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पहले ही मुश्किलें थीं हजार, उस पर वादों का अंबार; आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपटेगी सरकार?

मध्य प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है. हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसे बैठाया जाएगा.

नीरज नैयर 2 years ago

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भाग्य का फैसला हो चुका है. विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार वापसी हुई है. BJP की इस जीत में मोदी फैक्टर (Modi Factor) के साथ-साथ प्रदेश सरकार की कई योजनाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रमुख रही. महिलाओं के ज्यादा वोटिंग परसेंटेज को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. खैर, चुनावी शोर खत्म हो चुका है और अब चर्चा नई सरकार को लेकर है. सरकार का चेहरा, यानी मुख्यमंत्री कौन होगा ये फिलहाल साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर साफ है कि नई सरकार को तमाम तरह की आर्थिक चुनौतियों से जूझना होगा. क्योंकि 'वोटों की फसल' काटने के लिए शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) जनहितैषी योजनाओं के नाम पर सरकारी खजाना पहले ही खाली कर चुके हैं. 

ऐसे बढ़ेगा सरकार का खर्चा 
मध्य प्रदेश पर भारी भरकम कर्ज है और ये बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके बावजूद चुनाव पूर्व बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में कई ऐसे वादे किए जिन्हें पूरा करने में नई सरकार को पसीना आ जाएगा. शिवराज सिंह ने लाडली लक्ष्मी बहना की पात्र महिलाओं को 450 रुपए में रसोई गैस सिलेंडर देने का ऐलान किया था. यानी बाकी का बोझ सरकार खुद उठाएगी. एक अनुमान के मुताबिक, इस पर सरकार को हर महीने करीब 280 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. इसी तरह, भाजपा ने 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली देने की बात भी कही है. इस पर सरकार को करीब 6000 करोड़ की सब्सिडी का बोझा उठाना होगा. BJP के संकल्प पत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की वेतनवृद्धि का भी जिक्र है. जिससे प्रतिमाह 35 करोड़ और सालाना 410 करोड़ रुपए का भार सरकारी खजाने पर पड़ेगा.

आर्थिक मदद के साथ आवास 
इतना ही नहीं, भाजपा ने किसान सम्मान निधि भी बढ़ाने का वादा किया है. इसे 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार किया जाएगा. इससे 57 लाख किसान लाभान्वित होंगे और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त 5220 करोड़ रुपए का भार आएगा. BJP ने 1 करोड़ 30 लाख लाडली बहनों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ घर की सुविधा देने का भी वादा किया है. इसके लिए भी भारी-भरकम फंड की व्यवस्था करनी होगी. बता दें कि 10 जून 2023 को प्रदेश सरकार ने लाडली बहना योजना की शुरुआत की थी. शुरू में पात्र महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपए डाले जा रहे थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 1250 कर दिया गया और शिवराज सिंह इसे 3000 रुपए तक पहुंचाने की बात भी कर चुके हैं. 1250 रुपए के हिसाब से ही सरकारी खजाने पर सालाना अनुमानित 19,650 करोड़ रुपए का बोझ आएगा. 

फ्रीबीज बना पॉलिटिकल कम्पल्शन
नई सरकार की आर्थिक चुनौतियों पर बात करते हुए मध्य प्रदेश इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड रिसर्च के निदेशक प्रोफेसर यतेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा , 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि नई सरकार के लिए स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है. फ्रीबीज कल्चर आज पॉलिटिकल कम्पल्शन बन गया है. सभी दल चुनाव जीतने के लिए केवल इसी पर फोकस करते हैं. अब ये देखने वाली बात होगी कि प्रदेश सरकार इस कम्पल्शन को पूरा करने के लिए क्या करती है. क्या दूसरी योजनाओं से लाडली बहना जैसी योजनाओं के लिए फंड डायवर्ट किया जाएगा'? आमतौर पर सरकार अपना खजाना भरने के लिए टैक्स बढ़ाती है या कुछ नए टैक्स लगाती है, तो क्या प्रदेश की जनता को भी इसका सामना करना होगा? प्रोफेसर सिसोदिया को लगता है की इसकी संभावना बेहद कम है. उन्होंने कहा कि टैक्स के मामले में मध्य प्रदेश पहले से ही आगे है. उदाहरण के तौर पर प्रदेश में दूसरे बीजेपी शासित राज्यों से महंगा पेट्रोल है. सरकार पहले से ही काफी टैक्स वसूल रही है. इसी तरह, शराब के दामों में भी सालाना इजाफा होता ही है, लिहाजा मुझे नहीं लगता कि टैक्स में बढ़ोत्तरी होगी.  

विकास की रफ्तार होगी प्रभावित   
प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ सालों में काफी कर्जा लिया है. एक रिपोर्ट की मानें तो सरकार अब तक इतना कर्जा उठा चुकी है कि उसका ब्याज चुकाने में ही सालाना 24 हजार करोड़ रुपए चले जाएंगे. 2020 में प्रदेश पर 2.20 लाख करोड़ का कर्जा था. 2022 में यह बढ़कर 2.83 लाख करोड़ हो गया और 23-24 में 3.31 लाख करोड़. चुनाव से ठीक पहले भी सरकार ने कर्जा लिया था. जानकार मानते हैं कि मौजूदा वित्तीय वर्ष समाप्त होते-होते कर्ज का आंकड़ा 3.85 लाख करोड़ को पार कर जाएगा. उनका यह भी कहना है कि मुफ्त की घोषणाएं पूरी करने में ही बजट का अधिकांश हिस्सा खर्च हो जाएगा. जाहिर है इसका असर दूसरी महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी पड़ेगा और विकास प्रभावित होगा. सरकार की आमदनी 2023-24 में 2 लाख 25 हजार करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि खर्च 2,79,000 करोड़ रुपए. यानी सरकार ने हैसियत से ज्यादा खर्चा किया है. 


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