होम / बिजनेस / दो दशकों में पहली बार साइप्रस पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री, रक्षा, व्यापार और वैश्विक कूटनीति को लेकर व्यापक समझौता
दो दशकों में पहली बार साइप्रस पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री, रक्षा, व्यापार और वैश्विक कूटनीति को लेकर व्यापक समझौता
भारत-साइप्रस साझेदारी को 2029 तक के एक्शन प्लान से दिशा मिलेगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स ने रविवार को निकोसिया में एक व्यापक संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जो भारत और साइप्रस के बीच संबंधों को नया आयाम देने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 20 वर्षों में पहली आधिकारिक साइप्रस यात्रा है.
घोषणा-पत्र में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, कनेक्टिविटी और वैश्विक शासन सुधार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने का खाका प्रस्तुत किया गया है. दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी गहन करने और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
द्विपक्षीय वार्ता में आतंकवाद के सभी स्वरूपों, विशेषकर सीमापार आतंकवाद, की कड़ी निंदा की गई. राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले में मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारत के साथ एकजुटता जताई.
घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में Comprehensive Convention on International Terrorism को शीघ्र अपनाने की मांग की गई, साथ ही आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने के लिए ठोस वैश्विक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया गया.
भारत और साइप्रस ने समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने, भारतीय नौसेना के जहाजों के पोर्ट कॉल्स, और संयुक्त अभ्यास को प्रोत्साहित करने की बात कही. भारत ने साइप्रस के लिए संयुक्त राष्ट्र-नेतृत्व में समाधान के अपने पारंपरिक समर्थन को दोहराया. साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और एक अधिक प्रतिनिधि वैश्विक शासन ढांचे की वकालत की.
दोनों पक्षों ने कॉमनवेल्थ महासागर घोषणा (Apia Declaration 2024) और साइप्रस के ब्लू चार्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए समुद्री शासन पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
घोषणा-पत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की योजना शामिल है. साइप्रस को भारतीय कारोबारियों के लिए यूरोप के प्रवेश द्वार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, विशेष रूप से इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के संदर्भ में. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स ने भारतीय शिपिंग कंपनियों को साइप्रस में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया और द्विपक्षीय बिजनेस फोरम व एक उच्च स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल को जल्द भारत भेजने की बात कही.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान अवसंरचना और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की योजना है. इसके अतिरिक्त, प्रोफेशनल्स और छात्रों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक मोबिलिटी पायलट कार्यक्रम को 2025 के अंत तक अंतिम रूप देने पर सहमति बनी.
पर्यटन को बढ़ावा देने और सीधी विमान सेवा शुरू करने पर भी चर्चा हुई. घोषणा में कहा गया कि यह साझेदारी साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और वैश्विक शांति के प्रति समान दृष्टिकोण पर आधारित है. दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की निगरानी में एक पांच वर्षीय कार्य योजना (2025–2029) लागू की जाएगी, जिससे सहयोग को संस्थागत रूप मिलेगा.
टैग्स