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डिफेंस सेक्टर में भारत होगा आत्मनिर्भर, DRDO को मिले हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स
भारत के डिफेंस सेक्टर में यह निवेश और तकनीकी विकास देश को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर शक्ति बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत अब रक्षा तकनीक और हथियार निर्माण में विदेशी निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने हाल के वर्षों में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) को भारी फंडिंग दी है. इस वित्तीय सहायता से कई नई मिसाइलें, ड्रोन और आधुनिक इंजन जैसे कावेरी डेरिवेटिव इंजन (KDE) का निर्माण हो रहा है, जो बिना पायलट वाले स्ट्राइक ड्रोन को शक्ति देगा.
DRDO को मिले 29,558 करोड़ रुपये, तीन वर्षों का ब्योरा
पिछले तीन सालों में DRDO को कुल 29,558 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं मिली हैं, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं.
- 2023 में : 40 प्रोजेक्ट्स के लिए 3,842 करोड़ रुपये
- 2024 में : 43 प्रोजेक्ट्स के लिए 22,175 करोड़ रुपये
- 2025 में अब तक : 20 प्रोजेक्ट्स के लिए 3,540 करोड़ रुपये
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन निवेशों का इस्तेमाल नई मिसाइल, ड्रोन, और अत्याधुनिक इंजनों के विकास में किया जा रहा है. खासतौर पर कावेरी डेरिवेटिव इंजन (KDE) के दो प्रोजेक्ट्स पर करीब 723 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो स्ट्राइक ड्रोन की ताकत बढ़ाएंगे.
ऑपरेशन सिंधूर और स्वदेशी हथियारों की भूमिका
भारत ने ऑपरेशन सिंधूर के दौरान "मेड इन इंडिया" हथियारों से पाकिस्तान में भारी तबाही मचाई थी. इसी ऑपरेशन ने पाकिस्तान की तरफ से हुए हमलों को भी नाकाम किया था. इस सफलता के बाद से सरकार ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देना शुरू किया है ताकि भविष्य में देश को किसी भी विदेशी निर्भरता से बचाया जा सके.
रक्षा तकनीक के तेजी से विकास के लिए नए कदम
रक्षा मंत्रालय ने कई अहम कदम उठाए हैं जिससे रक्षा क्षेत्र की तकनीक तेजी से विकसित होगी:
- देश की कंपनियों को प्रोटोटाइप से लेकर सीधे उत्पादन तक लाने की सुविधा दी जाएगी, ताकि विदेशी आयात कम हो सके.
- DRDO ने देश के IIT और विश्वविद्यालयों में 15 नए रिसर्च सेंटर स्थापित किए हैं, जहां सीधे रक्षा तकनीक पर काम किया जाएगा.
- DRDO की पेटेंट तकनीकों का मुफ्त उपयोग कंपनियां कर सकेंगी, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा.
- ड्रोन और छोटे विमान दोनों के लिए सिविल और सेना के लिए समान सर्टिफिकेट प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे उद्योगों को लाभ होगा.
- DRDO की टेस्टिंग लैब्स अब प्राइवेट कंपनियों के लिए भी खुली रहेंगी.
- टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के माध्यम से कंपनियों को नई तकनीक विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी.
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का बयान
संसद में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इन प्रयासों को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा, “अब भारत में ही नए हथियार, ड्रोन, मिसाइलें और इंजन तैयार होंगे. इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा.”
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