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भारत-जापान साझेदारी: आंध्र प्रदेश में बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र
यह समझौता आंध्र प्रदेश में एक हाइड्रोजन निर्यात केंद्र विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को जापान की स्वच्छ ईंधन मांग से जोड़ता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
NTPC की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NTPC ग्रीन एनर्जी (NGEL) ने जापान की ENEOS कॉर्पोरेशन के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों जैसे कि ग्रीन मेथनॉल और अन्य नवीकरणीय-आधारित रसायनों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं की खोज के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
यह समझौता जापान के ओसाका में वर्ल्ड एक्सपो 2025 की तैयारियों के दौरान औपचारिक रूप से किया गया. यह समझौता एशिया में एक स्वच्छ ईंधन आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में जापानी उद्योग के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी का हिस्सा है.
इस सहयोग के तहत, दोनों कंपनियां आंध्र प्रदेश के पुडिमडाका में प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन हब से हाइड्रोजन-आधारित उत्पादों के निर्यात की व्यवहार्यता का अध्ययन करेंगी. यह हब लगभग 1,200 एकड़ में फैला होगा और इसमें नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, इलेक्ट्रोलिसिस और रासायनिक परिवर्तन के लिए एकीकृत परिसर की योजना बनाई गई है. यह सुविधा घरेलू खपत के साथ-साथ निर्यात बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन की जा रही है.
ENEOS, जो जापान की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक है, अपने कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कम-कार्बन ईंधनों की सुरक्षित आपूर्ति चाहती है. यह साझेदारी ENEOS की भविष्य की आयात आवश्यकताओं को NTPC के भारत में वाणिज्यिक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम बनाने के प्रयासों के साथ जोड़ती है.
NTPC ग्रीन एनर्जी, भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी की नवीकरणीय ऊर्जा शाखा है. कंपनी ने 2032 तक 60 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता (जिसमें सौर, पवन और हाइब्रिड संयंत्र शामिल हैं) विकसित करने का लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य NTPC के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की व्यापक महत्वाकांक्षा का हिस्सा है.
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