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भारत, ईयू समेत 7 देशों ने P4M पहल शुरू की, संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर दिया जोर
भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, बारबाडोस और केन्या ने न्यूयॉर्क में शुरू की ‘बहुपक्षवाद के लिए साझेदार’ पहल; अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समावेशी विकास के लिए सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत, यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, बारबाडोस और केन्या ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए ‘बहुपक्षवाद के लिए साझेदार’ (Partners for Multilateralism- P4M ),पहल शुरू की है. यह पहल 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 21 सितंबर को न्यूयॉर्क में शुरू की गई. सातों शुरुआती सह-प्रायोजक देशों ने P4M समिट की घोषणा को अपनाया.
P4M का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति, समावेशी विकास और साझा समृद्धि जैसे साझा सिद्धांतों के आधार पर एक साथ लाना है. पहल ऐसे समय शुरू हुई है जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, ध्रुवीकरण और संरक्षणवाद बढ़ने के बीच बहुपक्षीय सहयोग को लेकर चिंताएं सामने आ रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार पर जोर
P4M घोषणा में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है. इसमें खास तौर पर संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया है.
सदस्य देशों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था आज भी जरूरी है, लेकिन दुनिया के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए इसमें सुधार की जरूरत है. देशों के मुताबिक मौजूदा वैश्विक व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक आपस में जुड़ी हुई, जटिल और बहुध्रुवीय हो गई है.
घोषणा में UN80 जैसी पहलों के जरिए बहुपक्षीय संस्थानों को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई गई है. इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की संघर्षों को रोकने, संकटों से निपटने, सतत विकास को बढ़ावा देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और नई वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है.
भारत ने पहले भी उठाया है वैश्विक संस्थाओं में सुधार का मुद्दा
P4M पहल भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया था. उन्होंने वैश्विक नियमों को तय करने में ग्लोबल साउथ की अधिक भूमिका की बात कही थी.
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में बदलाव की जरूरत भी बताई थी. ऐसे में P4M के जरिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और उन्हें अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने का मुद्दा भारत की प्राथमिकताओं से भी जुड़ता है.
अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभु समानता पर जोर
P4M घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन, देशों की संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों को दोहराया गया है. इसमें बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी पर रोक के सिद्धांत का भी समर्थन किया गया है.
सदस्य देशों ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय नियमों और सहयोग की भूमिका को मजबूत करना जरूरी है. जलवायु परिवर्तन, नई तकनीकों और अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है.
व्यापार, तकनीक और जलवायु पर भी सहयोग
P4M का एजेंडा केवल राजनीतिक और सुरक्षा मामलों तक सीमित नहीं है. घोषणा में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाने, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे को बेहतर बनाने की बात कही गई है.
इसके अलावा डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देना है.
अन्य देशों के लिए भी खुला रहेगा मंच
P4M को किसी नए औपचारिक गठबंधन के तौर पर पेश नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य अलग-अलग भू-राजनीतिक परिस्थितियों वाले देशों को बहुपक्षीय सहयोग के साझा एजेंडे पर साथ लाना है. यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों और देशों की भागीदारी के लिए भी खुली रहेगी.
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने P4M को संवाद, गठबंधन निर्माण और व्यावहारिक सहयोग के लिए एक मंच बताया है. उन्होंने कहा कि यह अलग-अलग क्षेत्रों के बीच पुल बनाने और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार तथा आधुनिकीकरण में योगदान दे सकता है.
न्यूयॉर्क में हुई P4M बैठक
P4M शिखर बैठक 21 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान हुई. इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो शामिल हुए.
सातों शुरुआती साझेदार देशों ने कहा है कि वे दुनिया के अन्य देशों के साथ नियमित संवाद और समन्वय जारी रखेंगे, ताकि बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत किया जा सके और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए व्यावहारिक कदम आगे बढ़ाए जा सकें.
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