फ्लिपकार्ट मिनट्स की 4 गुना ग्रोथ, 150 से ज्यादा शहरों में पहुंचा नेटवर्क; Gen Z की बढ़ी हिस्सेदारी

अगस्त 2024 में लॉन्च हुए क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का नेटवर्क करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंचा, Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार 25 गुना बढ़ा

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Saturday, 12 September, 2026
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फ्लिपकार्ट (Flipkart) की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स (Flipkart Minutes) ने लॉन्च के करीब दो साल में तेज विस्तार दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, अगस्त 2024 में शुरुआत के बाद से प्लेटफॉर्म की सालाना वृद्धि 4 गुना रही है. इसका नेटवर्क अब 150 से ज्यादा शहरों में करीब 1,200 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर तक पहुंच गया है. कंपनी का कहना है कि इस अवधि में प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों की संख्या 4 लाख से ज्यादा रही है.  फ्लिपकार्ट मिनट्स के करीब 60 फीसदी ग्राहक दोबारा प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करते हैं. कंपनी के अनुसार, यह क्विक कॉमर्स के प्रति ग्राहकों की बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है.

टियर दो शहरों में 25 गुना बढ़ा ग्राहक आधार

फ्लिपकार्ट मिनट्स की ग्रोथ में छोटे शहरों की भूमिका तेजी से बढ़ी है. अंबाला, बाराबंकी, भागलपुर, दुर्गापुर, कानपुर, रुड़की, सिलीगुड़ी, सलेम और तिरुप्पुर जैसे Tier-2+ शहरों में ग्राहक आधार सालाना आधार पर करीब 25 गुना बढ़ा है. इन शहरों में ग्राहकों की मांग अब केवल रोजमर्रा की जरूरतों तक सीमित नहीं है. कोरियन नूडल्स, सॉस और रेडी-टू-ईट मील्स के अलावा प्रीमियम स्किनकेयर और पर्सनल केयर जैसे उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है.

Gen Z बना तेजी से बढ़ता ग्राहक वर्ग

प्लेटफॉर्म पर Gen Z ग्राहकों की संख्या पिछले 12 महीनों में सालाना आधार पर करीब 5 गुना बढ़ी है. ब्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, गेमिंग, वियरेबल्स, फ्रेगरेंस, हेल्थ एवं न्यूट्रिशन और ग्रूमिंग जैसी कैटेगरी में 45 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर Gen Z ग्राहकों से आ रहे हैं.

गॉरमेट कैटेगरी में भी हर तीन में से करीब एक ऑर्डर Gen Z ग्राहक कर रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि युवा ग्राहक क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल सिर्फ किराना और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और प्रीमियम उत्पादों की खरीदारी के लिए भी कर रहे हैं.

गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी में 8 गुना वृद्धि

कंपनी के मुताबिक, पिछले एक साल में लॉन्च की गई गॉरमेट और स्पेशियलिटी ग्रॉसरी कैटेगरी में 8 गुना वृद्धि हुई है. इनमें कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल, इम्पोर्टेड चीज, एवोकाडो की अंतरराष्ट्रीय किस्मों और कोरियन रेडी-टू-ईट मील्स जैसे उत्पाद शामिल हैं. वहीं, मेन्स ग्रूमिंग कैटेगरी में सालाना आधार पर करीब 6 गुना और पेट फूड कैटेगरी में 5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

फ्लिपकार्ट मिनट्स पर अब तक का सबसे बड़ा एकल ऑर्डर 6 लाख रुपये का रहा, जिसमें पांच स्मार्टफोन शामिल थे. यह ऑर्डर दिखाता है कि क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल अब किराना और रोजमर्रा के सामान से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कैटेगरी में भी हो रहा है.

करीब 500 D2C ब्रांड्स जुड़े

अगस्त 2024 से अब तक फ्लिपकार्ट मिनट्स ने करीब 500 D2C ब्रांड्स को अपने पार्टनर इकोसिस्टम से जोड़ा है. कंपनी के अनुसार, इससे इन ब्रांड्स को हाइपरलोकल मांग और नए ग्राहक वर्गों तक पहुंचने का अवसर मिला है. किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ साझेदारी के जरिए प्लेटफॉर्म ने किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का माध्यम भी उपलब्ध कराया है. कंपनी का कहना है कि इससे किसानों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल रही है.

इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग पर जोर

फ्लिपकार्ट मिनट्स अपने डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. कंपनी के मुताबिक, माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर में बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. फल और सब्जियों की प्रमुख कैटेगरी में हल्की कम्पोस्टेबल और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग शुरू की गई है. इसका उद्देश्य वर्जिन प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना है.

फ्लिपकार्ट मिनट्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड कुणाल गुप्ता ने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्लेटफॉर्म रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी से आगे बढ़कर कई अन्य कैटेगरी के उत्पादों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी देखने को मिल रहा है.

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‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’, PM मोदी बोले- अब नियम मानने वाला नहीं, नियम बनाने वाला बने ग्लोबल साउथ

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया, कहा- BRICS का मकसद किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलना है.

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Published - Saturday, 12 September, 2026
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Saturday, 12 September, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज और भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है.

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत सदस्य देशों के नेता शामिल हुए. BRICS चेयर के तौर पर उद्घाटन भाषण देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी चुनौतियों का असर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में इन देशों की भूमिका अभी भी सीमित है.

ग्लोबल साउथ को नियम बनाने में मिले बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसमें ताकत और निर्णय लेने की प्रक्रिया ऊपर के स्तर पर केंद्रित है. वहीं, नीचे के स्तर पर मौजूद देशों पर इन फैसलों का असर तो पड़ता है, लेकिन उन्हें फैसलों को आकार देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि अब इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक संस्थानों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’

मोदी ने BRICS को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि BRICS किसी देश या समूह के खिलाफ खड़ा होने वाला मंच नहीं है. इसका उद्देश्य सहयोग, संवाद और सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम करना होगा. उन्होंने सदस्य देशों से संगठन की एकता और आपसी सहमति को ठोस नतीजों में बदलने का आह्वान किया.

अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन को अपनी भूमिका और प्राथमिकताओं को और व्यापक बनाना होगा. मोदी के मुताबिक, BRICS देशों की सामूहिक ताकत का इस्तेमाल वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए किया जाना चाहिए.

मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर भी सहमति बनी. यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे सदस्य देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं.

इन मतभेदों के बावजूद भारत ने सदस्य देशों के बीच संवाद और आम सहमति बनाने पर जोर दिया. भारत की कोशिश BRICS की एकता बनाए रखने और अलग-अलग मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति का रास्ता तैयार करने की रही.

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था कि BRICS को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत करने के लिए भी प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.


RBI का बड़ा कदम: सितंबर में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बॉन्ड बेचेगा, सिस्टम से घटाएगा अतिरिक्त नकदी

बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक तीन चरणों में करेगा OMO बिक्री, RBI गवर्नर ने कहा- नकदी प्रबंधन के लिए सभी विकल्प खुले

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Published - Saturday, 12 September, 2026
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Saturday, 12 September, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सितंबर में तीन चरणों में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के सरकारी बॉन्ड बेचने जा रहा है. केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत बॉन्ड बिक्री का यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब बैंकिंग सिस्टम में नकदी अधिशेष काफी बढ़ गया है.

RBI के इस कदम का मकसद सिस्टम में लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को बाहर निकालना है. इससे पहले अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए की गई लंबी अवधि की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी को बैंकों की ओर से सीमित प्रतिक्रिया मिली थी.

बैंकिंग सिस्टम में 10.43 लाख करोड़ रुपये का नकदी अधिशेष

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध अतिरिक्त नकदी 10.43 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, कोर लिक्विडिटी 13 लाख करोड़ से 14 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है.

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, OMO बिक्री के जरिए लंबी अवधि की अतिरिक्त नकदी को कम किया जाएगा, जबकि VRRR नीलामी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम अवधि की नकदी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

RBI गवर्नर ने कहा- नकदी घटाने के कई विकल्प मौजूद

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक के पास कई विकल्प मौजूद हैं. CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने OMO और स्वैप जैसे उपायों का जिक्र किया. उन्होंने संकेत दिया कि VRRR के जरिए नकदी कम करने से शायद ज्यादा मदद नहीं मिले.

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि बैंकों के नकदी आरक्षी अनुपात (CRR) में बदलाव की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि रियायती स्वैप विंडो के तहत जुटाई गई FCNR(B) जमा को CRR से छूट दी गई थी.

FCNR(B) जमा से बढ़ी सिस्टम में नकदी

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी का एक बड़ा कारण बैंकों की ओर से जुटाई गई 127 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा है. इस अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से निकालने के लिए RBI अब OMO बिक्री का सहारा ले रहा है.

VRRR नीलामी में बैंकों की सीमित दिलचस्पी

शुक्रवार को हुई 26 दिन की VRRR नीलामी में बैंकों ने 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले सिर्फ 60,449 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. इसके मुकाबले चार दिन की VRRR नीलामी में 5 लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के सामने 3.44 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं. मल्होत्रा के मुताबिक, RBI का मुख्य उद्देश्य मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य यानी वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को रेपो रेट के करीब बनाए रखना है.

WACR रेपो रेट से नीचे

ओवरनाइट WACR गुरुवार को 5.02 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि इससे पिछले सत्र में यह 4.98 प्रतिशत था. यह दर स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर के आसपास बनी हुई है. RBI गवर्नर के मुताबिक, सिस्टम में अतिरिक्त नकदी के कारण WACR पर दबाव बना हुआ है. अगर 5 से 7 अक्टूबर को होने वाली अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए WACR को 5.25 प्रतिशत की मौजूदा रेपो दर के करीब लाना अहम होगा.

बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर

बाजार के कारोबारियों का मानना है कि RBI की ओर से बड़े पैमाने पर OMO के तहत बॉन्ड बेचने से सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है. बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने से उनकी कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका असर यील्ड में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे सकता है.


कर्नाटक 100 स्टार्टअप्स को देगा 25 करोड़ रुपये की मदद, सरकारी विभागों में होगा टेक्नोलॉजी का पायलट

यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है.

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Saturday, 12 September, 2026
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कर्नाटक सरकार अगले तीन वर्षों में करीब 100 स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने 11 सितंबर को अपनी नई ‘Government First’ पहल की घोषणा की. इसके तहत ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों में अपनी तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चलाने के लिए 25 लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर दिए जा सकेंगे, जिनके समाधान वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार हैं.

यह पहल कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी 2025-30 के तहत विशेष पहल के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स और सरकारी विभागों के बीच सीधे सहयोग का रास्ता तैयार करना है, ताकि नई तकनीकों को वास्तविक सरकारी परिस्थितियों में परखा जा सके. सफल रहने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स को आगे सरकारी खरीद और बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिल सकेगा.

स्टार्टअप्स खुद भी दे सकेंगे समाधान

इस पहल की खास बात यह है कि स्टार्टअप्स को केवल सरकार की ओर से जारी चुनौतियों या समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. वे खुद भी अपने ऐसे समाधान सरकारी विभागों के सामने पेश कर सकेंगे, जो सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. यह ‘Startup-Initiated Route’ सरकारी विभागों की ओर से जारी किए जाने वाले औपचारिक चैलेंज के साथ समानांतर रूप से काम करेगा. इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए पहले से सरकारी विभागों के साथ काम करने का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा. इससे नए और छोटे स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार में प्रवेश आसान हो सकेगा.

पहल के तहत स्टार्टअप्स अपनी तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार यानी Intellectual Property Rights (IPR) भी अपने पास रख सकेंगे.

पायलट से सरकारी खरीद तक का रास्ता

इस योजना को केवल तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें ‘टेस्ट, वैलिडेट और प्रोक्योर’ मॉडल अपनाया जाएगा. तकनीकी मूल्यांकन और मंजूरी के बाद चुने गए समाधानों को सरकारी विभागों में पायलट के तौर पर लागू किया जाएगा.

पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तय मानकों के आधार पर उसके नतीजों का आकलन किया जाएगा. सफल समाधान आगे परिणामों के मूल्यांकन, खरीद की सिफारिश, वर्क ऑर्डर जारी करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया से गुजर सकेंगे. अगर किसी समाधान से एक सरकारी विभाग में अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो उसे दूसरे विभागों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकेगा.

AI, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर फोकस

इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, हेल्थकेयर, कृषि, शिक्षा और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का फोकस शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट पर नहीं, बल्कि ऐसे समाधानों पर होगा जिन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. पायलट शुरू होने से पहले प्रस्तावित तकनीकों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा.

तीन स्तरीय व्यवस्था से होगी निगरानी

कार्यक्रम की निगरानी के लिए तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाई गई है. इसमें Selection Committee, Technical Committee और Review Committee शामिल होंगी. Selection Committee स्टार्टअप्स के चयन और पायलट की मंजूरी से जुड़े काम देखेगी. Technical Committee तकनीक के क्रियान्वयन और तय लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी, जबकि Review Committee वित्तीय निगरानी से जुड़े मामलों को देखेगी.

सरकारी बाजार में स्टार्टअप्स की पहुंच बढ़ाने की कोशिश

इस पहल के तहत सरकारी विभाग अपनी जरूरतों और समस्याओं की पहचान कर स्टार्टअप्स के लिए समस्या विवरण जारी कर सकेंगे. वहीं, स्टार्टअप्स बिना किसी औपचारिक चैलेंज के भी अपने तैयार समाधान सरकार के सामने रख सकेंगे. सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाना, नई तकनीकों को तेजी से अपनाना और सरकारी सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता में सुधार करना है. साथ ही, सफल तकनीकी समाधानों को अलग-अलग विभागों में बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता तैयार किया जाएगा.


EaseMyTrip के को-फाउंडर निशांत पिट्टी ने 212 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रखे, निजी इस्तेमाल के लिए लिया कर्ज

रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है.

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Published - Saturday, 12 September, 2026
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Saturday, 12 September, 2026
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ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी EaseMyTrip के को-फाउंडर और प्रमोटर निशांत पिट्टी ने कंपनी में करीब 212 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर निजी इस्तेमाल के लिए गिरवी रखे हैं. स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी के मुताबिक, पिट्टी ने 24 अगस्त को 34.51 करोड़ शेयर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के पक्ष में गिरवी रखे.

कुल हिस्सेदारी का 8.66 फीसदी शेयर गिरवी

रेगुलेटरी डिस्क्लोजर के अनुसार, गिरवी रखे गए 34.51 करोड़ शेयर EaseMyTrip की कुल चुकता शेयर पूंजी का 8.66 फीसदी हैं. इस लेनदेन का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल बताया गया है. यानी इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सूचीबद्ध कंपनी के हित में नहीं किया जाएगा. गिरवी रखे गए शेयरों का मूल्य और लेनदेन में शामिल राशि, दोनों 211.92 करोड़ रुपये बताई गई हैं. इस सौदे में सिक्योरिटी कवर 1:1 है.

11.26 फीसदी हिस्सेदारी अब गिरवी

नए शेयर गिरवी रखने के बाद निशांत पिट्टी के पास कंपनी के 44.87 करोड़ शेयर गिरवी हो गए हैं. ये EaseMyTrip की कुल शेयर पूंजी का 11.26 फीसदी हिस्सा है. पिट्टी के पास कंपनी में कुल 11.39 फीसदी हिस्सेदारी है. इस तरह उनकी लगभग पूरी हिस्सेदारी अब गिरवी हो चुके हैं.

कंपनी के लिए नहीं लिया गया कर्ज

कंपनी की ओर से किए गए रेगुलेटरी डिस्क्लोजर में स्पष्ट किया गया है कि शेयर गिरवी रखने का उद्देश्य प्रमोटर का निजी इस्तेमाल है. इस कर्ज का इस्तेमाल EaseMyTrip के लाभ या कंपनी की जरूरतों के लिए नहीं किया जाएगा.

शेयर गिरवी रखना प्रमोटरों के लिए फंड जुटाने का एक तरीका है, हालांकि इससे उनकी हिस्सेदारी पर भार बढ़ता है और निवेशकों के लिए कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.
 


विदेशी मुद्रा भंडार में 45 अरब डॉलर का उछाल, पहली बार 785 अरब डॉलर के पार

RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था.

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Published - Saturday, 12 September, 2026
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Saturday, 12 September, 2026
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में करीब 45 अरब डॉलर का जबरदस्त इजाफा हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह भी इसमें 11.47 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.

एक सप्ताह में 44.90 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

RBI के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़ा. इससे पहले 28 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में यह 740.80 अरब डॉलर था. इस तरह लगातार दूसरे सप्ताह देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज बढ़ोतरी हुई है.

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बड़ी तेजी

विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) का होता है. समीक्षाधीन सप्ताह में FCA 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गया. मार्च 2026 के अंत के मुकाबले FCA में 95.886 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि एक साल पहले की तुलना में यह 63.692 अरब डॉलर ज्यादा है.

सोने के भंडार में आई गिरावट

इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व में गिरावट दर्ज की गई. सप्ताह के दौरान सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया. मार्च 2026 के अंत की तुलना में गोल्ड रिजर्व 1.580 अरब डॉलर कम है. हालांकि, सालाना आधार पर तस्वीर अलग है. एक साल पहले की तुलना में भारत का गोल्ड रिजर्व 23.517 अरब डॉलर बढ़ा है.

IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी मजबूत

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) में मामूली गिरावट आई है. समीक्षाधीन सप्ताह में SDRs 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गए. हालांकि, मार्च 2026 के अंत के मुकाबले इनमें 184 मिलियन डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 64 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई. यह मार्च के अंत से 108 मिलियन डॉलर और एक साल पहले के मुकाबले 168 मिलियन डॉलर अधिक है.

मार्च के मुकाबले करीब 95 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

कुल मिलाकर, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मार्च 2026 के अंत से 94.599 अरब डॉलर और एक साल पहले की तुलना में 87.438 अरब डॉलर बढ़ चुका है. ताजा आंकड़ों के साथ देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 785 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है.

 


व्यापार की बढ़ती रुकावटों के बीच भारत बना रहा ‘आर्थिक पुल’, ब्रिक्स देशों से पीएम मोदी ने कहा- बाधाएं करें कम

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीएम मोदी ने व्यापार की शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने का सुझाव मांगा, 100 ब्रिक्स स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों से जोड़ने और 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 12 September, 2026
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Saturday, 12 September, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जब दुनिया में व्यापारिक रुकावटें बढ़ रही हैं, तब भारत आर्थिक पुल बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल से व्यापार में आने वाली शीर्ष 10 बाधाओं को दूर करने के सुझाव देने को कहा.

नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, स्टार्टअप, एमएसएमई और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 2014 से भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है.

ब्रिक्स देशों के बीच स्टार्टअप और कंपनियों की साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी ने हर साल कम से कम 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों में विस्तार करने में मदद करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों की करीब 1,000 कंपनियों के बीच साझेदारी के अवसर तलाशने की बात कही.

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को मजबूत बनाए रखने के लिए समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सीफेरर्स यानी नाविकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है. भारत ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ का मजबूती से समर्थन करता है.

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए निवेश मंच का सुझाव

ब्रिक्स देशों के नेताओं ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निजी निवेश जुटाने के उद्देश्य से एक नया निवेश मंच बनाने का सुझाव भी दिया. ब्रिक्स देश विकास के लिए वित्त जुटाने, बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने और स्थानीय वित्तीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं. इसका एक प्रमुख उद्देश्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली पारंपरिक वित्तीय संस्थाओं पर निर्भरता कम करना है.

पुतिन बोले- ब्रिक्स की आर्थिक ताकत बढ़ रही

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा कि जी-7 देशों की आर्थिक और औद्योगिक ताकत कम हो रही है और इसकी जगह ब्रिक्स देशों की भूमिका बढ़ रही है. उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान बताया.

पुतिन ने निजी क्षेत्र से परियोजनाओं के लिए निवेश जुटाने वाले नए मंच के प्रस्ताव का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के पक्ष में हैं.”

रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों की कई सफल कंपनियों का उदाहरण भी दिया. इनमें भारत की महिंद्रा, चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, यूएई की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम शामिल हैं. उन्होंने आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में महिंद्रा के काम का भी उल्लेख किया.

व्यापार मार्गों और प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठा

पुतिन ने पाइपलाइन में रुकावट, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों को रोकने की कोशिश, समुद्री जहाजों को जब्त करने और प्रतिबंधों के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए.

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि ब्रिक्स देशों ने प्रतिबंधों और एकतरफा फैसलों से पैदा हुई चुनौतियों को नए अवसरों में बदलने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि ब्रिक्स के पास क्षमता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वह अपने लोगों के आर्थिक हितों के लिए इस क्षमता का इस्तेमाल करने की महत्वाकांक्षा और साधन रखता है.

ईरान ने व्यापार और सप्लाई चेन मजबूत करने पर दिया जोर

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने देश पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का जिक्र किया. उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, सीमा पार बाजारों को आपस में जोड़ने और ऊर्जा, खाद्य तथा परिवहन की सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत बताई.

दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है. सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्रिक्स देशों के नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली पहुंचे, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान दोपहर में पहुंचे. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.

शुक्रवार शाम ब्रिक्स बिजनेस फोरम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन, पेजेश्कियान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. शनिवार को उनकी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ भी बैठक प्रस्तावित है.
 


ग्रैन्यूल्स इंडिया के प्रमोटर चिगुरुपति ने बेचे 1.72 करोड़ शेयर, हिस्सेदारी घटकर 24.06%

चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 12 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
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फार्मा कंपनी ग्रैन्यूल्स इंडिया (Granules India) के प्रमोटर डॉ. कृष्ण प्रसाद चिगुरुपति ने 11 सितंबर 2026 को कंपनी के 1.72 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की है. यह बिक्री ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक डील के जरिए की गई. करीब 1,160 करोड़ रुपये की इस डील के बाद कंपनी में चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी रह गई है.

872.50 रुपये के फ्लोर प्राइस पर हुई बिक्री

चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया के शेयर 872.50 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेचे. इस आधार पर पूरी ब्लॉक डील का मूल्य करीब 1,160 करोड़ रुपये रहा. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शेयर बिक्री का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के जारी प्रेफरेंशियल इश्यू की दूसरी किस्त के लिए फंड जुटाना है.

विस्तार योजनाओं के लिए जुटाया जा रहा फंड

ग्रैन्यूल्स इंडिया अपनी विस्तार योजनाओं और कारोबार के अगले चरण की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में है. चिगुरुपति द्वारा अपनी मौजूदा हिस्सेदारी के एक हिस्से की बिक्री को इसी फंडिंग प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है. इस बिक्री से प्रमोटर ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा मोनेटाइज किया है, ताकि कंपनी की पूंजी जुटाने की जरूरतों में योगदान दिया जा सके.

प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी घटी

शेयर बिक्री के बाद चिगुरुपति की व्यक्तिगत हिस्सेदारी 31 फीसदी से घटकर 24.06 फीसदी हो गई. वहीं, ग्रैन्यूल्स इंडिया में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी भी 38.02 फीसदी से घटकर 31.08 फीसदी रह गई है.

1.33 करोड़ शेयरों की ब्लॉक डील

चिगुरुपति द्वारा बेचे गए 1.72 करोड़ शेयरों में से करीब 1.33 करोड़ शेयर शुरुआती ब्लॉक डील में हाथ बदले. बाकी शेयरों की बिक्री भी ओपन मार्केट में बल्क और ब्लॉक ट्रांजैक्शन के जरिए की गई.

कंपनी से पूरी तरह बाहर नहीं हुए प्रमोटर

इस हिस्सेदारी बिक्री के बावजूद चिगुरुपति ग्रैन्यूल्स इंडिया से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं. उनके पास अभी भी कंपनी की 24.06 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में यह सौदा प्रमोटर के एग्जिट के बजाय कंपनी की विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.
 


टोल प्लाजा पर नहीं लगेगा ब्रेक! बैरियर-फ्री टोलिंग से 10,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है राजमार्ग संग्रह: गडकरी

गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 12 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार देश में टोलिंग व्यवस्था को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम के विस्तार से न सिर्फ वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने से राहत मिलेगी, बल्कि राजमार्गों से होने वाले टोल संग्रह में भी करीब 10,000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

फरवरी-मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री टोलिंग का लक्ष्य

गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में कहा कि उनका मंत्रालय फरवरी-मार्च 2027 तक MLFF टोलिंग सिस्टम के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों को बैरियर-फ्री बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2026 तक देश के 60-70 फीसदी टोल प्लाजा पर MLFF व्यवस्था लागू किए जाने की उम्मीद है.

82,589 करोड़ रुपये पहुंचा टोल संग्रह

देश में डिजिटल टोल संग्रह का दायरा तेजी से बढ़ा है. 2,000 से अधिक टोल प्लाजा पर डिजिटल माध्यम से होने वाला टोल संग्रह वित्त वर्ष 2017 में 660.67 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 64,603.12 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 82,589.9 करोड़ रुपये हो गया.

टोल संचालन की लागत में भी आएगी कमी

गडकरी के मुताबिक, MLFF लागू होने से टोल प्लाजा के संचालन और रखरखाव की लागत मौजूदा 12-15 फीसदी से घटकर सिर्फ 2-3 फीसदी रह सकती है. इससे सरकार को करीब 6,000-7,000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.

10 सेकंड या उससे कम होगा इंतजार

गडकरी ने कहा कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों को 12 से 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था. तकनीक के इस्तेमाल से इसमें 80-90 फीसदी तक सुधार हुआ है और अब सरकार इसे घटाकर 10 सेकंड या उससे भी कम करने की कोशिश कर रही है. इससे वाहन चालकों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.

हर साल 71 करोड़ घंटे और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचने का अनुमान

मंत्री के अनुसार, टोलिंग तकनीक को तेजी से अपनाने से हर साल करीब 71 करोड़ घंटे का समय और 56 करोड़ लीटर ईंधन बचाया जा सकता है. ईंधन की बचत का अनुमानित मूल्य करीब 5,250 करोड़ रुपये है, जबकि बचाए गए समय की आर्थिक कीमत करीब 68,500 करोड़ रुपये आंकी गई है.

सरकार को हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये का फायदा

गडकरी ने कहा कि NETC FASTag और मौजूदा टोलिंग व्यवस्था को देखें तो केंद्र सरकार को अकेले सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से हर साल 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है. उन्होंने इसे तकनीकी नवाचार का परिणाम बताया.
 


भारत-रूस की दोस्ती को नई आर्थिक उड़ान, 2030 तक 100 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की. यह मुलाकात BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले हुई.

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Published - Saturday, 12 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति देने पर जोर दिया गया. भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए रेलवे, स्टील, परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद और कुशल भारतीय कामगारों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी है.

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की. यह मुलाकात BRICS Summit 2026 से एक दिन पहले हुई. बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के साथ नए व्यापारिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई.

2030 तक 100 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य

भारत और रूस के बीच मौजूदा सालाना द्विपक्षीय कारोबार करीब 60 अरब डॉलर है. इसमें रूस से भारत को होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है. अब दोनों देश अगले चार वर्षों में कारोबार को करीब 40 अरब डॉलर बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर के स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों को व्यापार में लगातार दोहरे अंकों की सालाना वृद्धि की जरूरत होगी. इसके लिए नए कारोबारी क्षेत्रों की पहचान, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और रूस में भारतीय उत्पादों की मौजूदगी बढ़ाने पर फोकस किया जा सकता है.

रेलवे और स्टील सेक्टर में बढ़ेगा सहयोग

भारत-रूस आर्थिक साझेदारी में औद्योगिक सहयोग को भी अहम माना जा रहा है. नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच नए कारोबारी रिश्ते विकसित करने के मंच के तौर पर देखा जा रहा है.

रेलवे, टनल निर्माण और स्टील की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर जोर है. साथ ही दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे बिजनेस अवसर बढ़ाने और रूस के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है.

परमाणु ऊर्जा में साझेदारी होगी मजबूत

भारत और रूस के बीच सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भी तैयारी है. इसमें परमाणु ईंधन की आपूर्ति के साथ न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए लंबे समय तक तकनीकी और अन्य जरूरी सहयोग शामिल हो सकता है.

रूस में बढ़ सकते हैं भारतीय स्किल्ड वर्कर्स

बैठक में कुशल भारतीय कामगारों के रूस जाने का मुद्दा भी सामने आया. दोनों देश ऐसा सिस्टम विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे ज्यादा भारतीय स्किल्ड वर्कर्स को रूस में रोजगार के अवसर मिल सकें. इससे एक ओर रूस की कुशल श्रम की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है, वहीं भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं.

क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ेगा फोकस

क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और रूस इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इसका मकसद रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत करना हो सकता है.

खाद की सप्लाई भी एजेंडे में

भारत और रूस के आर्थिक संबंधों में फर्टिलाइजर यानी खाद की सप्लाई भी महत्वपूर्ण है. दोनों देशों के बीच खाद की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है. इसके लिए रणनीतिक ज्वाइंट वेंचर और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर काम की संभावनाएं हैं.

डिजिटल करेंसी और नए क्षेत्रों में सहयोग

भारत-रूस के आर्थिक रिश्ते अब पारंपरिक रक्षा और ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देश व्यापार, उद्योग, डिजिटल भुगतान, सप्लाई चेन, परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं. अगर 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में दोनों देश सफल रहते हैं, तो इससे भारत-रूस आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम मिल सकता है.

 


BRICS में व्यापार बढ़ाने का भारत का प्लान, UPI और लोकल करेंसी से पेमेंट सिस्टम जोड़ने का प्रस्ताव

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार अधिक मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए.

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Published - Friday, 11 September, 2026
Last Modified:
Friday, 11 September, 2026
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भारत ने BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए बाजारों को अधिक खोलने, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाने के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए.

बाजार खोलने और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार अधिक मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन ऐसी होनी चाहिए जो दोनों दिशाओं में काम करे और व्यापार के विस्तार में बाधा न बने.

गोयल ने BRICS देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजारों को अधिक खुला बनाने की अपील की. इसमें कच्चे माल और जरूरी खनिज यानी क्रिटिकल मिनरल्स भी शामिल हैं. उन्होंने व्यापार नियमों को सरल बनाने और कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत बताई.

टैरिफ से बड़ी चुनौती गैर-टैरिफ बाधाएं

गोयल ने कहा कि व्यापार में सिर्फ आयात शुल्क यानी टैरिफ ही चुनौती नहीं है. जटिल नियम, मंजूरियां और दूसरी प्रक्रियाएं भी कारोबार की लागत बढ़ाती हैं. उन्होंने BRICS देशों के बीच ऐसी गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की जरूरत बताई, ताकि कंपनियों के लिए दूसरे देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करना आसान हो सके.

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है. गोयल के मुताबिक, BRICS देश दुनिया के करीब एक चौथाई व्यापार का हिस्सा हैं. ये देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं.

UPI और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का प्रस्ताव

गोयल ने सीमा पार कारोबार में डिजिटल पेमेंट और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात भी कही. उन्होंने भारत के UPI को इसका उदाहरण बताते हुए BRICS सदस्य और पार्टनर देशों से अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की अपील की.

उन्होंने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहिए. इससे सीमा पार भुगतान की प्रक्रिया आसान हो सकती है और पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.

गोयल के मुताबिक, भारत में UPI पर हर साल 250 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन होते हैं. उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुनिया के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.

प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान करने की जरूरत

गोयल ने BRICS देशों के बीच प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में प्रोफेशनल डिग्री और योग्यताओं को मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सर्विस सेक्टर में व्यापार को भी वास्तविक रूप से खोलने की जरूरत है. इससे एक देश के प्रोफेशनल्स को दूसरे BRICS देशों में काम करने और सेवाएं देने के अधिक अवसर मिल सकते हैं.

ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में सहयोग की संभावनाएं

गोयल ने कहा कि भारत के पास BRICS देशों में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं. इसके अलावा कृषि, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और सर्विस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने इन क्षेत्रों में नई तकनीक और इनोवेशन के लिए साझेदारी बढ़ाने की जरूरत बताई. गोयल ने BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ने का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि एग्री-टेक कंपनियां मिलकर किसानों के लिए नई तकनीक और समाधान विकसित कर सकती हैं. खाद्य सुरक्षा को भी BRICS देशों के बीच सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है.