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भारत–EU एविएशन डील: सेफ्टी, मैन्युफैक्चरिंग और ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बूस्ट
समझौते के तहत कर्नाटक में एयरबस हेलीकॉप्टर्स के H125/AS350 मॉडल की असेंबली की योजना बनाई गई है. यह प्रोजेक्ट भारत और EU के बीच एयरोस्पेस सहयोग को नई दिशा देगा. साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हुआ नया एविएशन समझौता देश के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. इस डील से न सिर्फ विमानन सुरक्षा मानकों में सुधार होगा, बल्कि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में भी बड़ी मजबूती मिलेगी. खास बात यह है कि इसके तहत कर्नाटक में हेलिकॉप्टर असेंबली जैसी बड़ी परियोजनाओं को भी गति मिलेगी.
वैश्विक मानकों की ओर बढ़ता भारत
भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) के बीच हुआ यह समझौता विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने पर केंद्रित है. इसके जरिए भारत में बनने वाले एविएशन उत्पाद अब वैश्विक मानकों के अनुरूप होंगे, जिससे निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे.
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा नया बल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस डील से देश में एविएशन मैन्युफैक्चरिंग को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यूरोपीय तकनीक और मानकों के साथ उत्पादन होने से भारतीय कंपनियों को नई तकनीकी क्षमता और बेहतर गुणवत्ता हासिल होगी. इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी और भारत निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनेगा.
कर्नाटक में हेलिकॉप्टर असेंबली की तैयारी
समझौते के तहत कर्नाटक में एयरबस हेलीकॉप्टर्स के H125/AS350 मॉडल की असेंबली की योजना बनाई गई है. यह प्रोजेक्ट भारत और EU के बीच एयरोस्पेस सहयोग को नई दिशा देगा. साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी.
EU-India समिट के बाद तेज हुआ सहयोग
जनवरी 2026 में हुई EU-India समिट के बाद दोनों पक्षों ने एविएशन सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए सहयोग बढ़ाने का फैसला किया था. यह समझौता उसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में और भी साझेदारियां देखने को मिल सकती हैं.
नई दिल्ली में वर्कशॉप, साझा हुए अनुभव
समझौते पर 23 मार्च को हस्ताक्षर के बाद 24 से 26 मार्च तक नई दिल्ली में एक क्षेत्रीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया. इसमें एविएशन रेगुलेटर्स, एयरलाइंस और इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. इस दौरान परिचालन अनुभव साझा किए गए और सेक्टर की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई.
सेफ्टी, ग्रोथ और ग्लोबल हब बनने की दिशा
यह पहल भारत और EU के बीच नियामकीय सहयोग को मजबूत करेगी. साथ ही, उच्च सुरक्षा मानकों और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील भारत को वैश्विक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है.
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