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BW MarketingWorld: मार्केटिंग से बढ़ती है कंपनी की कमाई या बढ़ती है लागत?
लोग मार्केटिंग को प्रोडक्ट के विकास के एक पहलू के रूप में ही देखते हैं लेकिन मार्केटिंग अब सिर्फ एक पहलू भर नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मार्केटिंग के विभिन्न पक्षों और पहलुओं के बारे में जानने एवं उन पर गहन रूप से चर्चा के लिए आज देश की राजधानी दिल्ली में BW बिजनेसवर्ल्ड (BW BusinessWorld) द्वारा ‘फेस्टिवल ऑफ मार्केटिंग’ के पहले एडिशन का आयोजन किया गया था.
तेजी से बढ़ी मार्केटिंग इंडस्ट्री
ज्यादातर लोग अभी भी मार्केटिंग को प्रोडक्ट के विकास के एक पहलू के रूप में ही देखते हैं लेकिन मार्केटिंग अब सिर्फ एक पहलू भर नहीं है और बहुत ही तेजी से उभरती हुई एक इंडस्ट्री भी है. जब भी बात मार्केटिंग की आती है तो ज्यादातर लोग इसे कंपनी की लागत के रूप में ही देखते हैं. आसान शब्दों में कहें तो कंपनियां अपने उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा कंज्यूमर्स तक पहुंचाने के लिए और साथ ही कंज्यूमर्स को अपने प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित करने के लिए मार्केटिंग में इन्वेस्ट करती हैं.
तेजी से बदली मार्केटिंग की दुनिया
लेकिन पिछले कुछ समय के दौरान तकनीक की दुनिया काफी तेजी से आगे बढ़ी है और मार्केटिंग की दुनिया में भी काफी तेजी से बदलाव हुए हैं. मार्केटिंग की दुनिया में तेजी से हुए इन बदलावों की बदौलत ही अब मार्केटिंग में कंपनियों की लागत तो लगती है लेकिन अच्छी मार्केटिंग की बदौलत ही कंपनियों की कमाई में भी जबरदस्त तरीके से वृद्धि हो रही है.
मार्केटिंग: लागत का केंद्र
BW बिजनेसवर्ल्ड द्वारा आयोजित किए गए फेस्टिवल ऑफ मार्केटिंग में इसी सवाल को गहराई से समझने के लिए लावा मोबाइल (Lava Mobile) के प्रेसिडेंट सुनील रैना ने की खास बातचीत. सुनील रैना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले कंपनियों द्वारा मार्केटिंग को लागत के केंद्र के रूप में देखा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है. पहले लोग मार्केटिंग को बिजनेस की वृद्धि करने वाले एक पहलू के रूप में नहीं देखा करते थे और इसीलिए उन्हें लगता था कि मार्केटिंग में सिर्फ कंपनी के ही पैसे लगते हैं. हालांकि अब ऐसा नहीं है और चीजों में काफी बदलाव हुए हैं.
मार्केटिंग को लेकर कैसे आया बदलाव
मार्केटिंग को लेकर लोगों के मन में आए इस बदलाव के बारे में बात करते हुए सुनील ने बताया कि इकॉनमी के ज्यादा खुलेपन से देश में कम्पटीशन बढ़ा जिसकी वजह से कंपनियां ज्यादा जागरूक हुईं और उन्होंने इस बात पर अच्छे से ध्यान देना शुरू किया कि आखिर उनके लगाए पैसे किस तरह से इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इसकी वजह से भी लोगों के मन में मार्केटिंग को लेकर बदलाव आया है.
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