में परखा जा सके. सफल रहने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे सरकारी खरीद और बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिल सकेगा.
स्टार्टअप्स खुद भी दे सकेंगे समाधान
इस पहल की खास बात यह है कि स्टार्टअप्स को केवल सरकार की ओर से जारी चुनौतियों या समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. वे खुद भी अपने ऐसे समाधान सरकारी विभागों के सामने पेश कर सकेंगे, जो सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. यह ‘Startup-Initiated Route’ सरकारी विभागों की ओर से जारी किए जाने वाले औपचारिक चैलेंज के साथ समानांतर रूप से काम करेगा. इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए पहले से सरकारी विभागों के साथ काम करने का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा. इससे नए और छोटे स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार में प्रवेश आसान हो सकेगा.
पहल के तहत स्टार्टअप्स अपनी तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार यानी Intellectual Property Rights (IPR) भी अपने पास रख सकेंगे.
पायलट से सरकारी खरीद तक का रास्ता
इस योजना को केवल तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें ‘टेस्ट, वैलिडेट और प्रोक्योर’ मॉडल अपनाया जाएगा. तकनीकी मूल्यांकन और मंजूरी के बाद चुने गए समाधानों को सरकारी विभागों में पायलट के तौर पर लागू किया जाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तय मानकों के आधार पर उसके नतीजों का आकलन किया जाएगा. सफल समाधान आगे परिणामों के मूल्यांकन, खरीद की सिफारिश, वर्क ऑर्डर जारी करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया से गुजर सकेंगे. अगर किसी समाधान से एक सरकारी विभाग में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो उसे दूसरे विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकेगा.
AI, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर फोकस
इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का फोकस शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट पर नहीं, बल्कि ऐसे समाधानों पर होगा जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. पायलट शुरू होने से पहले प्रस्तावित तकनीकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा.
तीन स्तरीय व्यवस्था से होगी निगरानी
कार्यक्रम की निगरानी के लिए तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाई गई है. इसमें Selection Committee, Technical Committee और Review Committee शामिल होंगी. Selection Committee स्टार्टअप्स के चयन और पायलट की मंजूरी से जुड़े काम देखेगी. Technical Committee तकनीक के क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी, जबकि Review Committee वित्तीय निगरानी से जुड़े मामलों को देखेगी.
सरकारी बाजार में स्टार्टअप्स की पहुंच बढ़ाने की कोशिश
इस पहल के तहत सरकारी विभाग अपनी जरूरतों और समस्याओं की पहचान कर स्टार्टअप्स के लिए समस्या विवरण जारी कर सकेंगे. वहीं, स्टार्टअप्स बिना किसी औपचारिक चैलेंज के भी अपने तैयार समाधान सरकार के सामने रख सकेंगे. सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना, नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और सरकारी सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार करना है. साथ ही, सफल तकनीकी समाधानों को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता तैयार किया जाएगा.
रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी EaseMyTrip के को-फाउंडर और प्रमोटर निशांत पिट्टी ने कंपनी में करीब 212 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर निजी इस्तेमाल के लिए गिरवी रखे हैं. स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, पिट्टी ने 24 अगस्त को 34.51 करोड़ शेयर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के पक्ष में गिरवी रखे.
कुल हिस्सेदारी का 8.66 फीसदी शेयर गिरवी
रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है. यानी इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सूचीबद्ध कंपनी के हित में नहीं किया जाएगा. गिरवी रखे गए शेयरों का मूल्य और लेनदेन में शामिल राशि, दोनों 211.92 करोड़ रुपये बताई गई हैं. इस सौदे में सिक्योरिटी कवर 1:1 है.
11.26 फीसदी हिस्सेदारी अब गिरवी
नए शेयर गिरवी रखने के बाद निशांत पिट्टी के पास कंपनी के 44.87 करोड़ शेयर गिरवी हो गए हैं. ये EaseMyTrip की कुल शेयर पूंजी का 11.26 फीसदी हिस्सा है. पिट्टी के पास कंपनी में कुल 11.39 फीसदी हिस्सेदारी है. इस तरह उनकी लगभग पूरी हिस्सेदारी अब गिरवी हो चुके हैं.
कंपनी के लिए नहीं लिया गया कर्ज
कंपनी की ओर से किए गए रेगुलेटरी डिस्क्लोजर में स्पष्ट किया गया है कि शेयर गिरवी रखने का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल है. इस कर्ज का इस्तेमाल EaseMyTrip के लाभ या कंपनी की जरूरतों के लिए नहीं किया जाएगा.
शेयर गिरवी रखना प्रमोटरों के लिए फंड जुटाने का एक तरीका है, हालांकि इससे उनकी हिस्सेदारी पर भार बढ़ता है और निवेशकों के लिए कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में करीब 45 अरब डॉलर का जबरदस्त इजाफा हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह भी इसमें 11.47 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
एक सप्ताह में 44.90 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था. इस तरह लगातार दूसरे सप्ताह देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज बढ़ोतरी हुई है.
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बड़ी तेजी
विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) का होता है. समीक्षाधीन सप्ताह में FCA 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गया. मार्च 2026 के अंत के मुकाबले FCA में 95.886 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि एक साल पहले की तुलना में यह 63.692 अरब डॉलर ज्यादा है.
सोने के भंडार में आई गिरावट
इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में गिरावट दर्ज की गई. सप्ताह के दौरान सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया. मार्च 2026 के अंत की तुलना में गोल्ड रिजर्व 1.580 अरब डॉलर कम है. हालांकि, सालाना आधार पर तस्वीर अलग है. एक साल पहले की तुलना में भारत का गोल्ड रिजर्व 23.517 अरब डॉलर बढ़ा है.
IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी मजबूत
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) में मामूली गिरावट आई है. समीक्षाधीन सप्ताह में SDRs 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गए. हालांकि, मार्च 2026 के अंत के मुकाबले इनमें 184 मिलियन डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 64 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई. यह मार्च के अंत से 108 मिलियन डॉलर और एक साल पहले के मुकाबले 168 मिलियन डॉलर अधिक है.
मार्च के मुकाबले करीब 95 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
कुल मिलाकर, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मार्च 2026 के अंत से 94.599 अरब डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 87.438 अरब डॉलर बढ़ चुका है. ताजा आंकड़ों के साथ देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 785 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है.
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीएम मोदी ने व्यापार की शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने का सुझाव मांगा, 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों से जोड़ने और 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जब दुनिया में व्यापारिक रुकावटें बढ़ रही हैं, तब भारत आर्थिक पुल बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल से व्यापार में आने वाली शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने के सुझाव देने को कहा.
नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, स्टार्टअप, एमएसएमई और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 2014 से भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है.
ब्रिक्स देशों के बीच स्टार्टअप और कंपनियों की साझेदारी पर जोर
पीएम मोदी ने हर साल कम से कम 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में मदद करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों की करीब 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी के अवसर तलाशने की बात कही.
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को मजबूत बनाए रखने के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सीफेरर्स यानी नाविकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है. भारत ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ का मजबूती से समर्थन करता है.
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए निवेश मंच का सुझाव
ब्रिक्स देशों के नेताओं ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निजी निवेश जुटाने के उद्देश्य से एक नया निवेश मंच बनाने का सुझाव भी दिया. ब्रिक्स देश विकास के लिए वित्त जुटाने, बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने और स्थानीय वित्तीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं. इसका एक प्रमुख उद्देश्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली पारंपरिक वित्तीय संस्थाओं पर निर्भरता कम करना है.
पुतिन बोले- ब्रिक्स की आर्थिक ताकत बढ़ रही
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा कि जी-7 देशों की आर्थिक और औद्योगिक ताकत कम हो रही है और इसकी जगह ब्रिक्स देशों की भूमिका बढ़ रही है. उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान बताया.
पुतिन ने निजी क्षेत्र से परियोजनाओं के लिए निवेश जुटाने वाले नए मंच के प्रस्ताव का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के पक्ष में हैं.”
रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों की कई सफल कंपनियों का उदाहरण भी दिया. इनमें भारत की महिंद्रा, चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, यूएई की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम शामिल हैं. उन्होंने आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में महिंद्रा के काम का भी उल्लेख किया.
व्यापार मार्गों और प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठा
पुतिन ने पाइपलाइन में रुकावट, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों को रोकने की कोशिश, समुद्री जहाजों को जब्त करने और प्रतिबंधों के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने प्रतिबंधों और एकतरफा फैसलों से पैदा हुई चुनौतियों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि ब्रिक्स के पास क्षमता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के आर्थिक हितों के लिए इस क्षमता का इस्तेमाल करने की महत्वाकांक्षा और साधन रखता है.
ईरान ने व्यापार और सप्लाई चेन मजबूत करने पर दिया जोर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने देश पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का जिक्र किया. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, सीमा पार बाजारों को आपस में जोड़ने और ऊर्जा, खाद्य तथा परिवहन की सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत बताई.
दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्रिक्स देशों के नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली पहुंचे, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान दोपहर में पहुंचे. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.
शुक्रवार शाम ब्रिक्स बिजनेस फोरम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन, पेजेश्कियान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. शनिवार को उनकी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ भी बैठक प्रस्तावित है.
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फार्मा कंपनी ग्रैन्यूल्स इंडिया (Granules India) के प्रमोटर डॉ. कृष्ण प्रसाद चिगुरुपति ने 11 सितंबर 2026 को कंपनी के 1.72 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की है. यह बिक्री ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक डील के जरिए की गई. करीब 1,160 करोड़ रुपये की इस डील के बाद कंपनी में चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी रह गई है.
872.50 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हुई बिक्री
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर बिक्री का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के जारी प्रेफरेंशियल इश्यू की दूसरी किस्त के लिए फंड जुटाना है.
विस्तार योजनाओं के लिए जुटाया जा रहा फंड
ग्रैन्यूल्स इंडिया अपनी विस्तार योजनाओं और कारोबार के अगले चरण की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है. चिगुरुपति द्वारा अपनी मौजूदा हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री को इसी फंडिंग प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है. इस बिक्री से प्रमोटर ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा मोनेटाइज किया है, ताकि कंपनी की पूंजी जुटाने की जरूरतों में योगदान दिया जा सके.
प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी घटी
शेयर बिक्री के बाद चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी हो गई. वहीं, ग्रैन्यूल्स इंडिया में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी भी 38.02 फीसदी से घटकर 31.08 फीसदी रह गई है.
1.33 करोड़ शेयरों की ब्लॉक डील
चिगुरुपति द्वारा बेचे गए 1.72 करोड़ शेयरों में से करीब 1.33 करोड़ शेयर शुरुआती ब्लॉक डील में हाथ बदले. बाकी शेयरों की बिक्री भी ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक ट्रांजैक्शन के जरिए की गई.
कंपनी से पूरी तरह बाहर नहीं हुए प्रमोटर
इस हिस्सेदारी बिक्री के बावजूद चिगुरुपति ग्रैन्यूल्स इंडिया से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं. उनके पास अभी भी कंपनी की 24.06 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में यह सौदा प्रमोटर के एग्जिट के बजाय कंपनी की विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.
गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार देश में टोलिंग व्यवस्था को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के विस्तार से न सिर्फ वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने से राहत मिलेगी, बल्कि राजमार्गों से होने वाले टोल संग्रह में भी करीब 10,000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
फरवरी-मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री टोलिंग का लक्ष्य
गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2026 तक देश के 60-70 फीसदी टोल प्लाजा पर MLFF व्यवस्था लागू किए जाने की उम्मीद है.
82,589 करोड़ रुपये पहुंचा टोल संग्रह
देश में डिजिटल टोल संग्रह का दायरा तेजी से बढ़ा है. 2,000 से अधिक टोल प्लाजा पर डिजिटल माध्यम से होने वाला टोल संग्रह वित्त वर्ष 2017 में 660.67 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 64,603.12 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 82,589.9 करोड़ रुपये हो गया.
टोल संचालन की लागत में भी आएगी कमी
गडकरी के मुताबिक, MLFF लागू होने से टोल प्लाजा के संचालन और रखरखाव की लागत मौजूदा 12-15 फीसदी से घटकर सिर्फ 2-3 फीसदी रह सकती है. इससे सरकार को करीब 6,000-7,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.
10 सेकंड या उससे कम होगा इंतजार
गडकरी ने कहा कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को 12 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था. तकनीक के इस्तेमाल से इसमें 80-90 फीसदी तक सुधार हुआ है और अब सरकार इसे घटाकर 10 सेकंड या उससे भी कम करने की कोशिश कर रही है. इससे वाहन चालकों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.
हर साल 71 करोड़ घंटे और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचने का अनुमान
मंत्री के अनुसार, टोलिंग तकनीक को तेजी से अपनाने से हर साल करीब 71 करोड़ घंटे का समय और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचाया जा सकता है. ईंधन की बचत का अनुमानित मूल्य करीब 5,250 करोड़ रुपये है, जबकि बचाए गए समय की आर्थिक कीमत करीब 68,500 करोड़ रुपये आंकी गई है.
सरकार को हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये का फायदा
गडकरी ने कहा कि NETC FASTag और मौजूदा टोलिंग व्यवस्था को देखें तो केंद्र सरकार को अकेले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है. उन्होंने इसे तकनीकी नवाचार का परिणाम बताया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की. यह मुलाकात BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले हुई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति देने पर जोर दिया गया. भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए रेलवे, स्टील, परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद और कुशल भारतीय कामगारों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी है.
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की. यह मुलाकात BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले हुई. बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के साथ नए व्यापारिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई.
2030 तक 100 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य
भारत और रूस के बीच मौजूदा सालाना द्विपक्षीय कारोबार करीब 60 अरब डॉलर है. इसमें रूस से भारत को होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है. अब दोनों देश अगले चार वर्षों में कारोबार को करीब 40 अरब डॉलर बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर के स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों को व्यापार में लगातार दोहरे अंकों की सालाना वृद्धि की जरूरत होगी. इसके लिए नए कारोबारी क्षेत्रों की पहचान, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और रूस में भारतीय उत्पादों की मौजूदगी बढ़ाने पर फोकस किया जा सकता है.
रेलवे और स्टील सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग
भारत-रूस आर्थिक साझेदारी में औद्योगिक सहयोग को भी अहम माना जा रहा है. नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच नए कारोबारी रिश्ते विकसित करने के मंच के तौर पर देखा जा रहा है.
रेलवे, टनल निर्माण और स्टील की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर जोर है. साथ ही दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे बिजनेस अवसर बढ़ाने और रूस के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है.
परमाणु ऊर्जा में साझेदारी होगी मजबूत
भारत और रूस के बीच सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भी तैयारी है. इसमें परमाणु ईंधन की आपूर्ति के साथ न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए लंबे समय तक तकनीकी और अन्य जरूरी सहयोग शामिल हो सकता है.
रूस में बढ़ सकते हैं भारतीय स्किल्ड वर्कर्स
बैठक में कुशल भारतीय कामगारों के रूस जाने का मुद्दा भी सामने आया. दोनों देश ऐसा सिस्टम विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे ज्यादा भारतीय स्किल्ड वर्कर्स को रूस में रोजगार के अवसर मिल सकें. इससे एक ओर रूस की कुशल श्रम की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है, वहीं भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं.
क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ेगा फोकस
क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और रूस इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इसका मकसद रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत करना हो सकता है.
खाद की सप्लाई भी एजेंडे में
भारत और रूस के आर्थिक संबंधों में फर्टिलाइजर यानी खाद की सप्लाई भी महत्वपूर्ण है. दोनों देशों के बीच खाद की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है. इसके लिए रणनीतिक ज्वाइंट वेंचर और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर काम की संभावनाएं हैं.
डिजिटल करेंसी और नए क्षेत्रों में सहयोग
भारत-रूस के आर्थिक रिश्ते अब पारंपरिक रक्षा और ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देश व्यापार, उद्योग, डिजिटल भुगतान, सप्लाई चेन, परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं. अगर 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में दोनों देश सफल रहते हैं, तो इससे भारत-रूस आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम मिल सकता है.
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार अधिक मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए बाजारों को अधिक खोलने, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाने के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए.
बाजार खोलने और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार अधिक मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन ऐसी होनी चाहिए जो दोनों दिशाओं में काम करे और व्यापार के विस्तार में बाधा न बने.
गोयल ने BRICS देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजारों को अधिक खुला बनाने की अपील की. इसमें कच्चे माल और जरूरी खनिज यानी क्रिटिकल मिनरल्स भी शामिल हैं. उन्होंने व्यापार नियमों को सरल बनाने और कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत बताई.
टैरिफ से बड़ी चुनौती गैर-टैरिफ बाधाएं
गोयल ने कहा कि व्यापार में सिर्फ आयात शुल्क यानी टैरिफ ही चुनौती नहीं है. जटिल नियम, मंजूरियां और दूसरी प्रक्रियाएं भी कारोबार की लागत बढ़ाती हैं. उन्होंने BRICS देशों के बीच ऐसी गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की जरूरत बताई, ताकि कंपनियों के लिए दूसरे देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करना आसान हो सके.
भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है. गोयल के मुताबिक, BRICS देश दुनिया के करीब एक चौथाई व्यापार का हिस्सा हैं. ये देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं.
UPI और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव
गोयल ने सीमा पार कारोबार में डिजिटल पेमेंट और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी कही. उन्होंने भारत के UPI को इसका उदाहरण बताते हुए BRICS सदस्य और पार्टनर देशों से अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की अपील की.
उन्होंने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहिए. इससे सीमा पार भुगतान की प्रक्रिया आसान हो सकती है और पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
गोयल के मुताबिक, भारत में UPI पर हर साल 250 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन होते हैं. उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुनिया के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.
प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान करने की जरूरत
गोयल ने BRICS देशों के बीच प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में प्रोफेशनल डिग्री और योग्यताओं को मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सर्विस सेक्टर में व्यापार को भी वास्तविक रूप से खोलने की जरूरत है. इससे एक देश के प्रोफेशनल्स को दूसरे BRICS देशों में काम करने और सेवाएं देने के अधिक अवसर मिल सकते हैं.
ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में सहयोग की संभावनाएं
गोयल ने कहा कि भारत के पास BRICS देशों में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं. इसके अलावा कृषि, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और सर्विस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने इन क्षेत्रों में नई तकनीक और इनोवेशन के लिए साझेदारी बढ़ाने की जरूरत बताई. गोयल ने BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ने का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि एग्री-टेक कंपनियां मिलकर किसानों के लिए नई तकनीक और समाधान विकसित कर सकती हैं. खाद्य सुरक्षा को भी BRICS देशों के बीच सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है.
SBI सीधे 1.60 करोड़ से ज्यादा शेयर बेचेगा, जबकि SBI Capital Markets 87.81 लाख शेयरों की करेगी पेशकश
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के प्रस्तावित आईपीओ से पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी NSE शेयर बिक्री की संरचना में बदलाव किया है. अब SBI अपनी प्रस्तावित हिस्सेदारी का एक हिस्सा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी SBI Capital Markets के जरिए बेचेगा. हालांकि, SBI समूह की ओर से बिक्री के लिए पेश किए जाने वाले NSE शेयरों की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
संशोधित संरचना के तहत SBI 1,59,69,410 NSE शेयरों की बिक्री करेगा, जबकि SBI Capital Markets 87,80,590 शेयर पेश करेगी. दोनों कंपनियां मिलकर कुल 2.475 करोड़ NSE शेयर बेचेंगी. यह संख्या 17 जून को जारी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में SBI द्वारा प्रस्तावित शेयरों की संख्या के बराबर है.
DRHP में बदलाव के बाद RHP में शामिल हुआ संशोधन
इस बदलाव की जानकारी 10 अगस्त को जारी DRHP के एडेंडम के जरिए दी गई थी. इसके बाद इसे NSE के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में भी शामिल कर लिया गया है. यानी इस बदलाव से SBI समूह की ओर से बेचे जाने वाले कुल शेयरों की संख्या नहीं बदली है, बल्कि शेयर बेचने वाली इकाइयों की संरचना बदली है.
ऑफर दस्तावेजों के अनुसार, SBI के पास NSE के 7.985 करोड़ शेयर थे, जबकि SBI Capital Markets के पास 10.725 करोड़ शेयर थे. बिक्री के लिए रखे गए शेयरों की भारित औसत खरीद लागत SBI के लिए 0.80 रुपये प्रति शेयर और SBI Capital Markets के लिए 0.38 रुपये प्रति शेयर है.
SBI Capital Markets NSE IPO की लीड मैनेजर भी
SBI Capital Markets NSE IPO के बुक-रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) में भी शामिल है. कंपनी के शेयरधारक के तौर पर आईपीओ में शामिल होने का असर उसकी भूमिका पर भी पड़ा है. RHP के अनुसार, सेबी मर्चेंट बैंकर विनियमों के रेगुलेशन 21A के तहत लागू प्रावधानों के कारण IPO में SBI Capital Markets की भूमिका मार्केटिंग तक सीमित रहेगी. DRHP में भी SBI Capital Markets को BRLM के तौर पर शामिल किया गया था और संबंधित नियमों के तहत उसकी भूमिका मार्केटिंग तक सीमित रहने की जानकारी दी गई थी.
NSE IPO का आकार भी हुआ कम
NSE के आईपीओ में कुल शेयरों की संख्या भी DRHP के मुकाबले घटाई गई है. DRHP में 14.891 करोड़ शेयरों की पेशकश प्रस्तावित थी, जिसे RHP में घटाकर 12.644 करोड़ शेयर कर दिया गया है. कई मौजूदा शेयरधारकों ने बिक्री के लिए प्रस्तावित शेयरों की संख्या कम की है. वहीं, SBI Capital Markets को एक नए बिक्री करने वाले शेयरधारक के रूप में शामिल किया गया है.
SBI की सीधे तौर पर पेशकश कम होने के बावजूद SBI Capital Markets की ओर से पेश किए जा रहे 87.81 लाख शेयरों से SBI समूह के लिए कुल 2.475 करोड़ शेयरों की पेशकश बरकरार रहती है.
NSE को नहीं मिलेगा IPO से पैसा
NSE का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है. इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली राशि NSE को नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी. संशोधित शेयरधारक संरचना अब NSE के अंतिम ऑफर दस्तावेजों का हिस्सा है. एक्सचेंज प्रस्तावित लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
जुलाई में स्पाइसजेट की घरेलू बाजार हिस्सेदारी घटकर 1.6% हुई, परिचालन बेड़े पर दबाव जारी
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) स्पाइसजेट के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहे हैं. नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने गुरुवार को कहा कि बजट एयरलाइन के बेड़े और घरेलू बाजार हिस्सेदारी पर लगातार दबाव बना हुआ है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में स्पाइसजेट की घरेलू बाजार हिस्सेदारी घटकर 1.6 प्रतिशत रह गई, जो जून में 1.9 प्रतिशत थी. परिचालन के लिए उपलब्ध विमानों की संख्या में कमी के बीच साल की शुरुआत से एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है.
वेतन भुगतान में देरी की भी रिपोर्ट
स्पाइसजेट वित्तीय चुनौतियों का भी सामना कर रही है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एयरलाइन के कुछ कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी हुई है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ कर्मचारियों को मई से वेतन नहीं मिला है.
विमान ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, स्पाइसजेट के पास फिलहाल 11 परिचालन विमान हैं. साल की शुरुआत से एयरलाइन की घरेलू बाजार हिस्सेदारी में काफी गिरावट आई है. इस दौरान उसे इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है.
सर्दियों के मौसम से पहले बेड़ा बढ़ाने की योजना
स्पाइसजेट ने आगामी सर्दियों के यात्रा मौसम से पहले अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं. 3 सितंबर को एयरलाइन ने तीन विमान ऑपरेटरों के साथ 20 विमानों के लिए लीज समझौतों को अंतिम रूप दिया.
इस योजना के तहत 15 बोइंग और 5 एयरबस विमानों को वेट लीज व्यवस्था के तहत बेड़े में शामिल किया जाएगा. इन विमानों के अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य के बीच चरणबद्ध तरीके से बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है.
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में बढ़ सकती है क्षमता
अतिरिक्त विमानों के शामिल होने से सर्दियों के यात्रा मौसम और उसके बाद गर्मियों के व्यस्त सीजन के दौरान स्पाइसजेट के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. यह बेड़ा विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब एयरलाइन अपने परिचालन बेड़े और यात्री यातायात में लंबे समय से जारी गिरावट के बाद परिचालन क्षमता को दोबारा मजबूत करने और बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश कर रही है.
सरकार की निगरानी बढ़ने का संकेत
स्पाइसजेट की वित्तीय स्थिति और परिचालन पर सरकार की लगातार निगरानी से एयरलाइन पर नियामकीय नजर बढ़ने का संकेत मिलता है. एयरलाइन फिलहाल अपने परिचालन को स्थिर करने और उड़ान क्षमता बहाल करने की कोशिश कर रही है.
गणेश राजू के जन्मदिन पर उच्च शिक्षा में तकनीक के जरिए बदलाव लाने और संस्थानों को अधिक सक्षम बनाने की उनकी पहल चर्चा में
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में उच्च शिक्षा संस्थान तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में चर्चा अब केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है. विश्वविद्यालय तेजी से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रौद्योगिकी उन्हें छात्रों को बेहतर ढंग से समझने, संस्थागत दक्षता बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में किस तरह मदद कर सकती है. Ken42 के संस्थापक गणेश राजू इसी बदलाव के केंद्र में काम कर रहे हैं.
उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने की कोशिश
Ken42 के जरिए राजू का काम विशेष रूप से उच्च शिक्षा पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को अलग-अलग प्रणालियों और संस्थागत प्रक्रियाओं को एक साथ लाने में मदद करना है. 2019 में स्थापित Ken42 खुद को आधुनिक विश्वविद्यालयों के लिए एआई आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में पेश करता है, जो प्रवेश, अकादमिक गतिविधियों, प्रशासन और छात्र सहभागिता जैसे क्षेत्रों को एक ही मंच से जोड़ता है.
इस मंच के पीछे व्यापक विचार यह है कि विश्वविद्यालयों को हर काम के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. प्रवेश, अकादमिक गतिविधियां, परीक्षाएं, छात्र सेवाएं, प्लेसमेंट और पूर्व छात्रों से जुड़ी गतिविधियां अक्सर अलग-अलग संचालित की जाती हैं. इससे संस्थानों के लिए किसी छात्र की पूरी यात्रा की तस्वीर तैयार करना मुश्किल हो जाता है.
संस्थानों में डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
राजू ने विश्वविद्यालयों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में इस बिखराव को भी गिनाया है. उनके अनुसार, जब अलग-अलग संस्थागत प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ा जाता है और उनसे तैयार होने वाले डेटा का सार्थक इस्तेमाल किया जाता है, तब प्रौद्योगिकी कहीं बड़ी भूमिका निभा सकती है.
उनका दृष्टिकोण विश्वविद्यालयों को केवल जानकारी दर्ज करने से आगे ले जाकर यह समझने पर केंद्रित है कि संस्थान में क्या हो रहा है और परिणामों को प्रभावित करने का समय रहते उस पर प्रतिक्रिया कैसे दी जा सकती है.
एआई के जरिए छात्रों को व्यक्तिगत सहायता
इसी दृष्टिकोण ने Ken42 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में भी आगे बढ़ाया है. कंपनी ने KAI विकसित किया है, जो छात्रों और कैंपस से जुड़े अन्य लोगों को संदर्भ के अनुसार सहायता देने के लिए तैयार किया गया एआई सहायक है.
इस मंच का उद्देश्य संस्थानों के साथ बातचीत को अधिक तत्काल और व्यक्तिगत बनाना है, साथ ही संस्थागत प्रणालियों में पहले से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करना है.
शिक्षा में बदल रही है प्रौद्योगिकी की भूमिका
Ken42 का काम शिक्षा में प्रौद्योगिकी की भूमिका में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाता है. प्रौद्योगिकी को केवल प्रशासनिक सुविधा के रूप में देखने के बजाय राजू का दृष्टिकोण इसे संस्थागत निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र के करीब लाता है.
इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को डेटा, स्वचालन और एआई के इस्तेमाल के जरिए आवेदकों, छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करना है.
सॉफ्टवेयर से आगे शिक्षा क्षेत्र में पहल
शिक्षा क्षेत्र में राजू का योगदान सॉफ्टवेयर तक ही सीमित नहीं है. अगस्त 2026 में Ken42 ने उदयपुर में 42 Degrees के पहले संस्करण की मेजबानी की. यह उच्च शिक्षा नेतृत्व शिखर सम्मेलन था, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के नेताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने विश्वविद्यालयों के भविष्य पर चर्चा की.
राजू ने इस पहल को संस्थान निर्माण और उच्च शिक्षा की बदलती जरूरतों पर गहन बातचीत के लिए मंच तैयार करने की कोशिश के रूप में बताया.
प्रौद्योगिकी साधन है, अंतिम लक्ष्य नहीं
यह पहल राजू की शिक्षा क्षेत्र की यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाती है: उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी अपने आप में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है. इसका इस्तेमाल संस्थानों को अधिक जवाबदेह, आपस में जुड़ा हुआ और छात्रों की बेहतर सेवा करने में सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए.
विश्वविद्यालयों में संस्थागत समझ बढ़ाने पर फोकस
भारतीय उच्च शिक्षा प्रौद्योगिकी आधारित बदलाव के लिए तैयार हो रही है. ऐसे में ध्यान तेजी से उन बुद्धिमान प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है, जो संस्थागत डेटा को वास्तविक दुनिया के निर्णयों से जोड़ सकें. Ken42 के जरिए गणेश राजू विश्वविद्यालय के पूरे तंत्र के केंद्र में प्रौद्योगिकी, एआई और संस्थागत समझ को रखकर इस बदलाव में योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं.
शिक्षा के भविष्य में तकनीक की बढ़ती भूमिका
उनके जन्मदिन पर उनकी यह यात्रा याद दिलाती है कि शिक्षा का भविष्य केवल कक्षाओं के भीतर ही तय नहीं होगा, बल्कि उन प्रणालियों से भी आकार लेगा जो संस्थानों को अपने छात्रों को समझने, उनका सहयोग करने और उन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करती हैं.