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कोविड के बाद भारतीय CEO ने की करोड़ों की कमाई, सैलरी में हुआ इतना इजाफा
कोरोना वायरस महामारी के बाद भारतीय CEO की बहुत मौज हो गई है. इनकी सालान कमाई 40 प्रतिशत तक बढ़कर करीब 14 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
कोरोना के बाद देश के हर वर्ग ने आर्थिक संकटों का सामना किया. व्यापार से लेकर नौकरीपेशा तक हर किसी को आर्थिक संकट से जूझना पड़ा, किसी को व्यापार में नुकसान हुआ, तो किसी के वेतन में कटौती हुई. वहीं कोविड महामारी खत्म होने के बाद जब देश धीरे धीरे इस संकट से उबरने लगा है, तो इसका सबसे अधिक लाभ भारतीय सीईओ (CEO) को मिला है. आपको बता दें, भारतीय सीईओ की सैलरी में कोरोना के बाद काफी बढ़ोतरी हुई है. Deloitte की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) की औसत सैलरी 13.8 करोड़ रुपये है, जो कि कोविड-19 से पहले की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है. इनकी सैलरी में इंसेंटिव्स का भी काफी ज्यादा योगदान है.
प्रमोटर सीईओ की ज्यादा सैलरी
प्रोफेशनल सीईओ के मुकाबले प्रमोटर सीईओ की सैलरी ज्यादा है. दरअसल, प्रमोटर सीईओ का कार्यकाल प्रोफेशनल सीईओ की तुलना में ज्यादातर लंबा होता है. प्रमोटर सीईओ की तुलना में प्रोफेशनल सीईओ ज्यादा बार बदलते हैं. डेलॉइट इंडिया के सीएचआरओ प्रोग्राम लीडर के पार्टनर आनंदोरूप घोष ने कहा कि प्रमोटर सीईओ के कंपनसेशन की रेंज बहुत बड़ी है और यह ज्यादा औसत को प्रभावित करती है. जो CEOs प्रमोटर परिवार के सदस्य भी हैं, उन्हें औसतन 16.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है.
50 प्रतिशत से ज्यादा 'पे-एट-रिस्क'
सीईओ के कंपनसेशन में बढ़ोतरी के बावजूद टारगेट कंपनसेशन का 50 प्रतिशत से ज्यादा 'पे-एट-रिस्क' है. प्रोफेशनल सीईओ के लिए पे-एट-रिस्क 57 प्रतिशत पर है, जो प्रमोटर सीईओ के 47 प्रतिशत की तुलना में बहुत ज्यादा है. प्रोफेशनल सीईओ को उनकी सैलरी का 25 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म इंसेंटिव के माध्यम से दिया जाता है. इसका ज्यादातर कंपनियों में शेयर-लिंक्ड इंसेंटिव के जरिए भुगतान किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में सीईओ के सैलरी स्ट्रक्चर में बहुत ज्यादा सिंगल डिजिट वार्षिक बढ़ोतरी दर देखी गई है.
ऐसे होता है इनकी परफॉर्मेंस का आंकलन
सीईओ और सीएक्सओ के परफॉरमेंस का आकलन करते समय ज्यादातर कंपनियां एक ओवरऑल स्कोरकार्ड का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल मैट्रिक्स और लक्ष्य शामिल होते हैं. हालांकि, सीईओ और सीएक्सओ के लिए इंसेंटिव्स अभी भी कंपनी के फाइनेंशियल गोल्स पर ज्यादा निर्भर करता है.
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पिछले 5 सालों में इतने प्रतिशत सीईओ बदले
लॉन्ग टर्म इन्सेंटिव्स के तहत शेयर-बेस्ड इंसेंटिव्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है. यह 2020 में 63 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इस दौरान स्टॉक ऑप्शन या ईएसओपी (ESOPs) में गिरावट जारी है. यह 2020 में 68 प्रतिशत से कम होकर 2024 में 49 प्रतिशत पहुंच गया है. इस बीच BSE 200 कंपनियों (PSUs को छोड़कर) में सीईओ बदलने के एनालिसिस से पता चलता है कि पिछले 5 सालों में 45 प्रतिशत कंपनियों में सीईओ बदले हैं. इस दौरान प्रत्येक 10 नए सीईओ में से 6 कंपनी के स्टाफ से, जबकि बाकी 4 बाहर से अपॉइंट किए गए थे.
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