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भारत–यूके FTA से सालाना £25.5 अरब द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि का अनुमान : SATC
भारत–यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत–UK मुक्त व्यापार समझौते से भारत और यूके दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार में £25.5 अरब की वृद्धि होगी. यह जानकारी नई दिल्ली में PHDCCI द्वारा "भारत–UK मुक्त व्यापार समझौता : आगे का मार्ग" विषय पर आयोजित इंटरैक्टिव सत्र में ब्रिटिश उच्चायोग की दक्षिण एशिया व्यापार आयुक्त (SATC) एना शॉटबोल्ट ने साझा की. उन्होंने बताया कि इस FTA के तहत 90% वाणिज्यिक वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती के प्रावधान हैं.
सिर्फ टैरिफ कटौती नहीं संपूर्ण लाभ
शॉटबोल्ट ने यह भी बताया कि creative कंपनियों को मजबूत कॉपीराइट संरक्षण मिलेगा और सर्विसेज सेक्टर में भी फायदे होंगे. डबल टैक्सेशन एवॉइडेंस कन्वेंशन (DTAC) से दोनों देशों के श्रमिकों को पारदर्शिता और निश्चितता मिलेगी.
भारत-यूके समझौते की प्रासंगिकता
PHDCCI के CEO एवं सेक्रेटरी जनरल डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि यूके–भारत FTA की बातचीत तब शुरू हुई जब भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और समझौते पर हस्ताक्षर तक पहुँचते-पहुँचते भारत चौथे स्थान पर आ चुका था. यूके एक प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्था है और यह FTA भारत के लिए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता है.
डॉ. मेहता ने सामाजिक सुरक्षा क्लॉज की महत्ता पर जोर दिया जो यूके जाने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए सहायक होगा. उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत लाभ उठाने हेतु हमें सक्रिय रूप से आगे बढ़ना चाहिए. PHDCCI अपनी 120वीं वर्षगांठ के मौके पर इस सितंबर में यूके का व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना बना रहा है ताकि इस समझौते द्वारा उत्पन्न संभावनाओं का पता लगाया जा सके.
डॉ. मेहता ने यह भी कहा कि भारत की 2070 तक net zero लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यवसायों, विशेषकर MSMEs को स्थायी और टेक्नोलॉजी से लैस होना आवश्यक है. चाहे सेवाओं में हो या उत्पादों में, भारत को UK के साथ मिलकर काम करना चाहिए क्योंकि यह MSMEs के लिए बड़ी बाजार संभावनाएं उपलब्ध कराता है.
भागीदारों की राय में साझेदारी और सहयोग
VeK Policy Advisory के Founder & Executive Chairman T.S. विष्णु नाथ ने कहा कि यह FTA सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि द्विपक्षीय विशेषज्ञता का निर्माण है. हमें उद्योगों के साथ सीधे जुड़कर चुनौतियों को पहचानना और साझेदारियां मजबूत करना चाहिए.
IIFT के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि 13 वर्षों की वार्ता के बाद दोनों देशों ने इस FTA पर सहमति व्यक्त की है जो विशाल अवसर खोलता है. भारत की रिटेल मार्केट $1 ट्रिलियन की है जबकि UK की लगभग $386.3 अरब, दोनों के लिए बड़ा कारोबार है.UK-India Business Council के Global Board Director & Chairman India किशोर जयरामन ने कहा कि यह नई युग की शुरुआत है. FTA दोनों देशों को अपनी क्षमताओं का समावेश करने का अवसर देता है.
Toy Association of India के President अजय अग्रवाल ने बताया कि खिलौना उद्योग में भारत पहले से ही लगभग 80% घरेलू उत्पादन कर रहा है और UK के साथ तकनीक आधारित सहयोग से दोनों देश लाभ उठा सकते हैं.
PHDCCI, Textile Committee को-पेयर C. R. राई, ने कहा कि India–UK FTA निर्यात, रोजगार और SME सशक्तिकरण के माध्यम से वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए अवसर उत्पन्न कर रहा है.
PHDCCI की पहल और दृष्टिकोण
PHDCCI के Deputy Secretary General नवीन सेठ ने बताया कि यह कार्यक्रम PHDCCI द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों को सशक्त बनाने एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है. UK महत्वपूर्ण साझेदार है और इस तरह के मंच भारतीय उद्योगों को वैश्विक अवसरों की समझ, प्रमुख हितधारकों से जुड़ने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने में सक्षम बनाते हैं.
FTA की प्रमुख विशेषताएं
भारत–यूके मुक्त व्यापार समझौता टैरिफ कम करने, बाजार पहुँच बढ़ाने और सीमा-पार निवेश को सुगम बनाने के लिए तैयार किया गया है. यह सेवाओं, तकनीक, उन्नत विनिर्माण, दवा उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय व्यवसायों के लिए अवसर खोलता है और दोनों देशों को गहरे आर्थिक सहयोग एवं स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ाता है.
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