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भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ी कारों की मांग, जनवरी में पैसेंजर व्हीकल बिक्री 7% बढ़ी
जनवरी के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्रोथ की नई कहानी गांवों से लिखी जा रही है. ग्रामीण मांग की मजबूती, बेहतर आर्थिक गतिविधियां और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएं आने वाले महीनों में भी ऑटो सेक्टर को सहारा दे सकती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ती नकदी और बेहतर उपभोक्ता भरोसे का असर अब ऑटोमोबाइल बाजार में साफ दिखने लगा है. जनवरी 2026 में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 7 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है, जिसमें गांवों की भूमिका सबसे अहम रही. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के ताजा आंकड़े इस बदलते ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं.
ग्रामीण बाजार बना बिक्री की ग्रोथ का इंजन
FADA के मुताबिक, जनवरी में पैसेंजर व्हीकल्स की खुदरा बिक्री 7.22 प्रतिशत बढ़कर 5,13,475 यूनिट पर पहुंच गई. इस दौरान ग्रामीण बाजार में 14.4 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जबकि शहरी बाजार की वृद्धि 2.75 प्रतिशत रही. फसल कटाई, शादी-विवाह के सीजन और बेहतर नकदी प्रवाह ने गांवों में मांग को मजबूती दी.
कुल वाहन बिक्री में भी दिखा उत्साह
पैसेंजर व्हीकल्स के साथ-साथ कुल वाहन खुदरा बिक्री में भी तेजी देखने को मिली. जनवरी में सभी श्रेणियों की कुल खुदरा बिक्री 17.6 प्रतिशत बढ़कर 27.2 लाख यूनिट हो गई. जीएसटी के बाद भी बिक्री की रफ्तार बनी रही, जिसे परिवहन और माल ढुलाई की स्थिर मांग से समर्थन मिला.
शहरों की हिस्सेदारी अब भी ज्यादा, लेकिन गांव तेजी से करीब
हालांकि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में शहरी बाजार की हिस्सेदारी 59.2 प्रतिशत के साथ अब भी ज्यादा रही, लेकिन ग्रामीण हिस्सेदारी भी 40.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह आंकड़े संकेत देते हैं कि ऑटोमोबाइल डिमांड अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है.
मारुति का दबदबा कायम, ह्युंडै दूसरे नंबर पर लौटी
कार निर्माताओं की बात करें तो मारुति सुजुकी ने 42 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी और 2,16,043 यूनिट बिक्री के साथ अपना नेतृत्व बरकरार रखा. ह्युंडै मोटर कई महीनों बाद 12.84 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गई. इसके बाद टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा का स्थान रहा.
SUV और एंट्री-लेवल कारों की बढ़ी लोकप्रियता
FADA के अध्यक्ष सीएस विघ्नेश्वर के अनुसार, बड़े शहरों से बाहर पैसेंजर व्हीकल डिमांड में संरचनात्मक मजबूती दिख रही है. SUV और कॉम्पैक्ट-SUV की बढ़ती पसंद, एंट्री-लेवल कारों की वापसी, बेहतर मॉडल उपलब्धता और आकर्षक स्कीम्स ने बिक्री को सहारा दिया है. साथ ही बिना बिके स्टॉक का स्तर घटकर 32 से 34 दिनों पर आना डीलर नेटवर्क की बेहतर दक्षता को दर्शाता है.
दोपहिया और कमर्शियल वाहनों में भी मजबूती
जनवरी में दोपहिया वाहनों की बिक्री 18.5 लाख यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 20.82 प्रतिशत की बढ़त है. इसमें ग्रामीण हिस्सेदारी 56 प्रतिशत रही. वहीं कमर्शियल वाहनों की बिक्री 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,07,486 यूनिट पहुंच गई, जो माल ढुलाई और रिप्लेसमेंट डिमांड में सुधार का संकेत है.
निर्माण उपकरण सेगमेंट पर बना दबाव
जहां ज्यादातर सेगमेंट में मजबूती दिखी, वहीं निर्माण उपकरण श्रेणी में दबाव बना रहा. जनवरी में इस सेगमेंट की बिक्री 21 प्रतिशत से अधिक घट गई, जिसका कारण ऊंचा बेस और सेगमेंट-विशेष बदलाव बताया जा रहा है.
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