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मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब एक्सचेंज डूबे तो भी सुरक्षित रहेंगे आपके क्रिप्टो एसेट्स

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद निवेशक अब न केवल अपने डिजिटल टोकन के वास्तविक मालिक माने जाएंगे, बल्कि उन्हें फ्रॉड, हैकिंग या एक्सचेंज दिवालिया होने जैसी स्थिति में कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

भारत की क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए यह हफ्ता ऐतिहासिक बन गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में क्रिप्टोकरेंसी को ‘संपत्ति’ (Property) का दर्जा दे दिया है. यह निर्णय लाखों भारतीय निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि अब किसी फ्रॉड, हैकिंग या एक्सचेंज के दिवालिया होने की स्थिति में भी उनके डिजिटल एसेट्स को कानूनी सुरक्षा मिलेगी.

क्रिप्टोकरेंसी को मिली ‘संपत्ति’ की मान्यता

यह फैसला 2024 में WazirX एक्सचेंज पर हुए साइबर हमले से जुड़े एक मामले में आया. उस दौरान एक निवेशक के XRP टोकन फ्रीज कर दिए गए थे. अदालत ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि क्रिप्टोकरेंसी एक अमूर्त संपत्ति (Intangible Property) है, जिसका स्वामित्व, उपयोग और ट्रस्ट में रख-रखाव किया जा सकता है. यह फैसला सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर की अदालतों के लिए एक मिसाल बनेगा.

‘यूजर’ नहीं, अब ‘मालिक’ माने जाएंगे निवेशक

कोर्ट ने कहा कि निवेशक अब केवल किसी एक्सचेंज के यूजर नहीं, बल्कि अपनी डिजिटल संपत्ति के वास्तविक मालिक हैं. यानी, WazirX जैसे एक्सचेंज केवल कस्टोडियन (रखवाले) की भूमिका निभाएंगे. वे निवेशकों की अनुमति के बिना उनके टोकन न तो फ्रीज कर सकते हैं और न ही किसी और को ट्रांसफर कर सकते हैं. कोर्ट ने WazirX को भी ऐसा करने से रोका है.

फ्रॉड, हैकिंग और दिवालियापन से मिलेगी कानूनी सुरक्षा

यह फैसला निवेशकों को अब वही सिविल प्रोटेक्शन देगा जो किसी अन्य चल संपत्ति (Movable Property) को मिलता है.

1. अगर कोई एक्सचेंज दिवालिया हो जाए, तो निवेशक NCLT में जाकर दावा कर सकते हैं कि उनके डिजिटल एसेट्स कंपनी की संपत्ति नहीं हैं.
2. किसी फ्रॉड या हैकिंग की स्थिति में अब निवेशक कोर्ट में जाकर अपने टोकन वापस पाने या मुआवजा मांगने का अधिकार रखते हैं.
3. धोखाधड़ी के मामलों में IT एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत FIR दर्ज कराई जा सकती है.
4. जरूरत पड़ने पर कोर्ट से टोकन ट्रांसफर रोकने के आदेश (Injunction) भी लिए जा सकेंगे.

टैक्स और रेगुलेशन पर असर नहीं पड़ेगा

हालांकि इस फैसले के बाद टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. निवेशकों को अभी भी अपनी कमाई पर 30% टैक्स (सेक्शन 115BBH) और 1% TDS (सेक्शन 194S) देना होगा.
लेकिन अब जब कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी को “संपत्ति” मान लिया है, तो सरकार का टैक्स वसूलने का दावा और मजबूत हो गया है. साथ ही, यह फैसला PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून) के तहत एक्सचेंजों की जिम्मेदारी भी बढ़ाता है, अब उन्हें अधिक पारदर्शी ऑडिट और सख्त KYC नियमों का पालन करना होगा.

क्यों है यह फैसला गेमचेंजर

यह निर्णय भारत के क्रिप्टो निवेशकों के अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता देता है. एक्सचेंज की गलती या हैकिंग की स्थिति में अब निवेशक अदालत में जाकर अपनी संपत्ति की रक्षा कर सकेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में क्रिप्टो को लेकर कानूनी स्पष्टता और निवेशकों के भरोसे दोनों को मजबूत करेगा.

 


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