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भारत–इजराइल रक्षा सहयोग: AI, ड्रोन और डिजिटल बॉर्डर सुरक्षा के नए दौर में प्रवेश
भारत–इजराइल रक्षा साझेदारी अब पूर्ण रूप से तकनीक-केंद्रित, संतुलित और घरेलू क्षमता निर्माण पर आधारित मॉडल बन गई है. AI, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और सह-विकास के माध्यम से भारत अपनी सीमा-सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को नई मजबूती दे रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग अब पारंपरिक सिस्टम से आगे बढ़कर उन्नत तकनीकों AI सर्विलांस, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा और स्थानीय उत्पादन पर केंद्रित हो गया है. नवंबर 2025 में तेल अवीव में हुई 17वीं Joint Working Group (JWG) बैठक ने इस दिशा को नई गति दी है. दोनों देशों ने हाल ही में एक नया एमओयू साइन किया है, जिसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा-उद्योग, AI और साइबर सुरक्षा को साझा प्राथमिकता दी गई है. इस ढांचे के तहत भारत को उन्नत सर्विलांस ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण और आधुनिक रडार सिस्टम उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें सीमावर्ती इलाकों में AI-आधारित वीडियो एनालिटिक्स और ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम के साथ तैनात किया जा रहा है.
15,000 किमी पर तकनीक आधारित निगरानी की तैयारी
भारत के पास 15,000 किमी से अधिक लंबी और अत्यंत विविध भू-भौगोलिक सीमाएँ हैं, जहाँ पूरी तरह मानव-आधारित निगरानी संभव नहीं है. Manohar Parrikar Institute for Defence Studies and Analyses के अनुसार, पारंपरिक निगरानी मॉडल यहाँ पर्याप्त नहीं हैं. CIBMS के तहत पायलट प्रोजेक्ट में भारत–पाक सीमा के 10 किमी और भारत- बांग्लादेश सीमा के 61 किमी हिस्से पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सफलतापूर्वक लागू की गई थी. अगला चरण लगभग 1,955 किमी तक सेंसर, कैमरा, थर्मल इमेजर और UAV सिस्टम की तैनाती पर केंद्रित है.
डेटा-ड्रिवन बॉर्डर मैनेजमेंट: सह-विकास को प्राथमिकता
तेल अवीव बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य की सीमा-सुरक्षा “डेटा-ड्रिवन” होगी, जहाँ मशीनें अलर्ट देंगी और अंतिम निर्णय मानव लेंगे. भारत का उद्देश्य तकनीक का सीधा आयात करना नहीं, बल्कि इजराइल के साथ संयुक्त R&D के जरिए समाधान को भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करना है.
इसी दिशा में AI मॉडल ट्रेनिंग, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और दीर्घकालिक टेक-ट्रांसफर मैकेनिज्म पर विस्तृत चर्चा हुई, ताकि भारतीय उद्योग इन तकनीकों को घरेलू स्तर पर उत्पादन भी कर सके.
ड्रोन खतरे पर संयुक्त प्रयास: साझा अनुभव का लाभ
पंजाब, जम्मू और राजस्थान सेक्टर में ड्रोन-ड्रॉप्स और हथियारबंद UAV गतिविधियों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को नई चुनौतियों के प्रति सचेत किया है. इजराइल स्वार्म और लो एल्टीट्यूड ड्रोन हमलों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव रखता है.
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने AI-enabled काउंटर-UAV सिस्टम, RF जैमिंग तकनीक और संयुक्त फील्ड-टेस्टिंग को उच्च प्राथमिकता दी है. लक्ष्य है ऐसी प्रणाली विकसित करना जो भारत की वास्तविक सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप कार्य कर सके.
रक्षा उत्पादन में नई दिशा: सह-विकास और सह-निर्माण का मॉडल
भारत–इजराइल रक्षा सहयोग अब सह-विकास और सह-निर्माण मॉडल पर आधारित है. Barak-8 मिसाइल सिस्टम और भारत में Adani–Elbit की Hermes-class UAV उत्पादन लाइन इस मॉडल के सफल उदाहरण हैं. यह ढांचा न सिर्फ भारत की क्षमताओं को बढ़ा रहा है, बल्कि रक्षा विनिर्माण, निर्यात क्षमता और आत्मनिर्भरता मिशन को भी मजबूती प्रदान कर रहा है.
लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
भारत का फोकस अब सिर्फ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर नहीं, बल्कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर है. कई भारतीय प्राइवेट कंपनियाँ इज़राइली कंपनियों के साथ मिलकर ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित कर रही हैं. इससे घरेलू उद्योग को नई विशेषज्ञता और तकनीकी मजबूती मिल रही है.
Drone Anatomy के फाउंडर एवं CEO सौरभ झा के अनुसार, “इजराइल की फील्ड-टेस्टेड टेक्नोलॉजी और भारत के ऑपरेशनल अनुभव का संयोजन सीमा-सुरक्षा को नई दिशा देगा. AI आधारित सर्विलांस और काउंटर-ड्रोन सिस्टम राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुके हैं. अगले दो से तीन सालों में भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल कर क्षेत्रीय तकनीकी नेता के रूप में उभरेगा.”
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