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भारत-चीन सहयोग: भारतीय स्टार्टअप्स ने लागत घटाने के लिए चीनी बैटरी और ईवी तकनीक की खोज की
उच्च लागत, लंबी आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रहे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता क्षेत्र से जुड़े आठ सदस्यीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी चीन की एक सप्ताह लंबी यात्रा पूरी की है. इस दौरे के दौरान कारखाने के दौरे और व्यावसायिक बैठकों के माध्यम से ऐसे अवसर सामने आए हैं, जिनसे भारतीय स्वच्छ-तकनीक स्टार्टअप्स के विकास समय और तकनीकी लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है.
यह प्रतिनिधिमंडल 29 मार्च से 4 अप्रैल तक उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई द्वारा आयोजित किया गया था. इसमें ईवी चार्जिंग, विद्युत ट्रक, बैटरी भंडारण और ऊर्जा व्यापार से जुड़े छह स्टार्टअप्स शामिल थे. टीम ने शंघाई, झेजियांग और वूशी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा किया, जो चीन के कुल व्यापार का लगभग इकतालीस प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं.
प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य नई तकनीकों की पहचान करना, मशीनरी और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को ढूँढना और बैटरी प्रणाली, ईवी चार्जिंग, सौर ऊर्जा तकनीक और डिजिटल ऊर्जा प्लेटफॉर्म में वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाओं का मूल्यांकन करना था.
इस दौरान टीम ने शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर से भी मुलाकात की. उन्होंने इस दौरे के समय को भारत-चीन के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया. प्रतिनिधियों को नीति, कानूनी ढांचे, निवेश प्रक्रिया और चीनी निर्माताओं के साथ कार्य करने की आवश्यकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई.
व्यवसाय से व्यवसाय बैठकों में दिखा पैमाना और स्वचालन
शंघाई के मिनहांग जिले में स्थित वैश्विक नई ऊर्जा सशक्तिकरण केंद्र में आयोजित बैठकों में भारतीय प्रतिनिधियों ने कम से कम बारह नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों से बातचीत की. इनमें जिनको ईएसएस, स्वोल्ट ऊर्जा तकनीक, ट्रिना सोलर और अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल थीं.
इन बैठकों में लिथियम-आयन बैटरी निर्माण, बैटरी प्रबंधन प्रणाली, ईवी चार्जिंग हार्डवेयर, हल्के सौर पैनल और उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं. प्रतिनिधियों के अनुसार, चीनी कारखानों में उच्च स्तर का स्वचालन और आपूर्ति श्रृंखला का गहरा एकीकरण सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा.
वूजिन जिले में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और कंपनियों के साथ बातचीत के दौरान भारतीय स्टार्टअप्स को यह समझने का अवसर मिला कि चीन में जिला स्तर पर सरकारें किस प्रकार स्वच्छ ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता समूहों को समर्थन देती हैं.
समय और लागत में ठोस लाभ
ई-जीरो मोबिलिटी के संस्थापक विनीत कुमार ने कहा कि इस यात्रा से चीनी आपूर्तिकर्ताओं के साथ गहन तकनीकी चर्चाएं संभव हुईं, जिससे उनकी परियोजना की समयसीमा सोलह सप्ताह तक कम हो गई है.
रीप्राइम एनर्जी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि चीन की विनिर्माण क्षमता और भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग का संयोजन बड़े पैमाने पर ऊर्जा अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
पीएचडीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महासचिव रंजीत मेहता ने कहा कि चीन नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी तकनीक और विद्युत वाहन निर्माण में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है, जबकि भारत तेजी से अपनी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग नवाचार को गति देने, तकनीकी लागत कम करने और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.
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