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भारत-अमेरिका के बीच 7,995 करोड़ का बड़ा रक्षा करार, नौसेना के MH-60R हेलिकॉप्टरों को मिलेगा उन्नत सपोर्ट
MH-60R हेलिकॉप्टरों के लिए व्यापक मेंटेनेंस और सपोर्ट पैकेज न केवल नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि देश में रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग एक नई ऊँचाई पर पहुँचा है. भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक MH-60R हेलिकॉप्टरों की मेंटेनेंस, सपोर्ट और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने 7,995 करोड़ रुपये के बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह अनुबंध पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और इससे नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में सीधा इजाफा होगा.
LOAs पर हस्ताक्षर, FMS कार्यक्रम के तहत हुआ करार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह समझौता अमेरिका के Foreign Military Sales (FMS) कार्यक्रम के तहत हुआ है. Letters of Offer and Acceptance (LOAs) पर हस्ताक्षर के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे. मंत्रालय ने बताया कि यह पैकेज MH-60R हेलिकॉप्टरों की संचालन क्षमता को स्थायी और सक्षम बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
सस्टेनमेंट सपोर्ट पैकेज में क्या शामिल है?
मंत्रालय ने जानकारी दी कि सपोर्ट पैकेज काफी व्यापक है. इसमें हेलिकॉप्टरों के लिए आवश्यक स्पेयर पार्ट्स, सपोर्ट इक्विपमेंट, तकनीकी सहायता, क्रू और ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग, प्रमुख पुर्जों की मरम्मत और रीस्टॉकिंग शामिल हैं. इसके अलावा, भारत में ही इंटरमीडिएट लेवल रिपेयर और पीरियॉडिक मेंटेनेंस चेक सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी. इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और हेलिकॉप्टरों की सर्विसिंग गति तेज होगी.
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
सरकार के अनुसार, मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के भारत में विकसित होने से Aatmanirbhar Bharat मिशन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. रक्षा विनिर्माण और मरम्मत में घरेलू क्षमता बढ़ने से भारतीय MSMEs और निजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा मिलेगा.
MH-60R: नौसेना की निगरानी और युद्ध क्षमताओं में बढ़ोतरी
MH-60R "रोमियो" हेलिकॉप्टर भारतीय नौसेना के लिए बेहद रणनीतिक माने जाते हैं. ये हर मौसम में उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), समुद्री निगरानी और मल्टी-रोल मिशन में अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं. इस नए सपोर्ट पैकेज से हेलिकॉप्टरों की ऑपरेशनल उपलब्धता बढ़ेगी, जहाजों और तटीय बेसों से संचालन और अधिक प्रभावी होगा, मिशन रेस्पॉन्स टाइम सुधरेगा, समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता में और मजबूती आएगी.
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