18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग की और ग्लोबल साउथ को ‘रूल-टेकर’ से ‘रूल-शेपर’ बनाने पर जोर दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की जोरदार वकालत की. ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) समेत प्रमुख वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों की ‘फ्रंट रो’ में रहते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में ‘बैक रो’ में हैं. उन्होंने मौजूदा ‘विशेषाधिकार की पिरामिड व्यवस्था’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने का आह्वान किया.
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत
मोदी ने कहा कि वैश्विक शासन की मौजूदा व्यवस्थाओं को आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला ‘रूल-टेकर’ बने रहने के बजाय नियमों को आकार देने वाला ‘रूल-शेपर’ बनना चाहिए.
युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं की बातचीत एवं वार्ता क्षमता मजबूत करने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया. इसके तहत युवा अधिकारियों को बातचीत और नेगोशिएशन, व्यावहारिक नीति निर्माण और कानूनी विशेषज्ञता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया. इसका उद्देश्य वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की प्रभावी भागीदारी और बातचीत की क्षमता को मजबूत करना है.
समुद्री कर्मचारियों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क
मोदी ने वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने में सीफर्स यानी समुद्री कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संकट के समय अक्सर इन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती. प्रधानमंत्री ने ऐसे हालात में समुद्री कर्मचारियों की मदद के लिए ‘सीफर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा.
नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणा पत्र को अपनाया गया
सत्र के अंत में ब्रिक्स नेताओं ने नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स डिक्लेरेशन को अपनाया. इसमें समूह की साझा प्राथमिकताओं और भविष्य में सहयोग की दिशा तय की गई है. अपने संबोधन के समापन पर मोदी ने कहा कि जब भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए. उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के लिए ‘आवाज से प्रभाव’ और ‘विशेषाधिकार से साझेदारी’ की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया.
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार, डिजिटल इकोनॉमी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख पहलों का प्रस्ताव रखा. इनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), व्यापार और निवेश, डिजिटल इंडस्ट्री, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और विज्ञान एवं तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर है.
शी ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच ब्रिक्स देशों को अपने सहयोग की नींव मजबूत करनी होगी. इसके साथ ही उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ मिलकर अधिक एकीकृत बाजार, सुरक्षित औद्योगिक एवं सप्लाई चेन और नवाचार को बढ़ावा देना होगा.
ब्रिक्स AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी का प्रस्ताव
शी की पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर है. चीन ने ब्रिक्स एआई ओपन-सोर्स कम्युनिटी स्थापित करने में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है. इस पहल के तहत बड़े भाषा मॉडल (LLM) के विकास और इस्तेमाल, विशेष एआई सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक खुले इकोसिस्टम के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा.
शी ने कहा कि एआई का विकास लोगों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए. साथ ही, वैश्विक एआई गवर्नेंस के लिए सहमति आधारित व्यवस्था बनाने की दिशा में काम होना चाहिए, ताकि नई तकनीक का फायदा साझा समृद्धि में बदले.
व्यापार और निवेश को आसान बनाने पर जोर
दूसरी पहल व्यापार और निवेश को सुविधाजनक बनाने से जुड़ी है. चीन ने ब्रिक्स स्पेशल इकोनॉमिक जोन पार्टनरशिप स्थापित करने का सुझाव दिया है. शी के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत सदस्य देश नीतियों के बीच समन्वय के लिए एक इंटेलिजेंट पोर्टल स्थापित कर सकेंगे और सहयोग के नए अवसर तलाश सकेंगे. उन्होंने कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स फोरम ऑन ट्रेड इन सर्विसेज की मेजबानी करेगा और इसमें ब्रिक्स देशों की अधिक भागीदारी का आह्वान किया.
डिजिटल इकोनॉमी के लिए क्लाउड प्लेटफॉर्म
शी की तीसरी पहल डिजिटल इंडस्ट्री में सहयोग बढ़ाने से संबंधित है. चीन ब्रिक्स डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने की दिशा में काम करेगा. इसके साथ डिजिटल स्किल ट्रेनिंग, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों में डिजिटल इकोनॉमी के विकास और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है.
स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ेगा सहयोग
चौथी पहल स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की है. शी ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों को स्मार्ट फैक्ट्रियां स्थापित करने, मानक और नियम विकसित करने तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बदलाव और अपग्रेडेशन में मदद करने के लिए तैयार है. इस पहल के जरिए उन्नत विनिर्माण को औद्योगिक क्षमता के आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों के केंद्र में रखा गया है.
इंजीनियर और वैज्ञानिक प्रतिभाओं के विकास की योजना
पांचवीं पहल विज्ञान एवं तकनीकी प्रतिभाओं के विकास पर केंद्रित है. चीन ने ब्रिक्स इंजीनियर कल्टिवेशन अलायंस बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसके जरिए इंजीनियरों को संयुक्त रूप से प्रशिक्षित करने और उनकी दक्षता के मानकों को आपसी मान्यता देने की योजना है.
शी ने विज्ञान एवं तकनीकी नवाचार पर केंद्रित ब्रिक्स युवा विनिमय कार्यक्रम शुरू करने की भी घोषणा की. इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी प्रतिभाओं को विकसित करना है.
ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की अपील
अपने संबोधन में शी ने ग्लोबल साउथ से अंतरराष्ट्रीय मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने और बहुपक्षवाद, संप्रभु समानता तथा संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने विकासशील देशों की भागीदारी और आवाज बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई. साथ ही वैश्विक व्यापार संस्थानों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी का समर्थन किया.
शी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को औद्योगिक और सप्लाई चेन को स्थिर और सुचारु बनाए रखने, खुले सहयोग को बढ़ावा देने और एक बड़े एकीकृत बाजार के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने चीन की ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव और उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट एंड रोड सहयोग के लिए समर्थन भी दोहराया.
शी ने कहा कि इस साल चीन की आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ी 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत हुई है. उन्होंने कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाना और उच्च मानकों के साथ अर्थव्यवस्था को खोलना जारी रखेगा. उन्होंने ब्रिक्स देशों से सहयोग मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के लिए एक अधिक मजबूत मंच तैयार करने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया.
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में आयोजित कारोबारी बैठकों के तहत हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से इतर रामाफोसा के भारत दौरे के दौरान हुई कारोबारी बैठकों का हिस्सा थी. दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना था.
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की. यह बैठक 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में आयोजित कारोबारी बैठकों के तहत हुई.
भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच निवेश बढ़ाने पर जोर
रामाफोसा ने नई दिल्ली में Motherson Modules and Polymer Division के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टॉम जोसेफ से भी मुलाकात की. इन बैठकों के जरिए दक्षिण अफ्रीका भारत के साथ व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है.
BRICS बिजनेस फोरम में बोले रामाफोसा
इससे पहले शुक्रवार को रामाफोसा ने BRICS बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार के बदलते स्वरूप, तकनीकी प्रगति और जलवायु परिस्थितियों में बदलाव के कारण देशों और कंपनियों को अपनी सोर्सिंग, उत्पादन और निवेश से जुड़े फैसलों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है.रामाफोसा ने कहा कि BRICS के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है और बदलती वैश्विक परिस्थितियां ग्लोबल साउथ के लिए अधिक लचीली, विविध और समावेशी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने का अवसर हैं.
निजी क्षेत्र की भूमिका को बताया अहम
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने BRICS में आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि 2013 में दक्षिण अफ्रीका की पहली BRICS अध्यक्षता के दौरान BRICS Business Council की स्थापना की गई थी. रामाफोसा ने कहा कि आर्थिक सहयोग केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि BRICS बिजनेस फोरम में दक्षिण अफ्रीका की करीब 120 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं.
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी
दक्षिण अफ्रीका ने भारत के साथ आर्थिक सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए फार्मास्यूटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी वैल्यू चेन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की पहचान की है.
12-13 सितंबर को हो रहा BRICS Summit
रामाफोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं. भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. BRICS Business Forum में कारोबारी नेता, मंत्री और सदस्य देशों के प्रमुख व्यापार, निवेश, वित्त, तकनीक और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं.
अगस्त 2024 में लॉन्च हुए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का नेटवर्क करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंचा, Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार 25 गुना बढ़ा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फ्लिपकार्ट (Flipkart) की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स (Flipkart Minutes) ने लॉन्च के करीब दो साल में तेज विस्तार दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, अगस्त 2024 में शुरुआत के बाद से प्लेटफॉर्म की सालाना वृद्धि 4 गुना रही है. इसका नेटवर्क अब 150 से ज्यादा शहरों में करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंच गया है. कंपनी का कहना है कि इस अवधि में प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की संख्या 4 लाख से ज्यादा रही है. फ्लिपकार्ट मिनट्स के करीब 60 फीसदी ग्राहक दोबारा प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करते हैं. कंपनी के अनुसार, यह क्विक कॉमर्स के प्रति ग्राहकों की बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है.
टियर दो शहरों में 25 गुना बढ़ा ग्राहक आधार
फ्लिपकार्ट मिनट्स की ग्रोथ में छोटे शहरों की भूमिका तेजी से बढ़ी है. अंबाला, बाराबंकी, भागलपुर, दुर्गापुर, कानपुर, रुड़की, सिलीगुड़ी, सलेम और तिरुप्पुर जैसे Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार सालाना आधार पर करीब 25 गुना बढ़ा है. इन शहरों में ग्राहकों की मांग अब केवल रोजमर्रा की जरूरतों तक सीमित नहीं है. कोरियन नूडल्स, सॉस और रेडी-टू-ईट मील्स के अलावा प्रीमियम स्किनकेयर और पर्सनल केयर जैसे उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है.
Gen Z बना तेजी से बढ़ता ग्राहक वर्ग
प्लेटफॉर्म पर Gen Z ग्राहकों की संख्या पिछले 12 महीनों में सालाना आधार पर करीब 5 गुना बढ़ी है. ब्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, गेमिंग, वियरेबल्स, फ्रेगरेंस, हेल्थ एवं न्यूट्रिशन और ग्रूमिंग जैसी कैटेगरी में 45 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर Gen Z ग्राहकों से आ रहे हैं.
गॉरमेट कैटेगरी में भी हर तीन में से करीब एक ऑर्डर Gen Z ग्राहक कर रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि युवा ग्राहक क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल सिर्फ किराना और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और प्रीमियम उत्पादों की खरीदारी के लिए भी कर रहे हैं.
गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी में 8 गुना वृद्धि
कंपनी के मुताबिक, पिछले एक साल में लॉन्च की गई गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी कैटेगरी में 8 गुना वृद्धि हुई है. इनमें कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल, इम्पोर्टेड चीज, एवोकाडो की अंतरराष्ट्रीय किस्मों और कोरियन रेडी-टू-ईट मील्स जैसे उत्पाद शामिल हैं. वहीं, मेन्स ग्रूमिंग कैटेगरी में सालाना आधार पर करीब 6 गुना और पेट फूड कैटेगरी में 5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स पर अब तक का सबसे बड़ा एकल ऑर्डर 6 लाख रुपये का रहा, जिसमें पांच स्मार्टफोन शामिल थे. यह ऑर्डर दिखाता है कि क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल अब किराना और रोजमर्रा के सामान से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कैटेगरी में भी हो रहा है.
करीब 500 D2C ब्रांड्स जुड़े
अगस्त 2024 से अब तक फ्लिपकार्ट मिनट्स ने करीब 500 D2C ब्रांड्स को अपने पार्टनर इकोसिस्टम से जोड़ा है. कंपनी के अनुसार, इससे इन ब्रांड्स को हाइपरलोकल मांग और नए ग्राहक वर्गों तक पहुंचने का अवसर मिला है. किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ साझेदारी के जरिए प्लेटफॉर्म ने किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का माध्यम भी उपलब्ध कराया है. कंपनी का कहना है कि इससे किसानों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल रही है.
इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग पर जोर
फ्लिपकार्ट मिनट्स अपने डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. कंपनी के मुताबिक, माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर में बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. फल और सब्जियों की प्रमुख कैटेगरी में हल्की कम्पोस्टेबल और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग शुरू की गई है. इसका उद्देश्य वर्जिन प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड कुणाल गुप्ता ने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्लेटफॉर्म रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी से आगे बढ़कर कई अन्य कैटेगरी के उत्पादों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी देखने को मिल रहा है.
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया, कहा- BRICS का मकसद किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज और भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है.
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता शामिल हुए. BRICS चेयर के तौर पर उद्घाटन भाषण देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का असर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में इन देशों की भूमिका अभी भी सीमित है.
ग्लोबल साउथ को नियम बनाने में मिले बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसमें ताकत और निर्णय लेने की प्रक्रिया ऊपर के स्तर पर केंद्रित है. वहीं, नीचे के स्तर पर मौजूद देशों पर इन फैसलों का असर तो पड़ता है, लेकिन उन्हें फैसलों को आकार देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि अब इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक संस्थानों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’
मोदी ने BRICS को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ खड़ा होने वाला मंच नहीं है. इसका उद्देश्य सहयोग, संवाद और सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम करना होगा. उन्होंने सदस्य देशों से संगठन की एकता और आपसी सहमति को ठोस नतीजों में बदलने का आह्वान किया.
अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन को अपनी भूमिका और प्राथमिकताओं को और व्यापक बनाना होगा. मोदी के मुताबिक, BRICS देशों की सामूहिक ताकत का इस्तेमाल वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए किया जाना चाहिए.
मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर भी सहमति बनी. यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे सदस्य देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं.
इन मतभेदों के बावजूद भारत ने सदस्य देशों के बीच संवाद और आम सहमति बनाने पर जोर दिया. भारत की कोशिश BRICS की एकता बनाए रखने और अलग-अलग मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति का रास्ता तैयार करने की रही.
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था कि BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत करने के लिए भी प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक तीन चरणों में करेगा OMO बिक्री, RBI गवर्नर ने कहा- नकदी प्रबंधन के लिए सभी विकल्प खुले
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सितंबर में तीन चरणों में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के सरकारी बॉन्ड बेचने जा रहा है. केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत बॉन्ड बिक्री का यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी अधिशेष काफी बढ़ गया है.
RBI के इस कदम का मकसद सिस्टम में लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को बाहर निकालना है. इससे पहले अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए की गई लंबी अवधि की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी को बैंकों की ओर से सीमित प्रतिक्रिया मिली थी.
बैंकिंग सिस्टम में 10.43 लाख करोड़ रुपये का नकदी अधिशेष
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध अतिरिक्त नकदी 10.43 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, कोर लिक्विडिटी 13 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है.
केंद्रीय बैंक के मुताबिक, OMO बिक्री के जरिए लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को कम किया जाएगा, जबकि VRRR नीलामी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम अवधि की नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
RBI गवर्नर ने कहा- नकदी घटाने के कई विकल्प मौजूद
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास कई विकल्प मौजूद हैं. CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने OMO और स्वैप जैसे उपायों का जिक्र किया. उन्होंने संकेत दिया कि VRRR के जरिए नकदी कम करने से शायद ज्यादा मदद नहीं मिले.
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि बैंकों के नकदी आरक्षी अनुपात (CRR) में बदलाव की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि रियायती स्वैप विंडो के तहत जुटाई गई FCNR(B) जमा को CRR से छूट दी गई थी.
FCNR(B) जमा से बढ़ी सिस्टम में नकदी
बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी का एक बड़ा कारण बैंकों की ओर से जुटाई गई 127 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा है. इस अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से निकालने के लिए RBI अब OMO बिक्री का सहारा ले रहा है.
VRRR नीलामी में बैंकों की सीमित दिलचस्पी
शुक्रवार को हुई 26 दिन की VRRR नीलामी में बैंकों ने 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले सिर्फ 60,449 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. इसके मुकाबले चार दिन की VRRR नीलामी में 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के सामने 3.44 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं. मल्होत्रा के मुताबिक, RBI का मुख्य उद्देश्य मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य यानी वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को रेपो रेट के करीब बनाए रखना है.
WACR रेपो रेट से नीचे
ओवरनाइट WACR गुरुवार को 5.02 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि इससे पिछले सत्र में यह 4.98 प्रतिशत था. यह दर स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर के आसपास बनी हुई है. RBI गवर्नर के मुताबिक, सिस्टम में अतिरिक्त नकदी के कारण WACR पर दबाव बना हुआ है. अगर 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए WACR को 5.25 प्रतिशत की मौजूदा रेपो दर के करीब लाना अहम होगा.
बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
बाजार के कारोबारियों का मानना है कि RBI की ओर से बड़े पैमाने पर OMO के तहत बॉन्ड बेचने से सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है. बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने से उनकी कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका असर यील्ड में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे सकता है.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्नाटक सरकार अगले तीन वर्षों में करीब 100 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने 11 सितंबर को अपनी नई ‘Government First’ पहल की घोषणा की. इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर दिए जा सकेंगे, जिनके समाधान वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.
यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है, ताकि नई तकनीकों को वास्तविक सरकारी परिस्थितियों में परखा जा सके. सफल रहने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे सरकारी खरीद और बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिल सकेगा.
स्टार्टअप्स खुद भी दे सकेंगे समाधान
इस पहल की खास बात यह है कि स्टार्टअप्स को केवल सरकार की ओर से जारी चुनौतियों या समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. वे खुद भी अपने ऐसे समाधान सरकारी विभागों के सामने पेश कर सकेंगे, जो सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. यह ‘Startup-Initiated Route’ सरकारी विभागों की ओर से जारी किए जाने वाले औपचारिक चैलेंज के साथ समानांतर रूप से काम करेगा. इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए पहले से सरकारी विभागों के साथ काम करने का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा. इससे नए और छोटे स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार में प्रवेश आसान हो सकेगा.
पहल के तहत स्टार्टअप्स अपनी तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार यानी Intellectual Property Rights (IPR) भी अपने पास रख सकेंगे.
पायलट से सरकारी खरीद तक का रास्ता
इस योजना को केवल तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें ‘टेस्ट, वैलिडेट और प्रोक्योर’ मॉडल अपनाया जाएगा. तकनीकी मूल्यांकन और मंजूरी के बाद चुने गए समाधानों को सरकारी विभागों में पायलट के तौर पर लागू किया जाएगा.
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तय मानकों के आधार पर उसके नतीजों का आकलन किया जाएगा. सफल समाधान आगे परिणामों के मूल्यांकन, खरीद की सिफारिश, वर्क ऑर्डर जारी करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया से गुजर सकेंगे. अगर किसी समाधान से एक सरकारी विभाग में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो उसे दूसरे विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकेगा.
AI, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर फोकस
इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का फोकस शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट पर नहीं, बल्कि ऐसे समाधानों पर होगा जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. पायलट शुरू होने से पहले प्रस्तावित तकनीकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा.
तीन स्तरीय व्यवस्था से होगी निगरानी
कार्यक्रम की निगरानी के लिए तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाई गई है. इसमें Selection Committee, Technical Committee और Review Committee शामिल होंगी. Selection Committee स्टार्टअप्स के चयन और पायलट की मंजूरी से जुड़े काम देखेगी. Technical Committee तकनीक के क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी, जबकि Review Committee वित्तीय निगरानी से जुड़े मामलों को देखेगी.
सरकारी बाजार में स्टार्टअप्स की पहुंच बढ़ाने की कोशिश
इस पहल के तहत सरकारी विभाग अपनी जरूरतों और समस्याओं की पहचान कर स्टार्टअप्स के लिए समस्या विवरण जारी कर सकेंगे. वहीं, स्टार्टअप्स बिना किसी औपचारिक चैलेंज के भी अपने तैयार समाधान सरकार के सामने रख सकेंगे. सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना, नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और सरकारी सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार करना है. साथ ही, सफल तकनीकी समाधानों को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता तैयार किया जाएगा.
रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी EaseMyTrip के को-फाउंडर और प्रमोटर निशांत पिट्टी ने कंपनी में करीब 212 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर निजी इस्तेमाल के लिए गिरवी रखे हैं. स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, पिट्टी ने 24 अगस्त को 34.51 करोड़ शेयर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के पक्ष में गिरवी रखे.
कुल हिस्सेदारी का 8.66 फीसदी शेयर गिरवी
रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है. यानी इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सूचीबद्ध कंपनी के हित में नहीं किया जाएगा. गिरवी रखे गए शेयरों का मूल्य और लेनदेन में शामिल राशि, दोनों 211.92 करोड़ रुपये बताई गई हैं. इस सौदे में सिक्योरिटी कवर 1:1 है.
11.26 फीसदी हिस्सेदारी अब गिरवी
नए शेयर गिरवी रखने के बाद निशांत पिट्टी के पास कंपनी के 44.87 करोड़ शेयर गिरवी हो गए हैं. ये EaseMyTrip की कुल शेयर पूंजी का 11.26 फीसदी हिस्सा है. पिट्टी के पास कंपनी में कुल 11.39 फीसदी हिस्सेदारी है. इस तरह उनकी लगभग पूरी हिस्सेदारी अब गिरवी हो चुके हैं.
कंपनी के लिए नहीं लिया गया कर्ज
कंपनी की ओर से किए गए रेगुलेटरी डिस्क्लोजर में स्पष्ट किया गया है कि शेयर गिरवी रखने का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल है. इस कर्ज का इस्तेमाल EaseMyTrip के लाभ या कंपनी की जरूरतों के लिए नहीं किया जाएगा.
शेयर गिरवी रखना प्रमोटरों के लिए फंड जुटाने का एक तरीका है, हालांकि इससे उनकी हिस्सेदारी पर भार बढ़ता है और निवेशकों के लिए कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में करीब 45 अरब डॉलर का जबरदस्त इजाफा हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह भी इसमें 11.47 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
एक सप्ताह में 44.90 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था. इस तरह लगातार दूसरे सप्ताह देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज बढ़ोतरी हुई है.
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बड़ी तेजी
विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) का होता है. समीक्षाधीन सप्ताह में FCA 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गया. मार्च 2026 के अंत के मुकाबले FCA में 95.886 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि एक साल पहले की तुलना में यह 63.692 अरब डॉलर ज्यादा है.
सोने के भंडार में आई गिरावट
इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में गिरावट दर्ज की गई. सप्ताह के दौरान सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया. मार्च 2026 के अंत की तुलना में गोल्ड रिजर्व 1.580 अरब डॉलर कम है. हालांकि, सालाना आधार पर तस्वीर अलग है. एक साल पहले की तुलना में भारत का गोल्ड रिजर्व 23.517 अरब डॉलर बढ़ा है.
IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी मजबूत
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) में मामूली गिरावट आई है. समीक्षाधीन सप्ताह में SDRs 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गए. हालांकि, मार्च 2026 के अंत के मुकाबले इनमें 184 मिलियन डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 64 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई. यह मार्च के अंत से 108 मिलियन डॉलर और एक साल पहले के मुकाबले 168 मिलियन डॉलर अधिक है.
मार्च के मुकाबले करीब 95 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
कुल मिलाकर, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मार्च 2026 के अंत से 94.599 अरब डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 87.438 अरब डॉलर बढ़ चुका है. ताजा आंकड़ों के साथ देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 785 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है.
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीएम मोदी ने व्यापार की शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने का सुझाव मांगा, 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों से जोड़ने और 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जब दुनिया में व्यापारिक रुकावटें बढ़ रही हैं, तब भारत आर्थिक पुल बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल से व्यापार में आने वाली शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने के सुझाव देने को कहा.
नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, स्टार्टअप, एमएसएमई और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 2014 से भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है.
ब्रिक्स देशों के बीच स्टार्टअप और कंपनियों की साझेदारी पर जोर
पीएम मोदी ने हर साल कम से कम 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में मदद करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों की करीब 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी के अवसर तलाशने की बात कही.
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को मजबूत बनाए रखने के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सीफेरर्स यानी नाविकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है. भारत ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ का मजबूती से समर्थन करता है.
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए निवेश मंच का सुझाव
ब्रिक्स देशों के नेताओं ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निजी निवेश जुटाने के उद्देश्य से एक नया निवेश मंच बनाने का सुझाव भी दिया. ब्रिक्स देश विकास के लिए वित्त जुटाने, बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने और स्थानीय वित्तीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं. इसका एक प्रमुख उद्देश्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली पारंपरिक वित्तीय संस्थाओं पर निर्भरता कम करना है.
पुतिन बोले- ब्रिक्स की आर्थिक ताकत बढ़ रही
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा कि जी-7 देशों की आर्थिक और औद्योगिक ताकत कम हो रही है और इसकी जगह ब्रिक्स देशों की भूमिका बढ़ रही है. उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान बताया.
पुतिन ने निजी क्षेत्र से परियोजनाओं के लिए निवेश जुटाने वाले नए मंच के प्रस्ताव का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के पक्ष में हैं.”
रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों की कई सफल कंपनियों का उदाहरण भी दिया. इनमें भारत की महिंद्रा, चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, यूएई की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम शामिल हैं. उन्होंने आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में महिंद्रा के काम का भी उल्लेख किया.
व्यापार मार्गों और प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठा
पुतिन ने पाइपलाइन में रुकावट, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों को रोकने की कोशिश, समुद्री जहाजों को जब्त करने और प्रतिबंधों के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने प्रतिबंधों और एकतरफा फैसलों से पैदा हुई चुनौतियों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि ब्रिक्स के पास क्षमता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के आर्थिक हितों के लिए इस क्षमता का इस्तेमाल करने की महत्वाकांक्षा और साधन रखता है.
ईरान ने व्यापार और सप्लाई चेन मजबूत करने पर दिया जोर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने देश पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का जिक्र किया. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, सीमा पार बाजारों को आपस में जोड़ने और ऊर्जा, खाद्य तथा परिवहन की सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत बताई.
दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्रिक्स देशों के नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली पहुंचे, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान दोपहर में पहुंचे. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.
शुक्रवार शाम ब्रिक्स बिजनेस फोरम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन, पेजेश्कियान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. शनिवार को उनकी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ भी बैठक प्रस्तावित है.
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फार्मा कंपनी ग्रैन्यूल्स इंडिया (Granules India) के प्रमोटर डॉ. कृष्ण प्रसाद चिगुरुपति ने 11 सितंबर 2026 को कंपनी के 1.72 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की है. यह बिक्री ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक डील के जरिए की गई. करीब 1,160 करोड़ रुपये की इस डील के बाद कंपनी में चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी रह गई है.
872.50 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हुई बिक्री
चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर बिक्री का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के जारी प्रेफरेंशियल इश्यू की दूसरी किस्त के लिए फंड जुटाना है.
विस्तार योजनाओं के लिए जुटाया जा रहा फंड
ग्रैन्यूल्स इंडिया अपनी विस्तार योजनाओं और कारोबार के अगले चरण की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है. चिगुरुपति द्वारा अपनी मौजूदा हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री को इसी फंडिंग प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है. इस बिक्री से प्रमोटर ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा मोनेटाइज किया है, ताकि कंपनी की पूंजी जुटाने की जरूरतों में योगदान दिया जा सके.
प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी घटी
शेयर बिक्री के बाद चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी हो गई. वहीं, ग्रैन्यूल्स इंडिया में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी भी 38.02 फीसदी से घटकर 31.08 फीसदी रह गई है.
1.33 करोड़ शेयरों की ब्लॉक डील
चिगुरुपति द्वारा बेचे गए 1.72 करोड़ शेयरों में से करीब 1.33 करोड़ शेयर शुरुआती ब्लॉक डील में हाथ बदले. बाकी शेयरों की बिक्री भी ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक ट्रांजैक्शन के जरिए की गई.
कंपनी से पूरी तरह बाहर नहीं हुए प्रमोटर
इस हिस्सेदारी बिक्री के बावजूद चिगुरुपति ग्रैन्यूल्स इंडिया से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं. उनके पास अभी भी कंपनी की 24.06 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में यह सौदा प्रमोटर के एग्जिट के बजाय कंपनी की विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.