गणेश राजू के जन्मदिन पर उच्च शिक्षा में तकनीक के जरिए बदलाव लाने और संस्थानों को अधिक सक्षम बनाने की उनकी पहल चर्चा में
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत में उच्च शिक्षा संस्थान तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में चर्चा अब केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है. विश्वविद्यालय तेजी से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रौद्योगिकी उन्हें छात्रों को बेहतर ढंग से समझने, संस्थागत दक्षता बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में किस तरह मदद कर सकती है. Ken42 के संस्थापक गणेश राजू इसी बदलाव के केंद्र में काम कर रहे हैं.
उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने की कोशिश
Ken42 के जरिए राजू का काम विशेष रूप से उच्च शिक्षा पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को अलग-अलग प्रणालियों और संस्थागत प्रक्रियाओं को एक साथ लाने में मदद करना है. 2019 में स्थापित Ken42 खुद को आधुनिक विश्वविद्यालयों के लिए एआई आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में पेश करता है, जो प्रवेश, अकादमिक गतिविधियों, प्रशासन और छात्र सहभागिता जैसे क्षेत्रों को एक ही मंच से जोड़ता है.
इस मंच के पीछे व्यापक विचार यह है कि विश्वविद्यालयों को हर काम के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. प्रवेश, अकादमिक गतिविधियां, परीक्षाएं, छात्र सेवाएं, प्लेसमेंट और पूर्व छात्रों से जुड़ी गतिविधियां अक्सर अलग-अलग संचालित की जाती हैं. इससे संस्थानों के लिए किसी छात्र की पूरी यात्रा की तस्वीर तैयार करना मुश्किल हो जाता है.
संस्थानों में डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
राजू ने विश्वविद्यालयों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में इस बिखराव को भी गिनाया है. उनके अनुसार, जब अलग-अलग संस्थागत प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ा जाता है और उनसे तैयार होने वाले डेटा का सार्थक इस्तेमाल किया जाता है, तब प्रौद्योगिकी कहीं बड़ी भूमिका निभा सकती है.
उनका दृष्टिकोण विश्वविद्यालयों को केवल जानकारी दर्ज करने से आगे ले जाकर यह समझने पर केंद्रित है कि संस्थान में क्या हो रहा है और परिणामों को प्रभावित करने का समय रहते उस पर प्रतिक्रिया कैसे दी जा सकती है.
एआई के जरिए छात्रों को व्यक्तिगत सहायता
इसी दृष्टिकोण ने Ken42 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में भी आगे बढ़ाया है. कंपनी ने KAI विकसित किया है, जो छात्रों और कैंपस से जुड़े अन्य लोगों को संदर्भ के अनुसार सहायता देने के लिए तैयार किया गया एआई सहायक है.
इस मंच का उद्देश्य संस्थानों के साथ बातचीत को अधिक तत्काल और व्यक्तिगत बनाना है, साथ ही संस्थागत प्रणालियों में पहले से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करना है.
शिक्षा में बदल रही है प्रौद्योगिकी की भूमिका
Ken42 का काम शिक्षा में प्रौद्योगिकी की भूमिका में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाता है. प्रौद्योगिकी को केवल प्रशासनिक सुविधा के रूप में देखने के बजाय राजू का दृष्टिकोण इसे संस्थागत निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र के करीब लाता है.
इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को डेटा, स्वचालन और एआई के इस्तेमाल के जरिए आवेदकों, छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करना है.
सॉफ्टवेयर से आगे शिक्षा क्षेत्र में पहल
शिक्षा क्षेत्र में राजू का योगदान सॉफ्टवेयर तक ही सीमित नहीं है. अगस्त 2026 में Ken42 ने उदयपुर में 42 Degrees के पहले संस्करण की मेजबानी की. यह उच्च शिक्षा नेतृत्व शिखर सम्मेलन था, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के नेताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने विश्वविद्यालयों के भविष्य पर चर्चा की.
राजू ने इस पहल को संस्थान निर्माण और उच्च शिक्षा की बदलती जरूरतों पर गहन बातचीत के लिए मंच तैयार करने की कोशिश के रूप में बताया.
प्रौद्योगिकी साधन है, अंतिम लक्ष्य नहीं
यह पहल राजू की शिक्षा क्षेत्र की यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाती है: उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी अपने आप में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है. इसका इस्तेमाल संस्थानों को अधिक जवाबदेह, आपस में जुड़ा हुआ और छात्रों की बेहतर सेवा करने में सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए.
विश्वविद्यालयों में संस्थागत समझ बढ़ाने पर फोकस
भारतीय उच्च शिक्षा प्रौद्योगिकी आधारित बदलाव के लिए तैयार हो रही है. ऐसे में ध्यान तेजी से उन बुद्धिमान प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है, जो संस्थागत डेटा को वास्तविक दुनिया के निर्णयों से जोड़ सकें. Ken42 के जरिए गणेश राजू विश्वविद्यालय के पूरे तंत्र के केंद्र में प्रौद्योगिकी, एआई और संस्थागत समझ को रखकर इस बदलाव में योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं.
शिक्षा के भविष्य में तकनीक की बढ़ती भूमिका
उनके जन्मदिन पर उनकी यह यात्रा याद दिलाती है कि शिक्षा का भविष्य केवल कक्षाओं के भीतर ही तय नहीं होगा, बल्कि उन प्रणालियों से भी आकार लेगा जो संस्थानों को अपने छात्रों को समझने, उनका सहयोग करने और उन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करती हैं.
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में 33 कंपनियों की 66 वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़े साझा क्षेत्र
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के ‘विक्सित भारत 2047’ के लक्ष्य के साथ कॉरपोरेट जगत का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है. डिफेंस, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर इस दिशा में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं. कंपनियां अब निवेश, तकनीक, क्षमता विस्तार और कारोबार बढ़ाने की रणनीतियों में देश के विकास से जुड़े लक्ष्यों को शामिल कर रही हैं. यह जानकारी एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की एक रिपोर्ट में सामने आई है.
‘Building Viksit Bharat Together: Understanding Corporate India’s Strategic Role In Such Journey’ नाम से जारी रिपोर्ट में 33 कंपनियों की 66 वार्षिक रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया है. इसके लिए प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) आधारित आकलन का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग सेक्टरों में प्राथमिकताएं भले ही अलग हैं, लेकिन शासन व्यवस्था और डिजिटल बदलाव ऐसे विषय हैं, जो कई क्षेत्रों में समान रूप से नजर आते हैं.
डिफेंस, ऑटो और बैंकिंग सबसे आगे
एसबीआई रिसर्च के ‘विक्सित भारत डिस्क्लोजर इंडेक्स’ में एयरोस्पेस और डिफेंस, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर सबसे आगे रहे हैं. इन क्षेत्रों की कंपनियों ने अपनी कारोबारी रणनीतियों को ‘विक्सित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ने पर अपेक्षाकृत अधिक जोर दिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का फोकस मुख्य रूप से डिजिटल बदलाव पर है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और पावर सेक्टर में स्थिरता पर जोर दिखाई देता है. बैंकिंग में बेहतर शासन व्यवस्था के साथ डिजिटल बदलाव और मानव पूंजी भी महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं.
सरकार की सात विकास प्राथमिकताओं के साथ कॉरपोरेट रणनीतियों के मेल को देखें तो तकनीक और नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग, कनेक्टिविटी एवं इंफ्रास्ट्रक्चर तथा हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत साझा क्षेत्र हैं. वहीं डिफेंस, कृषि एवं खाद्य उत्पादन और सॉफ्ट पावर का महत्व कुछ खास सेक्टरों तक अधिक सीमित है.
डिफेंस बना रणनीतिक विकास का अहम क्षेत्र
रिपोर्ट में डिफेंस सेक्टर को रणनीतिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है. देश में स्वदेशी डिजाइन, घरेलू उत्पादन और रक्षा निर्यात पर बढ़ते जोर के बीच इस क्षेत्र में कंपनियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं. एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया.
कई रणनीतिक क्षेत्रों में परियोजनाओं का विस्तार भी देखने को मिला है. पावर प्रोजेक्ट्स की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,074 हो गई, जो पहले 1,926 थी. वहीं डिफेंस प्रोजेक्ट्स की संख्या वित्त वर्ष 2020 में चार से बढ़कर 45 हो गई. ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट्स भी 17 से बढ़कर 69 हो गए.
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों की रणनीति अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और जमीन पर नई परियोजनाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर का भविष्य पर ज्यादा फोकस
एसबीआई रिसर्च ने कंपनियों की भविष्य से जुड़ी घोषणाओं का भी आकलन किया. इसमें निवेश, विस्तार, तकनीकी उन्नयन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और रणनीतिक बदलाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया. बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस एवं डिफेंस सेक्टर में भविष्य को लेकर सबसे अधिक स्पष्टता दिखाई दी. इसके बाद मेटल्स और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का स्थान रहा.
रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों की कंपनियां भविष्य के निवेश और कारोबारी रणनीतियों को तकनीक अपनाने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और देश की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ रही हैं.
पावर और इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में अभी और गुंजाइश
एसबीआई रिसर्च ने कहा कि ‘विक्सित भारत’ के एजेंडे के साथ कंपनियों का जुड़ाव केवल व्यापक विषयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसे कारोबारी रणनीति, पूंजीगत खर्च, तकनीक अपनाने, सप्लाई चेन, कर्मचारियों के कौशल विकास और मापने योग्य स्थिरता लक्ष्यों में शामिल किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट में पावर और इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत तालमेल की जरूरत बताई गई है. इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण, बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट उपकरण, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कर्मचारियों के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. वहीं बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र वित्तीय सहायता, डिजिटल समाधान, स्वच्छ तकनीक, नवाचार और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
कंपनियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय करने की सिफारिश
एसबीआई रिसर्च ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं में अपने योगदान को स्पष्ट करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य, परिणाम आधारित संकेतक और पारदर्शी रिपोर्टिंग व्यवस्था अपनाएं.
‘विक्सित भारत 2047’ का लक्ष्य भारत को 2047 तक एक विकसित, समावेशी, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाना है. इसके लिए तकनीकी प्रगति, उत्पादन क्षमता, स्थिरता, मानव पूंजी और मजबूत संस्थागत व्यवस्था को अहम आधार माना गया है.
एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण से पता चलता है कि इन लक्ष्यों के कई हिस्से अब कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट और कारोबारी रणनीतियों में दिखाई देने लगे हैं. हालांकि, अलग-अलग सेक्टरों में ‘विक्सित भारत’ के साथ जुड़ाव का स्तर और उसका तरीका काफी अलग है.
7.8% की GDP ग्रोथ ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. हालांकि, आगे की वृद्धि के लिए वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग पर नजर बनी रहेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.8% की रियल GDP ग्रोथ दर्ज की है. यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान से बेहतर रहा. IMF ने मजबूत ग्रोथ के पीछे सर्विस सेक्टर और निर्यात में तेजी को अहम वजह बताया है. साथ ही, महंगे कच्चे तेल के झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया है.
7.8% की ग्रोथ ने चौंकाया
दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बीच भारत की 7.8% GDP ग्रोथ को मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है. IMF की प्रवक्ता जूली कोजैक के मुताबिक, दूसरी तिमाही का यह आंकड़ा IMF के स्टाफ के अनुमान से काफी बेहतर रहा. IMF के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की इस रफ्तार में सर्विस सेक्टर की मजबूत गतिविधियों और निर्यात में बढ़ोतरी की अहम भूमिका रही. मजबूत घरेलू मांग ने भी आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया.
सर्विस सेक्टर और निर्यात बने ग्रोथ के प्रमुख आधार
भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है. दूसरी तिमाही में इसी क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों ने समग्र आर्थिक वृद्धि को गति देने में मदद की. इसके अलावा निर्यात में मजबूती भी ग्रोथ के लिए सकारात्मक रही. घरेलू मांग के साथ वैश्विक मांग में सुधार ने भारतीय कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों को समर्थन दिया.
महंगे कच्चे तेल के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. IMF ने कहा कि एनर्जी प्राइस शॉक के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि उसकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है. वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है.
आर्थिक आंकड़ों में सुधार का IMF ने किया स्वागत
IMF ने भारत में किए गए सांख्यिकीय सुधारों का भी स्वागत किया है. सरकार ने GDP के नए आंकड़ों में नए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) को शामिल किया है. इन बदलावों का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए ज्यादा व्यापक और सटीक आंकड़े उपलब्ध कराना है. बेहतर आंकड़ों से नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने और नीतिगत फैसले लेने में मदद मिल सकती है.
भारत बना हुआ है अहम ग्रोथ इंजन
IMF की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है. ऊंची ऊर्जा कीमतें, कमजोर वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भारत की मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही हैं. 7.8% की GDP ग्रोथ ने भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. हालांकि, आगे की वृद्धि के लिए वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग पर नजर बनी रहेगी.
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सेबी ने स्पष्ट किया है कि टोकनाइजेशन से बॉन्ड की कानूनी प्रकृति में कोई बदलाव नहीं होगा. कंपनी की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी और निवेशकों के अधिकार पहले की तरह ही रहेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) ने कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए ‘डीमैट 2.0’ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत बॉन्ड को डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (डDLT) के जरिए डिजिटल टोकन के रूप में रखा और ट्रांसफर किया जा सकेगा. यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की होलसेल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी डिजिटल रुपये से जुड़ी होगी, जिससे बॉन्ड और भुगतान का एक साथ और तुरंत निपटान संभव होगा.
तीन कंपनियों ने जारी किए 1,025 करोड़ रुपये के टोकनाइज्ड बॉन्ड
सेबी के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब तक तीन कंपनियां कुल 1,025 करोड़ रुपये के टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर चुकी हैं. आरईसी ने 7 सितंबर को 18 निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए. इसके बाद 9 सितंबर को एलऐंडटी ने चार निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि आईआईएफएल ने 25 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए. यह पहल ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा और सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुरू की.
क्या है डीमैट 2.0?
डीमैट 2.0 के तहत कॉरपोरेट बॉन्ड को डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर पर डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज किया जाएगा. यह एक साझा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड होता है, जिसे डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी के जरिए मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों द्वारा बनाए रखा जाता है. इस लेजर का स्वामित्व डिपॉजिटरी के पास रहेगा.
सेबी ने स्पष्ट किया है कि टोकनाइजेशन से बॉन्ड की कानूनी प्रकृति में कोई बदलाव नहीं होगा. कंपनी की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी और निवेशकों के अधिकार पहले की तरह ही रहेंगे. क्रेडिट रेटिंग, डिबेंचर ट्रस्टी, लिस्टिंग और डिस्क्लोजर से जुड़ी मौजूदा आवश्यकताएं भी लागू रहेंगी.
डिजिटल रुपये से होगा तुरंत निपटान
इस व्यवस्था की एक अहम खासियत बॉन्ड और भुगतान का एक साथ निपटान है. सेबी का डीमैट 2.0 सिस्टम यूनिफाइड मार्केट इंटरफेस (यूएमआई) के जरिए आरबीआई की होलसेल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) यानी डिजिटल रुपये से जुड़ा है.
इससे ‘एटॉमिक सेटलमेंट’ की सुविधा मिलेगी. यानी बॉन्ड का ट्रांसफर और उसके बदले भुगतान एक ही समय पर पूरा हो सकेगा. इससे लेनदेन में देरी और निपटान से जुड़े जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है.
ब्याज और रिडेम्पशन का काम भी हो सकता है स्वचालित
सेबी के अनुसार, डीएलटी आधारित व्यवस्था से कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, निपटान और उनकी सर्विसिंग की प्रक्रिया ज्यादा तेज और कुशल हो सकती है. तकनीक के इस्तेमाल से परिचालन संबंधी गलतियों को कम करने में भी मदद मिलेगी. स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए ब्याज भुगतान और बॉन्ड के रिडेम्पशन जैसी प्रक्रियाओं को स्वचालित किया जा सकता है.
अगले चरण में सेकंडरी मार्केट ट्रेडिंग
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि पायलट के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड को इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें मुख्य रूप से संस्थागत निवेशक होते हैं और ट्रेडिंग की आवृत्ति अपेक्षाकृत कम रहती है. उन्होंने बताया कि परियोजना का अगला चरण सेकंडरी मार्केट में बॉन्ड की ट्रेडिंग से जुड़ा होगा. यानी जिन निवेशकों के पास टोकनाइज्ड बॉन्ड होंगे, वे उन्हें दूसरे निवेशकों को ट्रांसफर कर सकेंगे. इसके लिए ट्रांसफर की एक व्यवस्था तैयार की गई है, जिसका फिलहाल परीक्षण चल रहा है.
चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा दायरा
डीमैट 2.0 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. शुरुआती चरण में नए जारी होने वाले कॉरपोरेट बॉन्ड को शामिल किया गया है. आगे चलकर मौजूदा रिक्वेस्ट-फॉर-कोट (आरएफक्यू) प्लेटफॉर्म के जरिए बॉन्ड की खरीद-बिक्री और खुदरा निवेशकों की पहुंच को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की योजना है. निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि टोकनाइज्ड बॉन्ड उनके मौजूदा डीमैट खाते में ही रखे जाएंगे. इसके लिए अलग डीमैट खाता या नया केवाईसी कराने की जरूरत नहीं होगी.
गुरुवार को सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ. निफ्टी 46.30 अंक यानी 0.20 फीसदी चढ़कर 23,477.80 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के बाद गुरुवार को निवेशकों को थोड़ी राहत मिली थी. करीब चार हफ्ते से अधिक समय बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी हरे निशान में बंद हुए. हालांकि, बाजार की यह रिकवरी सीमित रही और बाजार की चौड़ाई भी बहुत मजबूत नहीं दिखी. अब शुक्रवार के कारोबार से पहले वैश्विक संकेतों ने चिंता बढ़ा दी है. गिफ्ट निफ्टी में करीब 137 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिल रही है. ऐसे में आज भारतीय बाजार की शुरुआत कमजोर रहने की आशंका है.
कल सेंसेक्स और निफ्टी में आई मामूली तेजी
गुरुवार को 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 74,910.96 के ऊपरी और 74,598.47 के निचले स्तर तक गया. इसी तरह, 50 शेयरों वाला निफ्टी 46.30 अंक यानी 0.20 फीसदी चढ़कर 23,477.80 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,494.95 का उच्चतम और 23,380.10 का निचला स्तर बनाया. हालांकि, तेजी व्यापक नहीं रही. सेंसेक्स के 30 शेयरों में 15 बढ़त के साथ और 15 गिरावट के साथ बंद हुए. वहीं, निफ्टी के 50 शेयरों में 24 चढ़े और 26 शेयर गिरावट में रहे.
एक दिन पहले बाजार में आई थी बड़ी गिरावट
गुरुवार की तेजी से पहले बुधवार को शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली थी. सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 फीसदी टूटकर 74,764.23 पर बंद हुआ था. निफ्टी भी 203.60 अंक यानी 0.86 फीसदी गिरकर 23,431.50 पर बंद हुआ था. बाजार में इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में करीब 3.34 लाख करोड़ रुपये की कमी आई थी. ऐसे में गुरुवार की तेजी को फिलहाल बाजार में मजबूत ट्रेंड रिवर्सल के बजाय सीमित रिकवरी के तौर पर देखा जा रहा है.
गिफ्ट निफ्टी में 137 अंक की गिरावट
शुक्रवार के कारोबार से पहले गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत दे रही है. गिफ्ट निफ्टी करीब 137 अंक टूटकर 23,348 के आसपास कारोबार कर रहा था. इसका संकेत है कि घरेलू बाजार की शुरुआत गुरुवार के बंद स्तर से नीचे हो सकती है. इसके साथ ही एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुझान कमजोर नजर आया. जापान का निक्केई करीब 3 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 2.6 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था.
अमेरिकी बाजारों में भी रही बिकवाली
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.6 फीसदी, एसएंडपी 500 करीब 0.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट 0.65 फीसदी गिरकर बंद हुआ.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड एशियाई कारोबार के दौरान करीब 5 फीसदी के ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी. बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित बॉन्ड निवेश अधिक आकर्षक हो सकता है.
कच्चा तेल 110 डॉलर के करीब
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है. कच्चा तेल करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. हालांकि बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई और आईसीई पर सितंबर वायदा कच्चा तेल 1.09 फीसदी गिरकर 107.8 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. भारत कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है.
सोने-चांदी की कीमतों में भी गिरावट
ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच कीमती धातुओं पर भी दबाव देखने को मिला. हालिया अमेरिकी महंगाई से जुड़े आंकड़ों के बाद सोने का वायदा भाव 0.84 फीसदी और चांदी का वायदा भाव करीब 1.5 फीसदी गिर गया.
आज बाजार की दिशा किन बातों से तय होगी?
शुक्रवार को निवेशकों की नजर GIFT Nifty के साथ कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और एशियाई बाजारों की चाल पर रहेगी. इसके अलावा रुपये की दिशा और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम रहेंगी.
इन शेयरों पर भी रखें नजर
शुक्रवार को कॉरपोरेट गतिविधियों और अन्य अहम खबरों के चलते भारत फोर्ज, कोरोना रेमेडीज, फ्लिपकार्ट, गोदरेज प्रॉपर्टीज, केएसएच इंटरनेशनल, एचडीएफसी बैंक और श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी** के शेयर फोकस में रह सकते हैं. भारत फोर्ज की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी Bharat Forge Holding GmbH का Bharat Forge Global Holding GmbH में विलय हुआ है. कोरोना रेमेडीज में ChrysCapital से जुड़ी Sepia Investments ने 24.85 लाख शेयर यानी करीब 4.06 फीसदी हिस्सेदारी लगभग 509.6 करोड़ रुपये में बेची है. दूसरी ओर, SBI Mutual Fund और Amundi Funds Asia Equity Concentrated ने कंपनी के शेयर खरीदे हैं. फ्लिपकार्ट के क्विक-कॉमर्स कारोबार Flipkart Minutes का पिछले एक साल में कारोबार करीब चार गुना बढ़ा है और यह अब 150 से अधिक शहरों में करीब 1,200 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर के जरिए काम कर रहा है. गोदरेज प्रॉपर्टीज ने गुरुग्राम के Godrej Air प्रोजेक्ट से जुड़े विवाद को Orris Infrastructure के साथ समझौते के जरिए सुलझा लिया है और इसका अनुमानित वित्तीय प्रभाव करीब 70 करोड़ रुपये है. केएसएच इंटरनेशनल को महाराष्ट्र स्थित Supa मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए Consent to Operate की मंजूरी मिली है, जहां Magnet Winding Wires का उत्पादन होगा. एचडीएफसी बैंक को Credit Suisse Additional Tier 1 बॉन्ड से जुड़े मामलों में राहत मिली है. Bahrain की अदालत ने निवेशकों की ओर से दायर दो दावों को खारिज कर दिया है, जिसके बाद बैंक को ऐसे मामलों में अब तक सात अनुकूल फैसले मिल चुके हैं. वहीं, श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी में Capital Group से जुड़ी Smallcap World Fund Inc ने करीब 1.94 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है, जबकि प्रमोटर Anand Kamalnayan Pandit ने करीब 2 फीसदी हिस्सेदारी बेची है.
कुल मिलाकर, गुरुवार की तेजी से बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन शुक्रवार की शुरुआत से पहले वैश्विक माहौल फिर कमजोर हो गया है. गिफ्ट निफ्टी में गिरावट और एशियाई बाजारों में बिकवाली से शुरुआती कारोबार में दबाव रहने की आशंका है. हालांकि, घरेलू निवेशकों की खरीदारी या वैश्विक संकेतों में सुधार होने पर दिन के दौरान बाजार की दिशा बदल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
प्लेटफॉर्म्स से 26 से 29 अगस्त के बीच प्रकाशित कथित गलत पोस्ट हटाने और अपना स्पष्टीकरण प्रकाशित करने को कहा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि अगर उनके बारे में प्रसारित की जा रही कथित गलत जानकारी को नहीं हटाया गया, तो उनके खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी और विभिन्न संस्थाओं की ओर से लिए गए कर्ज से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई है.
एक सप्ताह में सुधारात्मक कार्रवाई की मांग
‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से 26 से 29 अगस्त के बीच अलग-अलग खातों से प्रकाशित कथित गलत जानकारी हटाने और इस मामले में उनका स्पष्टीकरण प्रकाशित करने को कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म्स को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है.
इस घटनाक्रम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ता द्वारा तैयार की गई सामग्री में किसी व्यक्ति या कंपनी से जुड़े विवादित दावों की सत्यता और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है.
व्यक्तिगत कर्ज लेने से किया इनकार
सुभाष चंद्रा इससे पहले सोशल मीडिया पर #PaisaWapasKaro हैशटैग के साथ साझा की जा रही पोस्ट को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया है. उनके अनुसार, बकाया राशि से जुड़े दावे अलग-अलग उधार लेने वाली संस्थाओं से संबंधित हैं.
30 अगस्त को उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, चंद्र ने कुल करीब 22,000 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे. इनमें करीब 4,800 करोड़ रुपये की गारंटी उस समय दी गई थी, जब संबंधित संस्थाओं ने कर्ज लिया था. बाकी गारंटी कर्ज चूक होने के बाद दी गई थी. बयान में कहा गया, “मेरे द्वारा उधार लिया गया कर्ज, डॉ. सुभाष चंद्र: 0 रुपये.” इसमें जोर दिया गया कि संबंधित कर्ज अलग-अलग कंपनियों ने लिया था, न कि चंद्रा ने व्यक्तिगत क्षमता में.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर सवाल
यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने मौजूद उस व्यापक चुनौती को भी रेखांकित करता है, जिसमें उन्हें गलत या विवादित जानकारी को लेकर सुधार की मांगों पर तेजी से कार्रवाई करनी होती है. साथ ही, उन्हें उपयोगकर्ता द्वारा प्रकाशित सामग्री, मध्यस्थ की जिम्मेदारियों और जानकारी की सटीकता को लेकर अलग-अलग दावों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है.
फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सफ्रान स्पेस (Safran Space) ने भारतीय अंतरिक्ष कंपनी ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) के साथ 50 लाख यूरो से अधिक मूल्य के अनुबंध किए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और फ्रांस ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देते हुए तीन नए वाणिज्यिक समझौते किए हैं. इन समझौतों के तहत अंतरिक्ष निगरानी, उपग्रह प्रक्षेपण और सूक्ष्म उपग्रह तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों की निजी कंपनियां मिलकर काम करेंगी. इससे भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चले आ रहे अंतरिक्ष सहयोग में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है.
सफ्रान स्पेस और ध्रुव स्पेस के बीच 50 लाख यूरो से अधिक का समझौता
फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सफ्रान स्पेस (Safran Space) ने भारतीय अंतरिक्ष कंपनी ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) के साथ 50 लाख यूरो से अधिक मूल्य के अनुबंध किए हैं. इसके तहत भारत की प्रस्तावित अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणाली के लिए जरूरी उपकरण और प्रणालियां उपलब्ध कराई जाएंगी. इन प्रणालियों में संचार व्यवस्था, जड़त्वीय दिशा-निर्धारण इकाइयां, प्रकाशीय उपकरण और जमीन पर स्थापित किए जाने वाले केंद्र शामिल हैं.
भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणाली के तहत 2027 से 2030 के बीच 52 उपग्रह भेजे जाने की योजना है. इसका उद्देश्य भारत की स्वतंत्र अंतरिक्ष निगरानी क्षमता को मजबूत करना है. सफ्रान पहले भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे चुकी है. कंपनी ने चंद्रयान-3 मिशन सहित कई कार्यक्रमों में भागीदारी की है.
टेकमीटूस्पेस के दो उपग्रह प्रक्षेपित करेगा राइड
फ्रांस की प्रक्षेपण सेवा कंपनी राइड (RIDE!) ने भारतीय कंपनी टेकमीटूस्पेस (TakeMeToSpace) के दो उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए समझौता किया है. टेकमीटूस्पेस कक्षा में स्थापित किए जाने वाले आंकड़ा केंद्रों के क्षेत्र में काम करती है. दोनों देशों की अंतरिक्ष कंपनियां पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न परियोजनाओं पर साथ काम कर रही हैं. इनमें उपग्रहों के एकीकरण, प्रक्षेपण और वापसी से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं.
सूक्ष्म उपग्रह क्षेत्र में यू-स्पेस और एक्सिसकेड्स साथ आए
फ्रांस की अंतरिक्ष कंपनी यू-स्पेस (U-Space) और भारत की कंपनी एक्सिसकेड्स (AXISCADES) ने भारत के सूक्ष्म उपग्रह बाजार में संभावनाएं तलाशने के लिए वाणिज्यिक सहयोग की घोषणा की है. दोनों कंपनियां भारत में बढ़ती वाणिज्यिक और संस्थागत मांग को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से काम करेंगी. इस सहयोग का उद्देश्य फ्रांस की अंतरिक्ष तकनीक और भारत की औद्योगिक क्षमता को एक साथ लाना है.
पांच दशक से अधिक पुराना है भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग
भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग पांच दशक से अधिक पुराना है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र (सीएनईएस) के बीच पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष भूगणित, मानव अंतरिक्ष उड़ान, प्रक्षेपण यान तकनीक और ग्रहों की खोज सहित कई क्षेत्रों में सहयोग रहा है.
दोनों देशों के बीच रणनीतिक अंतरिक्ष संवाद के माध्यम से नागरिक और रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है. इस संवाद की पहली बैठक जून 2023 में पेरिस और दूसरी बैठक मार्च 2024 में नई दिल्ली में हुई थी. दोनों देश पृथ्वी अवलोकन मिशन, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और अंतरिक्ष स्थिति की जानकारी जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं.
उपग्रह प्रक्षेपण में भी पुराना सहयोग
भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) से फ्रांस के उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जा चुका है. वहीं फ्रांस की एरियनस्पेस ने भारतीय भूस्थिर उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में भूमिका निभाई है. फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने नागरिक उपग्रह विकास और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने का समर्थन किया था.
भारत सरकार भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है. हाल में भारत और फ्रांस ने मानव अंतरिक्ष उड़ान, उन्नत अंतरिक्ष तकनीक और उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है.
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन में करीब 20 अरब यूरो की घोषणाएं
पेरिस में 9 और 10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इसमें विभिन्न देशों की सरकारों, अंतरिक्ष एजेंसियों, कंपनियों और वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.
सम्मेलन के दौरान करीब 20 अरब यूरो मूल्य के अनुबंधों, निवेश और अन्य प्रतिबद्धताओं से जुड़ी 51 घोषणाएं की गई हैं. भारत-फ्रांस के बीच हुए नए समझौते इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग का हिस्सा हैं. भारत और फ्रांस के बीच हाल के वर्षों में अंतरिक्ष सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है. दोनों देश अब सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ-साथ निजी कंपनियों की भागीदारी के जरिए भी इस साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं.
SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, AUM बढ़कर ₹87.08 लाख करोड़ पहुंचा; स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में रहा मजबूत निवेश
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड निवेशकों का भरोसा बना हुआ है. अगस्त में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कुल 41,353.60 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया. इस दौरान SIP के जरिए निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, इंडस्ट्री का कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 87.08 लाख करोड़ रुपये हो गया. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने 10 सितंबर को अगस्त के आंकड़े जारी किए.
अगस्त में ₹14.09 लाख करोड़ जुटाए, ₹13.68 लाख करोड़ निकले
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में सभी म्यूचुअल फंड स्कीम्स के जरिए 14.09 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि निवेशकों ने 13.68 लाख करोड़ रुपये निकाले. इस तरह महीने में 41,353.60 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा. बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह के मुताबिक, आमतौर पर बाजार में गिरावट के दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश की रफ्तार कम हो जाती है. हालांकि, अगस्त में ऐसा नहीं हुआ. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बाजार की कमजोरी को घबराकर पैसा निकालने के बजाय निवेश के अवसर के तौर पर देखा.
स्मॉलकैप और मिडकैप फंड निवेशकों की पसंद
अगस्त में स्मॉलकैप फंड्स में सबसे ज्यादा 7,973.33 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया. इसके बाद मिडकैप फंड्स में 6,989.40 करोड़ रुपये, फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,059.42 करोड़ रुपये, लार्ज एंड मिडकैप फंड्स में 3,872.79 करोड़ रुपये और मल्टीकैप फंड्स में 3,732.77 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
इसके विपरीत, लार्जकैप फंड्स से 1,147.36 करोड़ रुपये और ELSS स्कीम्स से 1,078.32 करोड़ रुपये की नेट निकासी हुई. डिविडेंड यील्ड फंड्स से 133.57 करोड़ रुपये और सेक्टोरल फंड्स से 53.19 करोड़ रुपये निकाले गए.
इक्विटी फंड्स में ₹29,329 करोड़ का निवेश
अगस्त में ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम्स में 73,614.07 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि 44,285.45 करोड़ रुपये की निकासी हुई. इस तरह इक्विटी फंड्स में 29,328.62 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा. अगस्त के अंत में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का कुल AUM 39.21 लाख करोड़ रुपये था. इस कैटेगरी में 579 स्कीम्स और करीब 18.92 करोड़ फोलियो थे.
एविसा वेल्थ क्रिएटर्स के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर आदित्य अग्रवाल ने कहा कि इक्विटी फंड्स में पिछले महीने की तुलना में 19 फीसदी अधिक रकम आई. उन्होंने कहा कि अकेले स्मॉलकैप फंड्स में आया 7,973 करोड़ रुपये का निवेश इक्विटी फंड्स के कुल निवेश का 27 फीसदी से अधिक रहा.
SIP निवेश रिकॉर्ड ₹32,297 करोड़ पर
अगस्त में SIP के जरिए 32,297 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो जुलाई के 31,961 करोड़ रुपये से अधिक है. अगस्त 2025 में SIP के जरिए 28,265 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था. इस लिहाज से सालाना आधार पर SIP निवेश करीब 14 फीसदी बढ़ा है.
चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में SIP के जरिए कुल निवेश 1.58 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है. शाश्वत सिंह के मुताबिक, केवल रिकॉर्ड SIP आंकड़ा ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी अहम है कि SIP के जरिए निवेश कई महीनों से लगातार एक सीमित दायरे में बढ़ रहा है.
ओपन एंडेड स्कीम्स में ₹42,466 करोड़ का नेट इनफ्लो
अगस्त के अंत में देश में कुल 1,935 ओपन एंडेड स्कीम्स थीं. इनका कुल AUM 86.92 लाख करोड़ रुपये और फोलियो की संख्या करीब 28.31 करोड़ रही. ओपन एंडेड स्कीम्स में अगस्त के दौरान 42,466.09 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ. इसके मुकाबले क्लोज एंडेड स्कीम्स से 1,112.38 करोड़ रुपये और इंटरवल स्कीम्स से 11 लाख रुपये की नेट निकासी हुई.
डेट फंड्स से ₹8,127 करोड़ की निकासी
अगस्त में ओपन एंडेड डेट स्कीम्स से 8,127.32 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो रहा. इस कैटेगरी का कुल AUM 19.33 लाख करोड़ रुपये था. डेट फंड्स में सबसे ज्यादा निकासी ओवरनाइट फंड्स से हुई, जहां से 30,654.25 करोड़ रुपये निकाले गए. शॉर्ट टर्म फंड्स से 4,258.56 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स से 3,190.17 करोड़ रुपये की निकासी हुई. हालांकि, कुछ डेट कैटेगरी में निवेश भी बढ़ा. लिक्विड फंड्स में 19,934.29 करोड़ रुपये, मनी मार्केट फंड्स में 11,734.71 करोड़ रुपये और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स में 4,256.55 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा.
हाइब्रिड फंड्स में ₹10,045 करोड़ का निवेश
अगस्त में हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स में 10,045.34 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा. इसके साथ इस कैटेगरी का कुल AUM 11.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. ऑर्बिट्राज फंड्स में 3,789.02 करोड़ रुपये और मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स में 3,670.97 करोड़ रुपये का निवेश आया. इसके अलावा बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड्स में 835.50 करोड़ रुपये और एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स में 1,322.79 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा.
ETF में ₹10,161 करोड़ आए
अगस्त में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में 10,160.87 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया. इस कैटेगरी का कुल AUM 11.97 लाख करोड़ रुपये रहा और फोलियो की संख्या करीब 3.97 करोड़ थी. इक्विटी ETF में 7,237.49 करोड़ रुपये, गोल्ड ETF में 2,596.70 करोड़ रुपये और सिल्वर ETF में 1,270.63 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. वहीं, डेट ETF से 944.97 करोड़ रुपये निकाले गए.
इंडेक्स फंड्स में 787.49 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा. इक्विटी इंडेक्स फंड्स में 2,392.87 करोड़ रुपये आए, जबकि डेट इंडेक्स फंड्स से 1,609.58 करोड़ रुपये की निकासी हुई.
NFO से जुटाए ₹7,110 करोड़
अगस्त में 26 नई म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने कुल 7,110 करोड़ रुपये जुटाए. इनमें छह नई इक्विटी स्कीम्स ने 3,051 करोड़ रुपये और दो हाइब्रिड स्कीम्स ने 848 करोड़ रुपये जुटाए. तीन नई डेट स्कीम्स में 1,647 करोड़ रुपये आए. चार इंडेक्स फंड्स ने 355 करोड़ रुपये और 11 नए ETF ने 209 करोड़ रुपये जुटाए.
नई स्कीम्स में SBI बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड ने 1,818 करोड़ रुपये और बंधन कॉन्ट्रा फंड ने 1,711 करोड़ रुपये जुटाए. इसके अलावा DSP फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टोरल डेट फंड में 563 करोड़ रुपये और बारोडा BNP पारिबा सर्विसेज फंड में 592 करोड़ रुपये का निवेश आया.
कंपनी के अनुसार, उसके प्रत्येक एसी यूनिट को कनेक्टेड डिवाइस के तौर पर तैयार किया गया है. इसमें लगे सेंसर तापमान, बिजली की खपत और गैस प्रेशर जैसी जानकारी रियल टाइम में रिकॉर्ड करते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कूलिंग-एज-ए-सर्विस (CaaS) प्लेटफॉर्म सर्कोलाइफ ने प्री-सीरीज ए फंडिंग राउंड में 4.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 40.45 करोड़ रुपये जुटाए हैं. कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल अपने कारोबार का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने, एसी यूनिट्स की संख्या बढ़ाने और आईओटी आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक को विकसित करने में करेगी. कंपनी के पास फिलहाल पांच शहरों में करीब 10,000 सक्रिय सब्सक्रिप्शन हैं और अगले 24 महीनों में इसे बढ़ाकर 40,000 यूनिट करने का लक्ष्य है.
भारत जयसिंघानी के नेतृत्व में हुआ फंडिंग राउंड
यह फंडिंग राउंड शुरुआती चरण के निवेशक और पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर भारत जयसिंघानी के नेतृत्व में हुआ. इसमें नजारा टेक्नोलॉजीज के संस्थापक नितिश मित्तलसेन, इंटेलिक्विटी वेंचर्स, मुकुल अग्रवाल, परम कैपिटल, एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक के एमडी सुमित जालान, एवरेस्ट फ्लीट के संस्थापक सिद्धार्थ लडसरिया और एवरेस्ट फ्लेवर्स के एमडी आनंद लडसरिया समेत कई निवेशकों ने हिस्सा लिया.
इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत गोयनका, स्काई इम्पैक्ट कैपिटल के आकाश सचदेव, आइडियाज91 के संस्थापक रोहित देव तथा एसएन दमानी और व्योम वेल्थ जैसे फैमिली ऑफिस भी इस राउंड में शामिल रहे.
10,000 से 40,000 यूनिट तक विस्तार की योजना
सर्कोलाइफ ने 2023 के अंत में मुंबई से अपना परिचालन शुरू किया था. करीब ढाई साल में कंपनी ने पांच भारतीय शहरों में अपना नेटवर्क और एसी यूनिट्स का बेड़ा तैयार किया है. कंपनी रेस्टोरेंट, होटल, जिम, सैलून और को-लिविंग ऑपरेटरों समेत छोटे कारोबारों और एंटरप्राइज ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन आधारित कूलिंग सुविधा उपलब्ध कराती है.
कंपनी के मुताबिक, नई फंडिंग के जरिए अगले 24 महीनों में सक्रिय यूनिट्स की संख्या करीब चार गुना बढ़ाकर 40,000 करने का लक्ष्य है.
सर्कोलाइफ के को-फाउंडर और सीईओ अभिषेक मुरारका ने कहा, "पांच शहरों और 10,000 सब्सक्रिप्शन ने हमें दिखाया है कि यह मॉडल काम करता है. यह फंडिंग हमें राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए फ्लीट, फील्ड सर्विस और टेक्नोलॉजी तैयार करने में मदद करेगी."
आईओटी और एआई से एसी की निगरानी
कंपनी के अनुसार, उसके प्रत्येक एसी यूनिट को कनेक्टेड डिवाइस के तौर पर तैयार किया गया है. इसमें लगे सेंसर तापमान, बिजली की खपत और गैस प्रेशर जैसी जानकारी रियल टाइम में रिकॉर्ड करते हैं. यह डेटा प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम को भेजा जाता है, जो किसी पार्ट में संभावित खराबी को ब्रेकडाउन से पहले पहचानने में मदद करता है.
सर्कोलाइफ अब इस डेटा सिस्टम को एआई और एडवांस्ड सेंसर के साथ और विकसित कर रही है. कंपनी प्रत्येक डिवाइस का डिजिटल ट्विन तैयार करने के साथ पूरे साइट या प्रॉपर्टी के कूलिंग सिस्टम का डिजिटल मॉडल बनाने पर भी काम कर रही है. इसका उद्देश्य कूलिंग सिस्टम की परफॉर्मेंस को रियल टाइम में मॉनिटर और बेहतर करना है.
कंपनी ने बताया कि उसके इन-हाउस फील्ड सर्विस कर्मचारी उन सभी शहरों में सेवाएं देते हैं, जहां सर्कोलाइफ मौजूद है. मुंबई और दिल्ली में दो समर्पित सुविधाओं के जरिए पुरानी यूनिट्स को स्क्रैप करने के बजाय रिफर्बिश और दोबारा इस्तेमाल किया जाता है.
"कूलिंग को आसान बनाने वाला मॉडल"
भारत जयसिंघानी ने कहा, "कूलिंग हमेशा से ज्यादा ऊर्जा खपत और ज्यादा मेंटेनेंस वाला क्षेत्र रहा है और सर्कोलाइफ इसे आसान बनाता है. ग्राहक हर महीने भुगतान करता है और उसे मेंटेनेंस की चिंता नहीं करनी पड़ती. यह सुविधा ऐसी तकनीक पर आधारित है, जो हर यूनिट की लगातार निगरानी करती है और समस्याओं को होने से पहले पहचानने की कोशिश करती है." उन्होंने कहा कि तकनीक और सरल ग्राहक अनुभव का यह संयोजन उन कारोबारों में से है, जिनमें वह निवेश करना पसंद करते हैं.
डेटा और इंटेलिजेंस पर फोकस
नजारा टेक्नोलॉजीज के संस्थापक नितिश मित्तलसेन ने कहा, "मैं ऐसे कारोबारों की ओर आकर्षित होता हूं, जहां हर ग्राहक और हर ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म को और स्मार्ट बनाता है. इससे समय के साथ एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त बन सकती है. सर्कोलाइफ ऊपर से एक एसी सब्सक्रिप्शन कारोबार दिख सकता है, लेकिन इसके पीछे वह एक डेटा और इंटेलिजेंस लेयर तैयार कर रही है, जो बड़े पैमाने पर पूरे फ्लीट को अधिक कुशल बना सकती है."
फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा
सर्कोलाइफ नई पूंजी का इस्तेमाल फ्लीट और भौगोलिक विस्तार, इन-हाउस इंस्टॉलेशन और सर्विस नेटवर्क को बढ़ाने तथा एआई आधारित आईओटी प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म को आगे विकसित करने में करेगी.
कंपनी का नेतृत्व को-फाउंडर और सीईओ अभिषेक मुरारका, को-फाउंडर और सीओओ तुषार पाटिल तथा को-फाउंडर और सीटीओ देवांशु मिश्रा कर रहे हैं. अभिषेक मुरारका को कॉरपोरेट फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में करीब दो दशक का अनुभव है, जबकि तुषार पाटिल को ग्लोबल सोर्सिंग और सप्लाई चेन में 20 साल से अधिक का अनुभव है. देवांशु मिश्रा आईआईटी रुड़की से हैं और आईओटी हार्डवेयर व फर्मवेयर इंजीनियरिंग से जुड़े रहे हैं.
शालिन खन्ना सीडीओ और सीएमओ के तौर पर नेतृत्व टीम का हिस्सा हैं. वहीं रणनीतिक सलाहकार विनीत तनेजा कंपनी को सलाह दे रहे हैं. तनेजा डायसन एपीएसी के पूर्व प्रेसिडेंट, माइक्रोमैक्स के सीईओ और सैमसंग इंडिया के कंट्री हेड रह चुके हैं.
Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर पद से अजीत मोहन का इस्तीफा, करीब दो दशक के करियर में टीवी से स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया तक कई बड़े बदलावों का हिस्सा रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के डिजिटल मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र में करीब दो दशक का सफर तय करने वाले अजीत मोहन अब Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) पद से हट रहे हैं. Snap ने उनके पद छोड़ने की घोषणा कर दी है, उनका आखिरी कार्यदिवस 31 दिसंबर 2026 रहने की उम्मीद है. व्यक्तिगत कारणों से लिया गया यह फैसला ऐसे समय आया है जब मोहन ने टीवी, स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और परफॉर्मेंस विज्ञापन के दौर में कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं.
उनका करियर भारत के मीडिया बाजार में हुए बड़े बदलावों के साथ आगे बढ़ा. Star TV से शुरू हुआ सफर Hotstar, Meta और Snap तक पहुंचा. इस दौरान उन्होंने भारत में टीवी से डिजिटल स्ट्रीमिंग और फिर सोशल व परफॉर्मेंस विज्ञापन की ओर बढ़ते बाजार को करीब से देखा और कई स्तरों पर उसका नेतृत्व किया.
कंसल्टिंग से शुरू हुआ करियर
अजीत मोहन ने अपने करियर की शुरुआत स्ट्रैटेजी कंसल्टिंग से की. उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में Arthur D. Little के साथ करीब पांच साल तक काम किया, जहां उनका काम टेलीकॉम सेक्टर और 2G-3G से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर रहा.
इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में McKinsey के साथ करीब पांच साल काम किया और मीडिया क्षेत्र के ग्राहकों को सलाह दी. मीडिया इकोनॉमिक्स और डिजिटल बदलाव को समझने का यह अनुभव आगे उनके करियर में काफी अहम रहा.
2012 में Star TV से भारत वापसी
2012 में अजीत मोहन भारत लौटे और Star TV Network से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर जुड़े. बाद में उन्हें एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया, जहां उन्होंने कंपनी की डिजिटल रणनीति पर काम किया.
2013 में उन्होंने Starsports.com को पेड लाइव स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म के तौर पर लॉन्च किया. यह प्लेटफॉर्म 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स तक पहुंचा. इसने भारत में प्रीमियम डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट के लिए दर्शकों की भुगतान करने की क्षमता को दिखाया.
Hotstar लॉन्च कर बनाया बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म
अजीत मोहन के करियर में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 2015 में आया, जब उन्होंने Hotstar की अवधारणा तैयार की और इसे लॉन्च किया. अप्रैल 2016 में वह Hotstar के फाउंडिंग सीईओ बने. अगले चार वर्षों में उन्होंने Hotstar को भारत के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई. क्रिकेट और प्रीमियम मनोरंजन कंटेंट प्लेटफॉर्म की रणनीति के केंद्र में रहा.
दिसंबर 2018 में जब उन्होंने Hotstar छोड़ा, तब तक यह भारत के स्ट्रीमिंग बाजार में एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका था. बाद में Hotstar का JioCinema के साथ विलय हुआ और 2025 में JioHotstar अस्तित्व में आया.
Meta India में संभाली बड़ी जिम्मेदारी
जनवरी 2019 में अजीत मोहन Meta से जुड़े और भारत के लिए वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर बने. इस भूमिका में उन्होंने भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में कंपनी की रणनीति और संचालन की जिम्मेदारी संभाली.
उनके कार्यकाल के दौरान Meta को कंटेंट मॉडरेशन, रेगुलेटरी मामलों और देश में अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के विस्तार जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ा. वह Meta के उन चुनिंदा देश प्रमुखों में रहे जो सीधे कंपनी के मुख्यालय से रिपोर्ट करते थे. नवंबर 2022 में उन्होंने Meta से इस्तीफा दिया. इसके बाद उनका अगला पड़ाव Snap बना.
Snap में एशिया से वैश्विक विज्ञापन कारोबार तक
फरवरी 2023 में अजीत मोहन Snap से जुड़े. उन्हें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी दी गई और वह सिंगापुर से भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया समेत कई बाजारों को देखते थे. फरवरी 2025 में उन्हें Snap का चीफ बिजनेस ऑफिसर बनाया गया. इस भूमिका में उन्होंने कंपनी के वैश्विक विज्ञापन कारोबार की जिम्मेदारी संभाली.
उनके नेतृत्व में Snap ने ब्रांड-आधारित विज्ञापन से डायरेक्ट-रिस्पॉन्स और परफॉर्मेंस विज्ञापन की ओर रणनीतिक बदलाव किया. इसका उद्देश्य विज्ञापनदाताओं को कैंपेन के ज्यादा स्पष्ट और मापने योग्य नतीजे उपलब्ध कराना था. मोहन ने कई मौकों पर भारत को Snap का सबसे बड़ा यूजर मार्केट बताया. उनके कार्यकाल में कंपनी के भारत में 25 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर्स होने की बात सामने आई.
व्यक्तिगत कारणों से छोड़ा पद
Snap ने सितंबर 2026 में घोषणा की कि अजीत मोहन CBO पद से हटेंगे और अन्य अवसरों की तलाश करेंगे. बताया गया कि उनके परिवार के सिंगापुर में रहने और उनकी भूमिका में लगातार वैश्विक यात्रा की जरूरत के कारण उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से यह फैसला लिया. Snap के EMEA प्रमुख रोनन हैरिस अब कंपनी के नए चीफ कमर्शियल ऑफिसर होंगे और वैश्विक विज्ञापन कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे.
अजीत मोहन का करियर क्यों है खास?
अजीत मोहन का करीब दो दशक का करियर भारत के डिजिटल मीडिया बाजार के विकास की कहानी से जुड़ा हुआ है. Star TV में डिजिटल विस्तार से लेकर Hotstar के स्ट्रीमिंग मॉडल, Meta के सोशल मीडिया इकोसिस्टम और Snap के परफॉर्मेंस विज्ञापन कारोबार तक उनका सफर मीडिया उद्योग में हुए बदलावों को दर्शाता है.
भारत में जहां दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक टीवी से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और फिर सोशल मीडिया की ओर बढ़ा, वहीं विज्ञापन बाजार भी टीवी और ब्रांड विज्ञापन से आगे बढ़कर डिजिटल और परफॉर्मेंस-आधारित मॉडल की ओर गया. मोहन का करियर इसी बदलाव के कई महत्वपूर्ण चरणों का हिस्सा रहा है.
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बनने वाले सावलकॉट जलविद्युत प्रोजेक्ट के शुरुआती काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर, अडानी समूह समेत पांच कंपनियों ने लगाई बोली
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर प्रस्तावित 1,850 मेगावाट के सावलकॉट जलविद्युत प्रोजेक्ट (Sawalkot Hydroelectric Project) के आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिख रहा है. करीब ₹31,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना लगभग चार दशक से अटकी हुई है. अब शुरुआती निर्माण कार्य के लिए जारी ₹5,129 करोड़ के टेंडर में पांच बड़ी कंपनियों ने बोली लगाई है. इनमें अडानी समूह, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC), पटेल इंजीनियरिंग, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और ऋत्विक प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.
चार दशक से अटका था प्रोजेक्ट
सावलकॉट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट लंबे समय से विभिन्न मंजूरियों और भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते से जुड़े मुद्दों के कारण आगे नहीं बढ़ सका था. अब परियोजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया में तेजी आई है. करीब ₹31,000 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना चिनाब बेसिन में भारत की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल होगी. इसके आगे बढ़ने से जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत क्षमता के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
शुरुआती काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में शुरुआती चरण के काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है. इसके लिए पांच कंपनियों ने अपनी बोलियां दाखिल की हैं. बोली लगाने वाली कंपनियों में अडानी समूह, HCC, पटेल इंजीनियरिंग, L&T और ऋत्विक प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. पांच बड़ी कंपनियों की भागीदारी से परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
चिनाब बेसिन में कई परियोजनाएं जारी
सावलकॉट परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब चिनाब बेसिन में कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है. इनमें किरू, क्वार और रतले जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. 1,850 मेगावाट की क्षमता वाला सावलकॉट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण इजाफा कर सकता है. इससे क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ परिवहन, स्थानीय सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. सावलकॉट परियोजना से भी जम्मू-कश्मीर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है. चिनाब नदी पर इस परियोजना की प्रगति भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह पश्चिमी नदियों की जलविद्युत क्षमता के इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है.