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ग्लोबल तनाव के बीच भारत अलर्ट: जहाजों की सुरक्षा के लिए 10 करोड़ डॉलर का बीमा कोष तैयार

भारत का यह न केवल शिपिंग कंपनियों को राहत मिलेगी, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय व्यापार को भी मजबूती मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. भारतीय बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां मिलकर 10 करोड़ डॉलर का एक विशेष युद्ध-जोखिम बीमा कोष बनाने पर विचार कर रही हैं. इस पहल में सरकार भी सहयोग दे सकती है और संप्रभु गारंटी प्रदान करने की संभावना जताई जा रही है.

बढ़ते खतरे के बीच बीमा सुरक्षा पर जोर

ईरान, अमेरिका और इजरायल से जुड़े तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम काफी बढ़ गया है. इसका असर वैश्विक व्यापार के साथ-साथ भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ा है. ऐसे में यह प्रस्तावित कोष उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभा सकता है.

प्रीमियम का हिस्सा जोड़कर बनेगा कोष

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीमा उद्योग इस कोष के निर्माण के लिए समुद्री बीमा प्रीमियम का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा देने पर विचार कर रहा है. इस फंड का प्रबंधन भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC Re) करेगा और इसमें समुद्री बीमा से जुड़ी अन्य सामान्य बीमा कंपनियां भी भाग लेंगी.

विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य समुद्री बीमा पॉलिसी में युद्ध से जुड़े जोखिम शामिल नहीं होते. इसके लिए कंपनियों को अलग से ‘वार रिस्क कवर’ लेना पड़ता है. मौजूदा अनिश्चितता के कारण यह कवर अब पहले से कहीं अधिक महंगा और सीमित हो गया है. ऐसे में नया कोष जोखिम को साझा कर नुकसान को कम करने में मदद करेगा.

बढ़ते प्रीमियम और सीमित कवर

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद समुद्री बीमा प्रीमियम में तेज बढ़ोतरी हुई है. पहले जहां अतिरिक्त युद्ध जोखिम कवर का प्रीमियम लगभग 0.25 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर 0.5 से 1 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसके अलावा, बीमा कंपनियां अब यह कवर सीमित स्तर पर और ऊंची कीमत पर ही दे रही हैं.

शिपिंग पर असर और रूट में बदलाव

बढ़ते जोखिम के चलते कई पुनर्बीमा कंपनियों ने जहाजों के लिए नोटिस ऑफ कैंसिलेशन जारी किए हैं. इसके कारण कई शिपिंग कंपनियां या तो वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं या इस क्षेत्र से गुजरना पूरी तरह बंद कर चुकी हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ा है.

ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर

ईरान से जुड़े तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तरलीकृत प्राकृतिक गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. हाल ही में घोषित अस्थायी युद्धविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है.

विशेषज्ञों के अनुसार, दो सप्ताह का युद्धविराम जोखिम को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है. उनका कहना है कि बीमा प्रीमियम अल्पकालिक घटनाओं के बजाय दीर्घकालिक जोखिमों के आधार पर तय होते हैं. इसलिए जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति के संकेत नहीं मिलते, प्रीमियम ऊंचे बने रहेंगे.

 


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