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FY26 में 7.4% की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: NSO का पहला अग्रिम अनुमान
NSO का पहला अग्रिम अनुमान बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था FY26 में मजबूत बनी रहेगी, लेकिन रफ्तार में धीरे-धीरे सुस्ती आएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए अपना पहला अग्रिम अनुमान जारी करते हुए कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की दर से बढ़ सकती है. यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 6.5 फीसदी की वृद्धि से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है. वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी दबावों के बावजूद यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर इशारा करता है. हालांकि, इस बार ग्रोथ के आंकड़ों को बेहद कम जीडीपी डिफ्लेटर का सहारा मिला है, जो करीब पांच दशक के निचले स्तर 0.5 फीसदी पर आ गया है.
नॉमिनल जीडीपी की सुस्त चाल बढ़ा रही चिंता
NSO के अनुसार, FY26 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि सिर्फ 8 फीसदी रहने का अनुमान है, जो कोविड प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 के बाद सबसे धीमी गति है. खास बात यह है कि नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बीच का अंतर सिर्फ 60 आधार अंक रह गया है, जो 2011-12 के बाद सबसे कम है. इसका सीधा मतलब है कि महंगाई का असर काफी कम हो गया है और कीमतों में नरमी का दौर जारी है.
दूसरी छमाही में सुस्त पड़ेगी रफ्तार
अगर 7.4 फीसदी की अनुमानित वास्तविक जीडीपी वृद्धि को देखें तो इसका अर्थ है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही (अक्टूबर से मार्च) में ग्रोथ घटकर 6.9 फीसदी रह सकती है, जबकि पहली छमाही में यह 8 फीसदी रही थी. यह संकेत देता है कि साल के आगे बढ़ने के साथ आर्थिक रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है.
अनुमानों में आगे हो सकता है संशोधन
NSO ने बताया कि ये अग्रिम अनुमान दिसंबर तक उपलब्ध चुनिंदा आर्थिक संकेतकों और अक्टूबर-नवंबर के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़ों पर आधारित हैं. फरवरी से 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाए जाने के बाद इन आंकड़ों में संशोधन संभव है.
GVA ग्रोथ 7.3%, टैक्स का योगदान सीमित
FY26 में सकल मूल्य वर्धन (GVA) के 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इसका मतलब है कि शुद्ध अप्रत्यक्ष करों का योगदान इस बार सीमित रहने वाला है.
बजट अनुमान से काफी कम है नॉमिनल ग्रोथ
सरकार ने FY26 के लिए बजट में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था, जबकि NSO का ताजा अनुमान इससे काफी नीचे 8 फीसदी का है. इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी तक सीमित रखना बहुत मुश्किल नहीं होगा.
टैक्स कलेक्शन पर पड़ेगा असर: HDFC बैंक
एचडीएफसी बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का कहना है कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कमजोर रहने और आयकर व जीएसटी में कटौती के चलते सरकार के राजस्व में करीब 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये की कमी हो सकती है. हालांकि, खर्च में कुछ कटौती और RBI से मिलने वाला डिविडेंड इस नुकसान की भरपाई में मदद कर सकता है.
सेक्टर-वाइज ग्रोथ: हर जगह दिख रही सुस्ती
NSO के आंकड़ों के अनुसार :
कृषि क्षेत्र : पूरे साल में 3.1% ग्रोथ का अनुमान, जबकि पहली छमाही में 3.6% थी
विनिर्माण क्षेत्र : पूरे साल 7% ग्रोथ, पहली छमाही में 8.4%
सेवाएं क्षेत्र : 9.1% की मजबूत वृद्धि का अनुमान, हालांकि पहली छमाही में 9.3% थी
निर्माण क्षेत्र : पूरे साल 7% ग्रोथ का अनुमान
निवेश और खपत का हाल
1. सकल स्थिर पूंजी निर्माण : FY26 में 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जिसे सरकारी पूंजीगत खर्च का सहारा मिलेगा
2. निजी खपत : 7% ग्रोथ का अनुमान है, जो पहली छमाही के 7.5% से कम है
3. सरकारी खर्च : 5.2% की तेज वृद्धि का अनुमान है, जो राज्यों के ज्यादा खर्च का संकेत देता है
निर्यात से मिलेगी कुछ राहत
FY26 में निर्यात के 6.4 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इसमें सेवा निर्यात की मजबूती और वस्तु निर्यात की स्थिरता से वैश्विक अनिश्चितताओं के असर को कुछ हद तक कम करने की उम्मीद है. क्रिसिल के मुताबिक आने वाले वर्षों में नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी ग्रोथ की दिशा अलग हो सकती है. क्रिलिव की रिपोर्ट के अनुसार नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ फिर से 10.5 से 11 फीसदी के लंबे औसत की ओर लौट सकती है, जबकि वास्तविक जीडीपी ग्रोथ घटकर करीब 6.7 फीसदी रह सकती है. वहीं, इंडिया रेटिंग्स के अनुसार FY27 में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी के आसपास रह सकती है.
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