Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर पद से अजीत मोहन का इस्तीफा, करीब दो दशक के करियर में टीवी से स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया तक कई बड़े बदलावों का हिस्सा रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत के डिजिटल मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र में करीब दो दशक का सफर तय करने वाले अजीत मोहन अब Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) पद से हट रहे हैं. Snap ने उनके पद छोड़ने की घोषणा कर दी है, उनका आखिरी कार्यदिवस 31 दिसंबर 2026 रहने की उम्मीद है. व्यक्तिगत कारणों से लिया गया यह फैसला ऐसे समय आया है जब मोहन ने टीवी, स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और परफॉर्मेंस विज्ञापन के दौर में कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं.
उनका करियर भारत के मीडिया बाजार में हुए बड़े बदलावों के साथ आगे बढ़ा. Star TV से शुरू हुआ सफर Hotstar, Meta और Snap तक पहुंचा. इस दौरान उन्होंने भारत में टीवी से डिजिटल स्ट्रीमिंग और फिर सोशल व परफॉर्मेंस विज्ञापन की ओर बढ़ते बाजार को करीब से देखा और कई स्तरों पर उसका नेतृत्व किया.
कंसल्टिंग से शुरू हुआ करियर
अजीत मोहन ने अपने करियर की शुरुआत स्ट्रैटेजी कंसल्टिंग से की. उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में Arthur D. Little के साथ करीब पांच साल तक काम किया, जहां उनका काम टेलीकॉम सेक्टर और 2G-3G से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर रहा.
इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में McKinsey के साथ करीब पांच साल काम किया और मीडिया क्षेत्र के ग्राहकों को सलाह दी. मीडिया इकोनॉमिक्स और डिजिटल बदलाव को समझने का यह अनुभव आगे उनके करियर में काफी अहम रहा.
2012 में Star TV से भारत वापसी
2012 में अजीत मोहन भारत लौटे और Star TV Network से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर जुड़े. बाद में उन्हें एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया, जहां उन्होंने कंपनी की डिजिटल रणनीति पर काम किया.
2013 में उन्होंने Starsports.com को पेड लाइव स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म के तौर पर लॉन्च किया. यह प्लेटफॉर्म 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स तक पहुंचा. इसने भारत में प्रीमियम डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट के लिए दर्शकों की भुगतान करने की क्षमता को दिखाया.
Hotstar लॉन्च कर बनाया बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म
अजीत मोहन के करियर में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 2015 में आया, जब उन्होंने Hotstar की अवधारणा तैयार की और इसे लॉन्च किया. अप्रैल 2016 में वह Hotstar के फाउंडिंग सीईओ बने. अगले चार वर्षों में उन्होंने Hotstar को भारत के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई. क्रिकेट और प्रीमियम मनोरंजन कंटेंट प्लेटफॉर्म की रणनीति के केंद्र में रहा.
दिसंबर 2018 में जब उन्होंने Hotstar छोड़ा, तब तक यह भारत के स्ट्रीमिंग बाजार में एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका था. बाद में Hotstar का JioCinema के साथ विलय हुआ और 2025 में JioHotstar अस्तित्व में आया.
Meta India में संभाली बड़ी जिम्मेदारी
जनवरी 2019 में अजीत मोहन Meta से जुड़े और भारत के लिए वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर बने. इस भूमिका में उन्होंने भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में कंपनी की रणनीति और संचालन की जिम्मेदारी संभाली.
उनके कार्यकाल के दौरान Meta को कंटेंट मॉडरेशन, रेगुलेटरी मामलों और देश में अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के विस्तार जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ा. वह Meta के उन चुनिंदा देश प्रमुखों में रहे जो सीधे कंपनी के मुख्यालय से रिपोर्ट करते थे. नवंबर 2022 में उन्होंने Meta से इस्तीफा दिया. इसके बाद उनका अगला पड़ाव Snap बना.
Snap में एशिया से वैश्विक विज्ञापन कारोबार तक
फरवरी 2023 में अजीत मोहन Snap से जुड़े. उन्हें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी दी गई और वह सिंगापुर से भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया समेत कई बाजारों को देखते थे. फरवरी 2025 में उन्हें Snap का चीफ बिजनेस ऑफिसर बनाया गया. इस भूमिका में उन्होंने कंपनी के वैश्विक विज्ञापन कारोबार की जिम्मेदारी संभाली.
उनके नेतृत्व में Snap ने ब्रांड-आधारित विज्ञापन से डायरेक्ट-रिस्पॉन्स और परफॉर्मेंस विज्ञापन की ओर रणनीतिक बदलाव किया. इसका उद्देश्य विज्ञापनदाताओं को कैंपेन के ज्यादा स्पष्ट और मापने योग्य नतीजे उपलब्ध कराना था. मोहन ने कई मौकों पर भारत को Snap का सबसे बड़ा यूजर मार्केट बताया. उनके कार्यकाल में कंपनी के भारत में 25 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर्स होने की बात सामने आई.
व्यक्तिगत कारणों से छोड़ा पद
Snap ने सितंबर 2026 में घोषणा की कि अजीत मोहन CBO पद से हटेंगे और अन्य अवसरों की तलाश करेंगे. बताया गया कि उनके परिवार के सिंगापुर में रहने और उनकी भूमिका में लगातार वैश्विक यात्रा की जरूरत के कारण उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से यह फैसला लिया. Snap के EMEA प्रमुख रोनन हैरिस अब कंपनी के नए चीफ कमर्शियल ऑफिसर होंगे और वैश्विक विज्ञापन कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे.
अजीत मोहन का करियर क्यों है खास?
अजीत मोहन का करीब दो दशक का करियर भारत के डिजिटल मीडिया बाजार के विकास की कहानी से जुड़ा हुआ है. Star TV में डिजिटल विस्तार से लेकर Hotstar के स्ट्रीमिंग मॉडल, Meta के सोशल मीडिया इकोसिस्टम और Snap के परफॉर्मेंस विज्ञापन कारोबार तक उनका सफर मीडिया उद्योग में हुए बदलावों को दर्शाता है.
भारत में जहां दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक टीवी से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और फिर सोशल मीडिया की ओर बढ़ा, वहीं विज्ञापन बाजार भी टीवी और ब्रांड विज्ञापन से आगे बढ़कर डिजिटल और परफॉर्मेंस-आधारित मॉडल की ओर गया. मोहन का करियर इसी बदलाव के कई महत्वपूर्ण चरणों का हिस्सा रहा है.
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बनने वाले सावलकॉट जलविद्युत प्रोजेक्ट के शुरुआती काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर, अडानी समूह समेत पांच कंपनियों ने लगाई बोली
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर प्रस्तावित 1,850 मेगावाट के सावलकॉट जलविद्युत प्रोजेक्ट (Sawalkot Hydroelectric Project) के आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिख रहा है. करीब ₹31,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना लगभग चार दशक से अटकी हुई है. अब शुरुआती निर्माण कार्य के लिए जारी ₹5,129 करोड़ के टेंडर में पांच बड़ी कंपनियों ने बोली लगाई है. इनमें अडानी समूह, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC), पटेल इंजीनियरिंग, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और ऋत्विक प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.
चार दशक से अटका था प्रोजेक्ट
सावलकॉट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट लंबे समय से विभिन्न मंजूरियों और भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते से जुड़े मुद्दों के कारण आगे नहीं बढ़ सका था. अब परियोजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया में तेजी आई है. करीब ₹31,000 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना चिनाब बेसिन में भारत की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल होगी. इसके आगे बढ़ने से जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत क्षमता के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
शुरुआती काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में शुरुआती चरण के काम के लिए ₹5,129 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है. इसके लिए पांच कंपनियों ने अपनी बोलियां दाखिल की हैं. बोली लगाने वाली कंपनियों में अडानी समूह, HCC, पटेल इंजीनियरिंग, L&T और ऋत्विक प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. पांच बड़ी कंपनियों की भागीदारी से परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
चिनाब बेसिन में कई परियोजनाएं जारी
सावलकॉट परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब चिनाब बेसिन में कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है. इनमें किरू, क्वार और रतले जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. 1,850 मेगावाट की क्षमता वाला सावलकॉट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण इजाफा कर सकता है. इससे क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ परिवहन, स्थानीय सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. सावलकॉट परियोजना से भी जम्मू-कश्मीर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है. चिनाब नदी पर इस परियोजना की प्रगति भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह पश्चिमी नदियों की जलविद्युत क्षमता के इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक अगस्त में दुनियाभर के Gold ETF में 18 अरब डॉलर का निवेश आया, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है. यूरोप में रिकॉर्ड 7.9 अरब डॉलर और उत्तरी अमेरिका में 7.7 अरब डॉलर का निवेश हुआ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनियाभर में सोने में निवेश करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में अगस्त में निवेश की रफ्तार तेज रही. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, महीने के दौरान वैश्विक Gold ETF में 18 अरब डॉलर का निवेश आया. रकम के लिहाज से यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है. इस बढ़त में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के फंडों की बड़ी भूमिका रही.
अगस्त 2026 में उत्तरी अमेरिका के Gold ETF में 7.7 अरब डॉलर का निवेश आया. यह इस क्षेत्र में अब तक का तीसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है. वहीं, यूरोप के Gold ETF में रिकॉर्ड 7.9 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो किसी एक महीने में अब तक का सबसे ज्यादा निवेश है. निवेश में बढ़ोतरी और सोने की कीमतों में तेजी के चलते वैश्विक Gold ETF की प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (AUM) 16 फीसदी बढ़कर 615 अरब डॉलर हो गईं. इन फंडों के पास मौजूद सोने की कुल मात्रा भी 121 टन बढ़कर रिकॉर्ड 4,189 टन पर पहुंच गई.
एशिया में भी बढ़ी Gold ETF की मांग
एशियाई Gold ETF में अगस्त के दौरान 2 अरब डॉलर का निवेश आया. WGC के मुताबिक, फरवरी के बाद यह क्षेत्र के लिए सबसे मजबूत महीना रहा. एशिया में सबसे ज्यादा निवेश चीन में हुआ. स्थानीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का रुझान बढ़ाया. अगस्त के दौरान सोने की कीमत 13.3 फीसदी बढ़कर 4,563 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई.
उत्तरी अमेरिका में महीने की शुरुआत में Gold ETF की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही, लेकिन 17 अगस्त वाले सप्ताह में निवेश में अचानक तेजी आई. सिर्फ पांच कारोबारी दिनों में करीब 4 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो पूरे महीने में आए निवेश के आधे से ज्यादा था.
WGC के मुताबिक, येन को समर्थन देने के लिए अमेरिका के हस्तक्षेप, लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी और अगस्त में सोने की कीमतों में लगातार तेजी जैसे कारणों से निवेशकों का रुझान Gold ETF की ओर बढ़ा.
यूरोप में क्यों बढ़ा सोने का आकर्षण?
यूरोप में सरकारी वित्त की स्थिति और सरकारों के लिए कर्ज जुटाने की बढ़ती लागत को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है. ऐसे माहौल में जोखिम कम करने और सरकारी बॉन्ड के विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ी. ब्रिटेन यूरोप में Gold ETF निवेश के मामले में सबसे आगे रहा. अगस्त में ब्रिटेन के फंडों में 4.4 अरब डॉलर का निवेश आया. यह देश में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक निवेश है. फ्रांस के Gold ETF में भी अगस्त 2026 में रिकॉर्ड 1.5 अरब डॉलर का निवेश आया. WGC के मुताबिक, यह फ्रांस के लिए अब तक का सबसे मजबूत महीना रहा.
सोने की कीमतों पर आगे क्या है नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार, कॉमेक्स पर सोना फिलहाल 4,500 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रहा है. कच्चे तेल की कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर अहम महंगाई आंकड़ों पर है. उनके मुताबिक, जब तक सोना 4,500 डॉलर के नीचे रहता है, तब तक इसमें सतर्क रुख बना रह सकता है. 4,500 डॉलर के ऊपर टिकने पर कीमतों में स्थिरता लौट सकती है, जबकि 4,400 डॉलर से नीचे जाने पर गिरावट बढ़ सकती है और सोना 4,300 डॉलर तक फिसल सकता है.
उन्होंने कहा कि सोने के लिए 4,500 से 4,530 डॉलर के बीच पहला अहम रेजिस्टेंस है. इसके ऊपर निकलने पर अगला रेजिस्टेंस 4,600 से 4,630 डॉलर के बीच रहेगा. वहीं, 4,400 से 4,370 डॉलर के बीच पहला अहम सपोर्ट है. इसके बाद 4,300 से 4,270 डॉलर के बीच अगला सपोर्ट है.
सोने का RSI फिलहाल 51 पर है और 50 के न्यूट्रल स्तर के आसपास बना हुआ है. RSI में हल्की कमजोरी संकेत देती है कि सोने में तेजी की रफ्तार कुछ कम हुई है, हालांकि अभी इससे ट्रेंड में स्पष्ट बदलाव का संकेत नहीं मिलता.
कंपनी के अनुसार, नई सुविधा से भारतीय निर्यातकों को वर्चुअल अकाउंट, इंटरनेशनल कार्ड और स्थानीय पेमेंट सिस्टम के जरिए विदेशों से भुगतान स्वीकार करने में मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई जियो पेमेंट सॉल्यूशंस (Jio Payment Solutions) ने क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सेवा शुरू करने का ऐलान किया है. इसके जरिए भारतीय कारोबारी और निर्यातक दुनियाभर के ग्राहकों से अंतरराष्ट्रीय भुगतान स्वीकार कर सकेंगे. कंपनी को इस सेवा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट एग्रीगेटर (PA-CB) के रूप में काम करने की मंजूरी मिल चुकी है. यह मंजूरी निर्यात और आयात, दोनों तरह के लेनदेन को कवर करती है.
भारतीय कारोबारियों को विदेशी भुगतान लेने में मिलेगी सुविधा
कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन विक्रेता, डिजिटल बिजनेस, फ्रीलांसर, क्रिएटर और SaaS कंपनियां तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार कर रही हैं. ऐसे कारोबारों के लिए विदेशों से भुगतान लेना अभी कई अलग-अलग साझेदारों, मुद्राओं, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और मैनुअल मिलान की वजह से जटिल हो सकता है.
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस का कहना है कि उसका प्लेटफॉर्म इन प्रक्रियाओं को एक जगह लाने का प्रयास करता है. इसके तहत कारोबारी अलग-अलग देशों के ग्राहकों से उनकी स्थानीय मुद्रा और स्थानीय भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान स्वीकार कर सकेंगे. कंपनी के अनुसार, मल्टी-करेंसी वर्चुअल अकाउंट की सुविधा से खरीदारों को SWIFT या कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग नेटवर्क से गुजरने की जरूरत कम होगी.
करीब 50% भारतीय निर्यात बाजार को कवर करने का दावा
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस के अनुसार, उसकी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सेवाएं भारत के कुल निर्यात बाजार के करीब 50 फीसदी हिस्से को कवर करती हैं. शुरुआती चरण में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, UAE, सिंगापुर, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में स्थानीय मुद्रा में भुगतान स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध होगी. कंपनी ने कहा है कि आने वाले महीनों में लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के अन्य स्थानीय पेमेंट तरीकों को भी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा.
MSME से बड़े कारोबार तक के लिए कई विकल्प
नई सेवा में अलग-अलग कारोबारी जरूरतों के हिसाब से कई तरह के पेमेंट इंटीग्रेशन विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं. इनमें होस्टेड चेकआउट, पेमेंट लिंक, पेमेंट पेज, रिकरिंग इनवॉयसिंग, एम्बेडेड SDK, सुरक्षित एम्बेडेड पेमेंट स्क्रीन और व्हाइट-लेबल API शामिल हैं. इससे MSME, नए निर्यातकों और बड़े डिजिटल कारोबारों को अपने बिजनेस मॉडल के मुताबिक पेमेंट सिस्टम जोड़ने का विकल्प मिलेगा.
T+2 सेटलमेंट और बिना रोलिंग रिजर्व की सुविधा
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस के मुताबिक, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सेवा में पारदर्शी शुल्क और T+2 सेटलमेंट की सुविधा होगी. कंपनी ने कहा कि इसमें रोलिंग रिजर्व नहीं रखा जाएगा, जिससे कारोबारियों को प्रत्येक सेटलमेंट चक्र में पूरी राशि प्राप्त होगी और कैश फ्लो मैनेजमेंट आसान हो सकता है.
RBI के नियमों के मुताबिक सुरक्षा और अनुपालन
कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म को RBI के लागू दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है. इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोरेज और ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस ने कहा कि कारोबारियों को FIRA/eFIRA दस्तावेज उसी कार्यदिवस में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा अकाउंटिंग और पेमेंट रिकंसिलिएशन को आसान बनाने के लिए ऑडिट से जुड़े दस्तावेज भी डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराए जाएंगे.
Citi के साथ साझेदारी
क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट कारोबार के लिए JPSL ने Citi के साथ साझेदारी की है. Citi को ऑथराइज्ड डीलर कैटेगरी-1 और एक्सपोर्ट कलेक्शन अकाउंट सेवाओं के लिए जोड़ा गया है. कंपनी के मुताबिक, Citi का ग्लोबल क्लियरिंग नेटवर्क, ऑटोमेटेड कंप्लायंस चेकिंग और सेटलमेंट सिस्टम इस साझेदारी में अहम भूमिका निभाएगा.
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस के MD और CEO काशीनाथ हरिहरन ने कहा कि भारतीय कंपनियां वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं. ऐसे में कंपनी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय भुगतान में होने वाली जटिलताओं को कम करना और भुगतान स्वीकार करने, अनुपालन तथा संचालन को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है.
Citi की एशिया साउथ हेड ऑफ सर्विसेज मृदुला अय्यर ने कहा कि भारतीय कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद और सेवाएं बेचने की प्रक्रिया को आसान बनाना Citi India की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि Citi का वैश्विक क्लियरिंग नेटवर्क भारतीय निर्यातकों और डिजिटल कारोबारों को बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय भुगतान लेने में मदद कर सकता है.
ऑनलाइन और ऑफलाइन पेमेंट के बाद क्रॉस-बॉर्डर में विस्तार
जियो पेमेंट सॉल्यूशंस पहले से ऑनलाइन और फिजिकल पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) लेनदेन के लिए पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर काम कर रही है. क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सेवा शुरू होने के बाद कंपनी अब डिजिटल कॉमर्स, फिजिकल रिटेल और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स से जुड़े भुगतान समाधान भी उपलब्ध करा रही है.
बारिश थमने के साथ कोयला उत्पादन में तेज उछाल, 8 सितंबर को 1.91 मिलियन टन पहुंचा उत्पादन; बिजली क्षेत्र को सप्लाई 27 फीसदी बढ़कर 1.74 मिलियन टन प्रतिदिन हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति पर दबाव के बीच कोयला क्षेत्र से राहत की खबर सामने आई है. बारिश की रफ्तार कम होने के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयला उत्पादन और सप्लाई दोनों में तेजी कर दी है. 8 सितंबर को कंपनी का कुल कोयला उत्पादन 1.91 मिलियन टन रहा, जो सितंबर के शुरुआती तीन दिनों के औसत उत्पादन से करीब 40 फीसदी अधिक है. इसके साथ ही बिजली क्षेत्र को कोयले की दैनिक सप्लाई भी 27 फीसदी बढ़कर 1.74 मिलियन टन हो गई है.
बिजली घरों को सप्लाई में 27 फीसदी बढ़ोतरी
कोयला उत्पादन में तेजी का सीधा असर थर्मल पावर प्लांट्स को होने वाली सप्लाई पर पड़ा है. सितंबर की शुरुआत में बिजली क्षेत्र को रोजाना करीब 1.37 मिलियन टन कोयला भेजा जा रहा था, जो 8 सितंबर को बढ़कर 1.74 मिलियन टन प्रतिदिन हो गया. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब देश के 58 थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले के कम स्टॉक को लेकर बिजली उत्पादन पर दबाव की आशंका जताई गई थी.
NCL ने बढ़ाया उत्पादन
कोल इंडिया की सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. NCL ने 8 सितंबर को करीब 3 लाख टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि सितंबर की शुरुआत में उसका दैनिक उत्पादन लगभग 1.8 लाख टन था.
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण NCL की खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ था. बारिश कमजोर पड़ने के बाद खदानों से पानी निकालने और उत्पादन बहाल करने का काम तेज कर दिया गया. साथ ही खदानों के अंदर की सड़कों की मरम्मत कर कोयले को लोडिंग प्लांट और रेलवे साइडिंग तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी तेज की गई.
NCL के कुल कोयला उत्पादन का करीब 87 फीसदी हिस्सा बिजली क्षेत्र को जाता है. इसकी सप्लाई मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बिजली संयंत्रों को की जाती है. चालू वित्त वर्ष में 8 सितंबर तक NCL का उत्पादन 51.43 मिलियन टन और कुल सप्लाई करीब 55 मिलियन टन हो चुकी है.
देश में 123 मिलियन टन से ज्यादा कोयला उपलब्ध
बिजली संकट की आशंकाओं के बीच केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी देश में पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने की जानकारी दी है. उनके मुताबिक, खदानों, ट्रांजिट और थर्मल पावर प्लांट्स को मिलाकर देश में 123 मिलियन टन से अधिक कोयला उपलब्ध है.
इसमें करीब 100 मिलियन टन कोयला खदानों या ढुलाई के रास्ते में है, जबकि थर्मल पावर प्लांट्स के पास लगभग 23.7 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद है. सरकार का कहना है कि यह स्टॉक करीब 51 दिनों की बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.
बारिश कम होने से आगे और सुधर सकती है स्थिति
इस साल मॉनसून के कारण कोयला उत्पादन और बिजली क्षेत्र दोनों पर दबाव देखने को मिला. कई इलाकों में भारी बारिश से खदानों में पानी भरने के कारण उत्पादन और कोयले की ढुलाई प्रभावित हुई. वहीं, कम बारिश वाले इलाकों में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल के इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ी.
इसके अलावा उमस और गर्मी के कारण घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से भी बिजली खपत पर दबाव रहा. कम बारिश का असर हाइड्रो पावर उत्पादन पर भी पड़ा, जिससे थर्मल पावर पर निर्भरता बढ़ी.
ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, देश में बिजली की कमी रविवार को 19.57 मिलियन यूनिट रही. इससे पहले 5 सितंबर को बिजली की कमी 28 मिलियन यूनिट से अधिक दर्ज की गई थी.
बारिश की स्थिति में और सुधार होने के साथ कोयला उत्पादन, ढुलाई और बिजली संयंत्रों को सप्लाई में और तेजी आने की उम्मीद है. इससे आने वाले दिनों में थर्मल पावर प्लांट्स पर स्टॉक का दबाव कम हो सकता है और बिजली आपूर्ति की स्थिति भी बेहतर होने के आसार हैं.
बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 813.35 अंक गिरकर 74,764.23 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 03.60 अंक की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है. बुधवार को घरेलू बाजार में तेज गिरावट के बाद गुरुवार को भी कारोबार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं. प्री-मार्केट संकेतक गिफ्ट निफ्टी करीब 72 अंक फिसलकर 23,480.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं, Brent Crude 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. ऐसे में निवेशकों की नजर आज बाजार की शुरुआती चाल के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और ग्लोबल मार्केट के संकेतों पर रहेगी.
बुधवार को सेंसेक्स 813 अंक टूटा
बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. 30 शेयरों वाला बॉम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेकेस 813.35 अंक यानी 1.08 फीसदी गिरकर 74,764.23 के स्तर पर बंद हुआ. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 फीसदी की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ. बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा. BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 3.34 लाख करोड़ रुपये घटकर 4,84,30,038.16 करोड़ रुपये रह गया.
IT शेयरों में जोरदार गिरावट
बुधवार को IT शेयरों में खास तौर पर बिकवाली देखने को मिली. HCL Tech 4.55 फीसदी की गिरावट के साथ सेंसेक्स का सबसे कमजोर शेयर रहा. Infosys 4.34 फीसदी, Tech Mahindra 3.87 फीसदी, Wipro 2.62 फीसदी और TCS 2.26 फीसदी नीचे बंद हुए. वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता और कमजोर बाजार संकेतों के बीच IT शेयरों पर दबाव देखने को मिला.
Adani Enterprises समेत इन शेयरों में तेजी
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. Adani Enterprises 5.13 फीसदी की तेजी के साथ प्रमुख गेनर्स में रहा. Tata Steel 4.60 फीसदी, Max Healthcare 4.48 फीसदी और Adani Ports 3.80 फीसदी चढ़कर बंद हुए. दूसरी ओर HCL Tech के अलावा Infosys, Tech Mahindra, Wipro और TCS प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे.
अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद
बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई. Dow Jones Industrial Average 0.77 फीसदी गिरकर बंद हुआ. S&P 500 में 0.48 फीसदी और Nasdaq Composite में 0.64 फीसदी की गिरावट रही. अमेरिकी बाजारों की यह कमजोरी गुरुवार को एशियाई बाजारों के साथ भारतीय बाजार के सेंटीमेंट पर भी असर डाल सकती है.
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली
गुरुवार सुबह प्रमुख एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. जापान का Nikkei 225 करीब 0.99 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 1.70 फीसदी तक गिर गया. कमजोर अमेरिकी बाजार और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच एशियाई निवेशकों का सेंटीमेंट भी दबाव में रहा.
पश्चिम एशिया तनाव और महंगा क्रूड बनी बड़ी चिंता
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि सितंबर वायदा भाव 101.22 डॉलर प्रति बैरल रहा. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी चिंता का विषय है. महंगा क्रूड महंगाई पर दबाव बढ़ाने के साथ कंपनियों की लागत को भी प्रभावित कर सकता है.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुवार के कारोबार में Wipro, ICICI Bank, IRB Infrastructure Developers, Indian Bank, Shakti Pumps, Biocon, Juniper Green Energy, JK Paper और Mangalam Global Enterprise समेत कई शेयर अहम कॉरपोरेट अपडेट के चलते फोकस में रहेंगे. Wipro ने CrowdStrike के साथ मिलकर CISO Command Center लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य AI से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिमों से निपटना है. ICICI Bank को RBI से मंजूरी मिली है, जिसके तहत ICICI Prudential Asset Management Company को CSB Bank, DCB Bank, Kotak Mahindra Bank और AU Small Finance Bank में 9.95 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी गई है. IRB Infrastructure Developers का अगस्त 2026 का टोल रेवेन्यू सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 807.4 करोड़ रुपये हो गया. Indian Bank ने NSE के प्रस्तावित IPO में OFS के जरिए 15 लाख तक इक्विटी शेयर बेचने का प्रस्ताव रखा है. Shakti Pumps को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी से 10,000 ऑफ-ग्रिड सोलर फोटोवोल्टिक वॉटर पंपिंग सिस्टम की आपूर्ति के लिए करीब 235.92 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. Biocon में 1.65 करोड़ शेयरों की ब्लॉक डील करीब 638.37 करोड़ रुपये में हुई. Juniper Green Energy की सहायक कंपनी ने 75 MW विंड-सोलर हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट को पूरी तरह चालू कर दिया है, जिससे समूह की कुल ऑपरेशनल क्षमता करीब 2,604 MWp हो गई है. JK Paper ने Radhesham Wellpack की बची 20 फीसदी हिस्सेदारी करीब 44.02 करोड़ रुपये में खरीद ली है, जिसके बाद यह कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन गई है. वहीं, Mangalam Global Enterprise में Veloce Fintech ने करीब 3.57 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी, जबकि Chungath Karunakaran Padma Kumar ने करीब 3.78 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी.
आज बाजार के लिए क्या रहेगा अहम?
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर GIFT Nifty के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और ग्लोबल मार्केट के रुख पर रहेगी. बुधवार की तेज गिरावट के बाद अगर इन मोर्चों पर दबाव बना रहता है, तो घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. यह चौथी बार है जब भारत को इस समूह की अध्यक्षता मिली है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह अहम मंच इस बार वैश्विक विकास, सुरक्षा, तकनीक और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगा. भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. बता दें, भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी. यह चौथी बार है जब भारत को इस समूह की अध्यक्षता मिली है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है.
क्या है भारत की BRICS थीम?
भारत ने इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ यानी ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता’ को थीम बनाया है. सम्मेलन और पूरे साल आयोजित होने वाली गतिविधियों में इन्हीं चार क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है.
1. लचीलापन
इसके तहत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही आपदा प्रबंधन और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी.
2. नवाचार
तकनीक और इनोवेशन भी ब्रिक्स एजेंडे में अहम स्थान रखेंगे. स्टार्टअप्स, MSMEs, विज्ञान एवं तकनीक, रिसर्च, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर होगा.
3. सहयोग
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना भारत की अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं में है. इसके साथ ही वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे.
4. टिकाऊ विकास
क्लीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. भारत का जोर ऐसे विकास मॉडल पर है जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे.
पूरे साल हुईं 350 से ज्यादा बैठकें
भारत की ब्रिक्स (Brics Summit) अध्यक्षता केवल शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रही. पूरे साल अलग-अलग स्तरों पर 350 से ज्यादा बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए. इनमें विदेश मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, विभिन्न मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें शामिल हैं. इसके अलावा कई वर्किंग ग्रुप, बिजनेस फोरम और नागरिक समाज से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. इन बैठकों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश की गई.
सुरक्षा और आतंकवाद पर भी चर्चा
ब्रिक्स के एजेंडे में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे हैं. जून में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ सूचना तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. वहीं, मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और ब्रिक्स के भविष्य को लेकर रोडमैप पर विचार किया गया.
ग्लोबल साउथ पर भारत का फोकस
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के मुद्दों को प्रमुखता देने की कोशिश की है. किसानों, शहरों के विकास, कुशल कामगारों, महिला नेतृत्व वाले विकास, सस्ती ऊर्जा, पारंपरिक चिकित्सा और आपदा जोखिम कम करने जैसे विषयों को एजेंडे में जगह दी गई है. इसके अलावा ड्रग्स और भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
आम लोगों को भी BRICS से जोड़ने की कोशिश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने ब्रिक्स को केवल सरकारों और राजनयिकों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों और युवाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया है. इसके तहत ब्रिक्स सॉलिडेरिटी रन, फिल्म फेस्टिवल, ब्रिक्स बाजार और क्विज जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं. इन कार्यक्रमों के जरिए युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सांस्कृतिक संस्थाओं को भी ब्रिक्स मंच से जोड़ने की कोशिश की गई है.
क्यों अहम है BRICS Summit?
ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है. ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और भू-राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अहम अवसर होगा.
2007 से नवंबर 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव रहे थे राकेश मेहता, राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान भी संभाली थी जिम्मेदारी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश मेहता की नोएडा स्थित उनके आवास पर 6 सितंबर को कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई. उनकी उम्र करीब 75 वर्ष थी. मेहता दिल्ली के मुख्य सचिव के पद पर 2007 से नवंबर 2010 में अपनी सेवानिवृत्ति तक रहे थे. उनका कार्यकाल पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान रहा और इसी अवधि में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां और आयोजन भी हुआ था.
राकेश मेहता नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी में किराए के फ्लैट में रह रहे थे. घटना की सूचना पुलिस को डायल-112 के जरिए मिली. इसके बाद फेज-2 थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने बताया कि फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसके बाद उसे खोलकर पुलिसकर्मी अंदर दाखिल हुए.
घर से कथित सुसाइड नोट बरामद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को आवास से एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है. बताया जा रहा है कि इस नोट में 'मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं' का जिक्र किया गया है. घटना के बाद फोरेंसिक टीम ने फ्लैट की जांच की और कई साक्ष्य जुटाए.
घटना के समय राकेश मेहता की पत्नी सुमंती मेहता देहरादून में अपने बेटे के पास थीं. बताया गया कि मेहता ने उनकी कई कॉल का जवाब नहीं दिया, जिसके बाद पत्नी को चिंता हुई और उन्होंने सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड से मदद मांगी. नोएडा फेज-2 पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में कथित सुसाइड नोट, फोरेंसिक रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए अन्य साक्ष्यों को शामिल किया जा रहा है.
लोधी रोड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार
पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राकेश मेहता का शव उनके परिवार को सौंप दिया गया. सोमवार को दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान रहे दिल्ली के मुख्य सचिव
राकेश मेहता ने 2007 से नवंबर 2010 में सेवानिवृत्ति तक दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में काम किया. उनका कार्यकाल दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों और आयोजन के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा था. उस समय दिल्ली प्रशासन के सामने कई बड़े बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी थी. अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान मेहता ने दिल्ली सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया. वह दिल्ली नगर निगम के आयुक्त के पद पर भी रहे थे.
इस निवेश सौदे से पहले अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स की वैल्यूएशन करीब 18 अरब डॉलर आंकी गई है. यह निवेश कंपनी के एयरपोर्ट कारोबार के लिए एक अहम वैल्यूएशन बेंचमार्क भी तैयार करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी समूह (Adani Group) के एयरपोर्ट कारोबार को घरेलू और वैश्विक निवेशकों का बड़ा भरोसा मिला है. अडानी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड करीब 1 अरब डॉलर यानी 9,825 करोड़ रुपये की नई इक्विटी पूंजी जुटाने जा रही है. इस निवेश में ब्लैकरॉक, टेमासेक, प्रेमजी इन्वेस्ट और अल्फा वेव ग्लोबल जैसे बड़े निवेशक शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, यह रकम एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार, मौजूदा सुविधाओं के आधुनिकीकरण और एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं के विकास पर खर्च की जाएगी.
18 अरब डॉलर आंकी गई कंपनी की वैल्यूएशन
इस निवेश सौदे से पहले अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स की वैल्यूएशन करीब 18 अरब डॉलर आंकी गई है. यह निवेश कंपनी के एयरपोर्ट कारोबार के लिए एक अहम वैल्यूएशन बेंचमार्क भी तैयार करता है. कंपनी ने निवेशकों के समूह के साथ इसके लिए पक्के समझौते किए हैं. निवेश की पूरी रकम तीन चरणों में आएगी और अंतिम चरण जुलाई 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. सभी चरणों के पूरा होने के बाद इन निवेशकों के समूह के पास अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स में करीब 5.54 फीसदी हिस्सेदारी होगी.
एयरपोर्ट नेटवर्क और ‘एयरपोर्ट सिटी’ पर खर्च होगी रकम
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स इस पूंजी का इस्तेमाल अपने एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार और मौजूदा बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में करेगी. इसके साथ ही कंपनी एयरपोर्ट के आसपास ‘एयरपोर्ट सिटी’ विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है.
इन एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं में होटल, ऑफिस, रिटेल, मनोरंजन और अन्य कारोबारी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. पहले चरण में करीब 2.2 करोड़ वर्ग फुट क्षेत्र विकसित करने की योजना है. इसके अलावा, निवेश का एक हिस्सा ग्राउंड हैंडलिंग, यात्री सेवाओं और अन्य गैर-एविएशन कारोबार को बढ़ाने में लगाया जाएगा. इससे कंपनी को यात्री शुल्क के अलावा कमाई के नए स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है.
सालाना 20 करोड़ यात्रियों की क्षमता का लक्ष्य
अडानी समूह अपने एयरपोर्ट नेटवर्क की सालाना यात्री क्षमता को बढ़ाकर करीब 20 करोड़ करने की दिशा में काम कर रहा है. नए निवेश से इस विस्तार योजना को गति मिलने की उम्मीद है. एयरपोर्ट कारोबार में गैर-एविएशन आय बढ़ाने पर भी कंपनी का खास जोर है. एयरपोर्ट सिटी, रिटेल, होटल, ऑफिस और अन्य कमर्शियल गतिविधियों के विस्तार से कंपनी अपने एयरपोर्ट परिसरों को बड़े कारोबारी और ट्रांजिट हब के तौर पर विकसित करना चाहती है.
देश के बड़े निजी एयरपोर्ट ऑपरेटरों में शामिल
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स देश के सबसे बड़े निजी एयरपोर्ट ऑपरेटरों में शामिल है. कंपनी आठ एयरपोर्टों का संचालन करती है और देश के कुल यात्री यातायात में उसकी हिस्सेदारी 23 फीसदी से अधिक है.
कंपनी के पोर्टफोलियो में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलूरु समेत कई प्रमुख एयरपोर्ट शामिल हैं. नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी कंपनी की विस्तार रणनीति की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है.
25,000 से अधिक कारोबारी आगंतुकों वाला इंडिया इंटरनेशनल कार्गो शो अब मेस्से म्यूनचेन के लॉजिस्टिक्स पोर्टफोलियो का हिस्सा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बी2बी व्यापार मेलों के आयोजक मेस्से म्यूनचेन इंडिया ने इंडिया इंटरनेशनल कार्गो शो (IICS) का अधिग्रहण कर लिया है. यह अधिग्रहण अपस्ट्रीम बिजनेस सॉल्यूशंस एलएलपी से किया गया है. इस सौदे के बाद IICS को मेस्से म्यूनचेन इंडिया के मौजूदा लॉजिस्टिक्स पोर्टफोलियो के साथ जोड़ा जाएगा, जिसमें ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक इंडिया और एयर कार्गो इंडिया शामिल हैं. कंपनी 2027 में प्रोजेक्ट कार्गो इंडिया भी शुरू करने की तैयारी कर रही है.
इस कदम से मेस्से म्यूनचेन इंडिया का लक्ष्य भारत और दक्षिण एशिया में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए एक व्यापक और आपस में जुड़ा व्यापार मेला इकोसिस्टम तैयार करना है. नए पोर्टफोलियो में हवाई, समुद्री, रेल और सड़क परिवहन के साथ कार्गो हैंडलिंग, वेयरहाउसिंग और आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन से जुड़े कारोबार को एक मंच मिलेगा.
2025 में IICS में पहुंचे 25,000 से ज्यादा कारोबारी आगंतुक
इंडिया इंटरनेशनल कार्गो शो के 2025 संस्करण में 80 से अधिक देशों से 25,000 से ज्यादा कारोबारी आगंतुक पहुंचे थे. इस दौरान 15,000 वर्ग मीटर से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र में 200 से ज्यादा प्रदर्शक ब्रांडों ने हिस्सा लिया था.
पिछले चार वर्षों में IICS माल ढुलाई एजेंटों, एयरलाइंस, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों, टर्मिनलों, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन संचालकों, एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स कंपनियों, कार्गो हैंडलिंग और लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए एक प्रमुख कारोबारी मंच के रूप में विकसित हुआ है.
मेस्से म्यूनचेन के IMEA क्षेत्र के अध्यक्ष और मेस्से म्यूनचेन इंडिया के CEO भूपिंदर सिंह ने कहा कि IICS ने भारत के कार्गो और फ्रेट-फॉरवर्डिंग उद्योग के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं. उन्होंने कहा कि इसे कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल करने से बाजार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने और लॉजिस्टिक्स वैल्यू चेन के व्यापक हिस्से को एक समन्वित मंच से जोड़ने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि प्रत्येक आयोजन अपने अलग कारोबारी उद्देश्य और संबंधित उद्योग समुदाय पर केंद्रित रहेगा, जबकि सभी आयोजन एक व्यापक लॉजिस्टिक्स पोर्टफोलियो के तहत आपस में जुड़े रहेंगे.
भारत का बढ़ता विदेशी व्यापार बना बड़ा अवसर
IICS का यह विस्तार ऐसे समय हुआ है जब भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है और इसके साथ माल ढुलाई, कार्गो तथा आपूर्ति-श्रृंखला बुनियादी ढांचे की मांग भी बढ़ रही है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के 15 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 774.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस तरह देश का कुल वस्तु व्यापार करीब 1.22 ट्रिलियन डॉलर रहा.
वैश्विक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जुड़ेगा IICS
अधिग्रहण के बाद IICS मेस्से म्यूनचेन के अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा. इस नेटवर्क में म्यूनचेन के अलावा चीन, भारत, केन्या, सऊदी अरब, सिंगापुर, तुर्किये और अमेरिका में आयोजित होने वाले व्यापार मेले शामिल हैं.
मेस्से म्यूनचेन के CEO स्टीफन रमेल ने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बाजार है. उनके मुताबिक, IICS की फ्रेट-फॉरवर्डिंग और मल्टीमॉडल कार्गो क्षेत्र में मजबूत स्थानीय पहुंच को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ जोड़कर ग्राहकों और उद्योग के लिए दीर्घकालिक मूल्य तैयार किया जा सकेगा.
2026 में मुंबई में होगा IICS
ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक इंडिया और एयर कार्गो इंडिया का आयोजन फरवरी 2026 में मुंबई में किया गया था. वहीं, प्रोजेक्ट कार्गो इंडिया का पहला संस्करण 2027 में आयोजित किया जाएगा.
इंडिया इंटरनेशनल कार्गो शो का 2026 संस्करण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 2 से 4 दिसंबर 2026 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में आयोजित होगा. 2027 संस्करण की तारीखों और अन्य विवरणों की घोषणा बाद में की जाएगी.
अपस्ट्रीम बिजनेस सॉल्यूशंस एलएलपी के संस्थापक और CEO मोहित मेवानी ने कहा कि IICS अपनी मौजूदा पहचान, उद्योग संबंधों और केंद्रित स्वरूप को बनाए रखेगा. साथ ही, प्रदर्शकों और प्रतिभागियों को मेस्से म्यूनचेन के वैश्विक नेटवर्क, क्षेत्रीय विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ मिलेगा.
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़ा पोर्टफोलियो तैयार करने की रणनीति
मेस्से म्यूनचेन इंडिया ने 2007 में भारत में परिचालन शुरू किया था. कंपनी देश में 25 से अधिक प्रमुख बी2बी व्यापार मेलों का आयोजन करती है. इसके पोर्टफोलियो में इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण मशीनरी, पर्यावरण तकनीक, प्रयोगशाला एवं विश्लेषणात्मक तकनीक, फार्मास्युटिकल प्रोसेसिंग, पेय एवं डेयरी, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
IICS के अधिग्रहण और नए प्रोजेक्ट कार्गो इंडिया के साथ कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
शोधकर्ता का दावा- Anthropic और OpenAI बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के सेल्फ-इंप्रूविंग AI और सुपरइंटेलिजेंस की दिशा में तेजी से बढ़ रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी Anthropic के एक शोधकर्ता ने इस्तीफा देते हुए AI के तेजी से विकास को लेकर गंभीर चिंता जताई है. शोधकर्ता का कहना है कि Anthropic और उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी OpenAI ऐसे AI सिस्टम विकसित करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जो खुद अपनी क्षमताओं में सुधार कर सकेंगे. उनके मुताबिक, इन तकनीकों से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए अभी पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद नहीं हैं.
जैकोब कॉक्सन (Jacob Coxon) ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट की एक श्रृंखला में अपने इस्तीफे की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से Anthropic और OpenAI दोनों में प्री-ट्रेनिंग रिसर्च पर काम कर रहे थे. Coxon ने दोनों कंपनियों पर सेल्फ-इंप्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने की दिशा में गैर-जिम्मेदाराना तरीके से आगे बढ़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि AI उद्योग मौजूदा स्थिति में “हमारी जिंदगी के साथ जुआ खेल रहा है.”
AI कंपनियों के बीच बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
Coxon की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया की प्रमुख AI कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित करने की होड़ में हैं, जो लगातार अधिक जटिल और स्वायत्त कार्य कर सकें. इससे AI की सुरक्षा और उसके नियमन को लेकर बहस और तेज हो गई है. Coxon के अनुसार, आने वाले समय में उन्नत AI सिस्टम कई क्षेत्रों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन करने, कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश करने और संसाधनों व शक्ति तक पहुंच हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं. उनका तर्क है कि इतनी गंभीर संभावित चुनौतियों वाले तकनीकी विकास को केवल निजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. Coxon ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “दोनों कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं. वे सीधे सेल्फ-इंप्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही हैं और हमारी जिंदगी के साथ जुआ खेल रही हैं.”
क्या है प्री-ट्रेनिंग?
प्री-ट्रेनिंग AI मॉडल विकसित करने की शुरुआती प्रक्रिया है. इस चरण में मॉडल को बड़े पैमाने पर उपलब्ध डेटा से भाषा, तथ्यों, पैटर्न और अन्य संरचनाओं को सीखने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. इसके बाद मॉडल को विशेष कार्यों या एप्लिकेशन के लिए तैयार किया जाता है.
Coxon ने यह भी दावा किया कि Anthropic और OpenAI के कर्मचारियों के बीच AI के जोखिमों को लेकर सोच में अंतर है. उनके मुताबिक, OpenAI के कई कर्मचारियों ने अभी तक इन जोखिमों के “सभ्यतागत प्रभाव” को पूरी तरह नहीं समझा है. वहीं, Anthropic के कर्मचारी जोखिमों को समझते हैं, लेकिन उनका मानना है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगी, इसलिए उन्हें भी उन्नत AI विकसित करना जारी रखना होगा.
Anthropic ने खुद को AI सुरक्षा और AI Alignment पर विशेष ध्यान देने वाली कंपनी के रूप में पेश किया है. हालांकि, कंपनी ने Coxon के इस्तीफे और उनके आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. OpenAI ने भी उनके दावों पर टिप्पणी नहीं की है.
Anthropic के सुरक्षा शोधकर्ता ने भी जताई चिंता
Anthropic के Alignment Science Lead Evan Hubinger ने Coxon की कुछ चिंताओं का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कंपनी के भीतर AI से होने वाले संभावित विनाशकारी नुकसान के जोखिम को गंभीरता से लिया जाता है. Hubinger ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनका आकलन है कि अगले दशक में AI के कारण पूरी मानव आबादी के खत्म होने की संभावना 10 फीसदी से अधिक है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है और Anthropic का आधिकारिक अनुमान नहीं है.
उन्होंने कहा कि Anthropic इन जोखिमों से निपटने की कोशिश कर रही है, लेकिन सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम को मानव हितों और उद्देश्यों के अनुरूप रखने के लिए अभी कंपनी के पास कोई निश्चित समाधान नहीं है.
Hubinger ने Coxon की पोस्ट के जवाब में कहा, “मेरा मानना है कि Anthropic अपनी पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन हमारे पास अभी सुपरइंटेलिजेंस के लिए Alignment की समस्या हल करने की कोई योजना नहीं है और हम स्पष्ट रूप से उस दिशा में आगे भी नहीं बढ़ रहे हैं.”
AI कंपनियों के बीच समन्वय की जरूरत
Coxon का कहना है कि अधिक शक्तिशाली AI सिस्टम विकसित करने की वैश्विक होड़ को AI कंपनियों और संभवतः सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में ले जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि AI की क्षमताओं में सुधार को अस्थायी रूप से रोकना उन उपायों में शामिल हो सकता है, जिनसे ऐसी प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित किया जा सके जिससे कंपनियों के लिए पीछे हटना मुश्किल हो जाए.
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या शोधकर्ताओं को ऐसे Reinforcement Learning प्रयोगों में हिस्सा लेते रहना चाहिए, जिनमें बेहद शक्तिशाली AI सिस्टम तैयार किए जा रहे हों, जबकि उनके व्यवहार को समझने के लिए पर्याप्त कठोर शोध अभी उपलब्ध नहीं है.
Coxon का इस्तीफा ऐसे समय में AI कंपनियों के भीतर चल रही उस बहस को और सामने लाता है, जिसमें इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में खुद अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने वाले AI सिस्टम विकसित करने के साथ जुड़े जोखिमों को कैसे नियंत्रित किया जाए.
AI उद्योग में शोधकर्ता और अधिकारी लगातार यह चिंता जाहिर कर रहे हैं कि मौजूदा AI Alignment तकनीकें अधिक स्वायत्त और शक्तिशाली सिस्टम के विकास की रफ्तार के साथ तालमेल बिठा पाएंगी या नहीं.
Coxon ने सवाल उठाया कि केवल इसलिए AI विकास को लगातार तेज करते जाना कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां ऐसा कर रही हैं, क्या संभावित और अपरिवर्तनीय जोखिम उठाने के लिए पर्याप्त वजह हो सकती है.