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मिडिल ईस्ट संकट का असर: भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में बड़ी गिरावट
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में 3.32 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई. यह 28,669.53 मिलियन डॉलर से घटकर 27,717.40 मिलियन डॉलर रहा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के रत्न और आभूषण उद्योग पर साफ दिखने लगा है. मार्च 2026 में जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञ इसे चुनौती के साथ-साथ अवसर के रूप में भी देख रहे हैं.
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट करीब 35.23 प्रतिशत घटकर 27,717.40 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 28,669.53 मिलियन डॉलर था. यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का परिणाम मानी जा रही है.
लॉजिस्टिक्स और मांग दोनों पर असर
GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण माल ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई. यहां तक कि हीरे के निर्यात वाले पार्सल भी समय पर आगे नहीं बढ़ सके. जोखिम बढ़ने से बीमा प्रीमियम में तेज उछाल आया, जिसने शिपमेंट को और महंगा और मुश्किल बना दिया.
भारत के लिए अवसर भी छिपा
हालांकि इस संकट के बीच भारत के लिए नए अवसर भी उभर रहे हैं. भंसाली ने कहा कि यदि सरकार का सहयोग मिला, तो भारत कच्चे हीरों के व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है. खासकर UAE की कंपनियां भारत में इस सेक्टर में निवेश और व्यापार बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं. भारत पहले से ही डायमंड पॉलिशिंग का प्रमुख केंद्र है, जिससे इसकी संभावनाएं और मजबूत होती हैं.
वित्त वर्ष 2025-26 में भी हल्की गिरावट
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में 3.32 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई. यह 28,669.53 मिलियन डॉलर से घटकर 27,717.40 मिलियन डॉलर रहा. हालांकि, अमेरिका में टैरिफ और चीन में कमजोर मांग के बावजूद, GCC, UK और यूरोपीय संघ से मिली स्थिर मांग ने नुकसान को सीमित रखने में मदद की.
कटे-पॉलिश हीरों का निर्यात भी घटा
मार्च 2026 में कटे और पॉलिश किए गए हीरों (CPD) के निर्यात में 27.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह घटकर 838.75 मिलियन डॉलर रह गया, जो पिछले साल 1,156.60 मिलियन डॉलर था. पूरे वित्त वर्ष में भी इस श्रेणी में 8.52 प्रतिशत की कमी आई.
सोने में स्थिरता, चांदी में उछाल
जहां सोने के आभूषणों का निर्यात लगभग स्थिर रहा, वहीं चांदी के आभूषणों ने शानदार प्रदर्शन किया. वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी के आभूषणों का निर्यात 52.21 प्रतिशत बढ़कर 1,467.47 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
उद्योग को उम्मीद है कि अगले 2-3 महीनों में भू-राजनीतिक तनाव कम होगा, जिससे निर्यात में सुधार देखने को मिल सकता है. साथ ही, नए बाजारों की तलाश और नीतिगत समर्थन से भारत इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है.
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