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यदि बीमा सेक्टर में 100% FDI पर लगी मुहर, तो आपको क्या होगा फायदा?

बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जा सकता है. सरकार इस बारे में विचार कर रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

बीमा सेक्टर (Insurance Sector) में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. दरअसल, मोदी सरकार इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की सीमा को बढ़ाकर 100% करने पर विचार कर रही है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बीमा सेक्टर में FDI की मौजूदा 74 प्रतिशत सीमा को बढ़ाकर 100 करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है. हालांकि, इसके लिए बीमा अधिनियम में संशोधन की ज़रूरत होगी.

2021 में हुआ था संशोधन
बीमा (संशोधन) विधेयक 2021 को संसद ने पारित किया था. इस बिल के जरिये बीमा कानून 1938 को संशोधित किया गया. सबसे पहले 2015 में बीमा क्षेत्र में FDI को  26 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किया गया. इसके बाद 2021-22 के बजट में इसकी सीमा को बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का ऐलान किया गया. अब इसे सीधे 100% किया जा सकता है. हालांकि, अभी सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 

सहयोगियों का साथ ज़रूरी
बताया जा रहा है कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI)को 100% FDI के प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन चूंकि इसके लिए  बीमा अधिनियम में संशोधन करना होगा, इसलिए सरकार को पहले सहयोगी दलों को विश्वास में लेना होगा. भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत नहीं है. उसे TDP और JDU जैसे प्रमुख सहयोगियों को इसके लिए तैयार करना होगा. जहां तक उम्मीद है दोनों दल इस फैसले में सरकार का साथ देंगे.

इकॉनमी को मिलेगा बूस्ट 
अब यह भी जान लेते हैं कि बीमा क्षेत्र में 100% FDI से किसे और क्या फायदा होगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ने से देश की इंश्योरेंस कंपनियों को पर्याप्त विदेशी धन का इस्‍तेमाल करने की छूट मिल जाएगी. इसके अलावा, दिग्गज विदेशी कंपनियां भारत का रुख कर पाएंगी. अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी यह फैसला हितकारी होगी. विदेशी पूंजी हमारी इकॉनमी को बूस्ट करने का काम करेगी. हालांकि, इससे क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ेगी जिससे कहीं न कहीं देशी कंपनियों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

ग्राहक भी रहेंगे फायदे में 
बीमाधारकों के लिहाज से देखें, तो 100%  FDI से उन्हें भी फायदा मिलेगा. विदेशी कंपनियों के आने से बीमा बाजार में सुधार होगा. प्रतियोगिता बढ़ेगी तो कंपनियां बाजार में टिके रहने के लिए आकर्षक प्रीमियम पर फोकस करेंगी. इससे पॉलिसी सस्‍ती होने की उम्‍मीद रहेगी. इसके साथ ही ग्राहकों के पास पहले से ज्यादा ऑप्शन होंगे.  जानकारों का मानना है कि जब ग्राहकों के पास बीमा कंपनी चुनने के ज्यादा विकल्प होंगे तो क्लेम सेटलमेंट जैसी कई तरह की व्यवस्थाओं में सुधार आना लाजमी है. 


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