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भारत–रूस उर्वरक साझेदारी: यूरालकेम के साथ बनेगा 20 लाख टन क्षमता वाला यूरिया प्लांट

भारत और रूस के बीच यह नया उर्वरक संयुक्त उपक्रम न केवल आपूर्ति सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि देश के कृषि क्षेत्र की स्थिरता और उत्पादन क्षमता को भी मजबूत करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

भारत ने रूस के साथ उर्वरक आपूर्ति को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. भारतीय सरकारी कंपनियों ने रूसी समूह यूरालकेम के साथ एक मेगा संयुक्त उपक्रम (JV) पर सहमति जताई है, जिसके तहत रूस में 18–20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा. यह समझौता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुआ और इसे भारतीय उर्वरक क्षेत्र के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोगों में से एक माना जा रहा है.

भारत की तीन बड़ी उर्वरक कंपनियां होंगी साझेदार

राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF), नैशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) इस संयुक्त परियोजना में भारत की ओर से भागीदार होंगी. यह JV आकार के लिहाज से भारत के किसी विदेशी साथी के साथ किए गए सबसे बड़े उपक्रमों में शामिल है. इससे पहले सबसे बड़ा संयुक्त उपक्रम ओमान इंडिया फर्टिलाइजर लिमिटेड था, जिसकी वार्षिक क्षमता करीब 16.5 लाख टन यूरिया है.

अमोनिया की सप्लाई रूस से, फाइनेंसिंग भारतीय पक्ष से

यूरालकेम द्वारा जारी बयान के अनुसार, नए संयंत्र को अमोनिया की आपूर्ति टोज JSC द्वारा की जाएगी, जबकि परियोजना के प्रारंभिक चरणों में वित्तीय सहायता भारतीय कंपनियों द्वारा प्रदान की जाएगी. यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक संयंत्र वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं कर देता. तकनीकी मूल्यांकन और परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर वर्तमान में कार्य जारी है. साथ ही संयुक्त उपक्रम की संरचना और संचालन मॉडल को अंतिम रूप देने पर भी बातचीत चल रही है.

भारत हमारे लिए रणनीतिक बाजार

यूरालकेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिमित्री कोन्यायेव ने कहा कि भारत वैश्विक कृषि क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाता है और खनिज उर्वरकों का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है. उन्होंने कहा, "भारत हमारे लिए ऐतिहासिक रूप से एक रणनीतिक बाजार रहा है. हम भारतीय साझेदारों के साथ सहयोग को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं." 

रूस से भारत का उर्वरक आयात तेजी से बढ़ा

संयुक्त उपक्रम के अलावा, आंकड़े बताते हैं कि रूस हाल के वर्षों में भारत के लिए उर्वरकों का प्रमुख सप्लायर बनकर उभरा है. 2017-18 से 2023-24 के बीच रूसी यूरिया आयात 62.31% की CAGR से बढ़ा,  DAP और NPK जैसे अन्य उर्वरकों का आयात 22.01% की दर से बढ़ा और भारत के कुल उर्वरक आयात में रूस की हिस्सेदारी 7.68% से बढ़कर 27% पहुँच गई. यह वृद्धि इस सहयोग की भविष्य की संभावनाओं को और मजबूत बनाती है.

यूरालकेम: दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उत्पादकों में शामिल

बता दें, यूरालकेम JSC, यूरालकेम समूह का हिस्सा है, एक ऐसा संगठन जो विश्व स्तर पर नाइट्रोजन और कंपाउंड फर्टिलाइजर्स के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकर्ताओं में गिना जाता है. इसके उत्पादन केंद्र रूस के कालिनिनग्राद, किरोव, मॉस्को और पर्म क्षेत्रों में फैले हुए हैं. समूह में शामिल तीन प्रमुख कंपनियां, यूरालकेम JSC, यूरालकाली PJSC और टोज JSC मिलकर लगभग 2.5 करोड़ टन की संयुक्त उत्पादन क्षमता रखती हैं और इनमें करीब 38,000 कर्मचारी कार्यरत हैं.


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