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Happy Birthday : संजीव पुरी, ITC के बदलते दौर के वास्तुकार

ITC के चेयरमैन व एमडी 62 वर्षीय संजीव पुरी धैर्यपूर्ण क्रियान्वयन, समन्वित रणनीतियों के साथ ITC को एक विविधीकृत, तकनीक-प्रमुख समूह में बदल रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

फरवरी 2017 में, आईटीसी (ITC) में 31 साल की सेवा के बाद संजीव पुरी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया. यह पद उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी लेकर आया, क्योंकि वे उस महान लीडर वाई. सी. देवेश्वर की जगह ले रहे थे, जिन्होंने आईटीसी को सिगरेट-निर्भर कंपनी से एक विविध एफएमसीजी दिग्गज बनाने की नींव रखी थी.

इतने लंबे समय तक कंपनी से जुड़े रहने के कारण यह मान लेना आसान था कि पुरी को पहले से इस भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा था और शायद उन्हें इसकी जानकारी भी थी. लेकिन, सीईओ बनने के सिर्फ पांच महीने बाद BW बिजनेसवर्ल्ड को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि यह नियुक्ति उनके लिए भी चौंकाने वाली थी, उन्हें इसकी खबर सिर्फ थोड़े समय पहले ही दी गई थी.

हालांकि, यह साफ था कि उन्होंने देवेश्वर की नेतृत्व शैली को अच्छे से समझा और अपनाया था, खासकर व्यवसायिक मॉडल और रणनीतियों को निष्पक्ष रूप से परखने की क्षमता को, लेकिन पुरी सिर्फ एक विरासत को आगे नहीं बढ़ा रहे थे, उन्हें उसे तेज रफ्तार से आगे ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने एक बड़ा लक्ष्य रखा  2030 तक आईटीसी की आय को ₹1 लाख करोड़ तक पहुंचाना, जिसमें प्रमुख योगदान गैर-सिगरेट व्यवसायों से हो.

संख्याओं और सोच में बदलाव 

आठ साल बाद, जब उन्हें चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी बनाया गया, तब कंपनी की प्रगति ने दिखा दिया कि उनकी महत्वकांक्षा गलत नहीं थी. आईटीसी की सालाना आय वित्त वर्ष 2017 में ₹42,768 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹75,323 करोड़ हो गई थी. गैर-सिगरेट एफएमसीजी व्यवसाय का हिस्सा वित्त वर्ष 2014 में 17% था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 29% हो गया, जबकि सिगरेट का योगदान 62% से घटकर 45% रह गया. कुल मिलाकर, गैर-सिगरेट व्यवसाय का कुल हिस्सा 60% से ज्यादा हो गया.

लेकिन यह सफर आसान नहीं था. 2017 से 2019 के बीच आईटीसी के शेयर की कीमत लगभग स्थिर रही. कोरोना महामारी ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को बहुत प्रभावित किया. निवेशकों की नाराजगी बढ़ी और व्यवसाय को अलग करने (डिमर्जर) की मांगें तेज हुईं. फिर भी, पुरी ने अपने लक्ष्य पर टिके रहे और केवल जल्दी-जल्दी फायदे वाली फैसलों को नकारकर दीर्घकालिक लाभ पर ध्यान दिया.

जैसे उन्होंने 2021 में कहा था, "आईटीसी उन चीजों में विश्वास नहीं करता जो सिर्फ थोड़े समय के लिए उत्साह पैदा करें. हम लंबी अवधि का सोचते हैं. " उस समय डिमर्जर की संभावना को उन्होंने खारिज किया था, लेकिन सही समय का इंतजार कर रहे थे. उनका धैर्य 2023 में रंग लाया, जब होटल व्यवसाय के डिमर्जर की घोषणा हुई. अंत में जनवरी 2025 में, डिमर्जर पूरा होने पर पुरी ने इसे "स्टेकहोल्डर वैल्यू निर्माण के नए युग" के रूप में बताया और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के उज्जवल भविष्य पर अपना भरोसा जताया.
 

उपभोक्ता-केंद्रित समूह का निर्माण
जिम्मेदारी संभालने के वर्षों में, पुरी ने आईटीसी के पोर्टफोलियो को विविध बनाने के लिए आक्रामक रूप से काम किया. कंपनी ने डेयरी, चॉकलेट, कॉफी और हाइजीन जैसे उच्च-विकास क्षेत्रों में प्रवेश करते हुए अपने एफएमसीजी प्रयासों को और तेज किया.

इस उत्पाद विस्तार का समर्थन गहरे वितरण और डिजिटलीकरण ने किया. आईटीसी के स्टॉकिस्ट आउटलेट्स की संख्या चार गुना बढ़ गई है, और अब यह पहले की तुलना में 3.6 गुना अधिक बाजारों में सेवा दे रहा है. यह विस्तार पुरी की उस सोच को दर्शाता है जिसमें वे एक "भविष्य के लिए तैयार, उपभोक्ता-केंद्रित उद्यम" का निर्माण करना चाहते हैं. उपभोक्ता-केंद्रितता को केंद्र में रखकर, उनकी दृष्टि 1990 के दशक में भारत के उदारीकरण और इसकी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था की विशाल संभावनाओं के शुरुआती अनुभव से प्रेरित है.

एफएमसीजी के इस ज़ोर से पहले भी, आईटीसी के पास कृषि, पैकेजिंग, पेपरबोर्ड और हॉस्पिटैलिटी में एक मजबूत आधार था. हालांकि, पुरी के नेतृत्व में ध्यान केवल विविधता पर नहीं, बल्कि एकीकरण पर भी रहा. उन्होंने बार-बार समन्वय (synergy) को उजागर करने पर जोर दिया है. उदाहरण के लिए, आशीर्वाद आटे के लिए गेहूं आईटीसी के कृषि नेटवर्क से प्राप्त करना या खाद्य उत्पादों के लिए अपनी खुद की पैकेजिंग क्षमताओं का उपयोग करना. यह पूरे उद्यम के लिए मूल्य निर्माण का एक खाका है.

मूल्य-वर्धक अवसर
हाल के वर्षों में, आईटीसी ने रणनीतिक अधिग्रहणों के माध्यम से अपने फूड पोर्टफोलियो का आक्रामक रूप से विस्तार किया है, जिसमें Ample Foods और Meat & Spice (जो Prasuma और Meatigo ब्रांड के मालिक हैं) में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल है. यह एक चरणबद्ध सौदा था जिसकी प्रारंभिक कीमत ₹131 करोड़ से अधिक रही और इसके 2028 तक पूर्ण स्वामित्व की ओर बढ़ने के साथ और बढ़ने की संभावना है. इसने Yoga Bar में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी भी हासिल की और 24 Mantra Organic को ₹472.5 करोड़ में खरीदा, जिससे जैविक पैकेज्ड खाद्य बाजार में इसकी मौजूदगी मजबूत हुई.

ये अधिग्रहण केवल खाद्य क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं. मार्च 2025 में, आईटीसी ने बिड़ला समूह की कंपनी Century Textiles & Industries की इकाई Century Pulp & Paper (CPP) को ₹3,498 करोड़ में अधिग्रहित किया.

"यह अधिग्रहण हमारे मूल्य-वर्धक अवसरों को अपनाने की रणनीति के अनुरूप है," पुरी ने कहा. चाहे मूल क्षेत्रों में हो या संबद्ध क्षेत्रों में, लक्ष्य स्पष्ट है: आईटीसी के इकोसिस्टम को सार्थक, समन्वित पहलों से मजबूत बनाना.

तकनीक-प्रेरित सोच
पुरी मूल रूप से एक टेक्नोलॉजिस्ट हैं. वर्ष 2000 में, देवेश्वर ने उन्हें एक ई-कॉमर्स व्यवसाय खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. उस समय जब डिजिटल मुख्यधारा में नहीं आया था. हालांकि वह परियोजना सफल नहीं हुई, लेकिन इसने डिजिटल परिवर्तन में उनके दीर्घकालिक विश्वास की नींव रखी.

यह विश्वास 2024 में ITC Next Strategy के औपचारिक अनावरण के साथ साकार हुआ, जो दो वैश्विक मेगाट्रेंड्स डिजिटल और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित है.
इसका उद्देश्य है एक ऐसा "FutureTech" उद्यम बनना जो सभी व्यावसायिक कार्यों में चुस्त, उत्तरदायी और डिजिटल रूप से मूलभूत हो.

सस्टेनेबिलिटी के मोर्चे पर, आईटीसी ने जलवायु कार्रवाई, संसाधन दक्षता और समावेशी विकास पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. 2019 में, कंपनी ने दावा किया कि वह दुनिया की एकमात्र कंपनी थी जो एक दशक से अधिक समय तक जल, कार्बन और ठोस अपशिष्ट रीसाइक्लिंग में सकारात्मक रही.

लोगों को प्राथमिकता देना
पुरी की नेतृत्व की सोच के केंद्र में लोगों के प्रति उनका सम्मान है. वह अक्सर कर्मचारियों को केवल मशीन के पुर्जे नहीं, बल्कि सह-निर्माता के रूप में देखते हैं. उनका "महल निर्माण" का उदाहरण, जिसमें हर कार्यकर्ता अपने व्यक्तिगत कार्य से परे मिशन को समझता है, उनकी मानव-केंद्रित सोच का प्रतीक बन गया है.

यह सोच उनके व्यापक भारतीय व्यवसायिक भूमिका में भी परिलक्षित होती है. 2024–25 के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष के रूप में, पुरी एक विचारशील और विश्वसनीय आवाज बनकर उभरे हैं, जो नियामक सरलीकरण, स्थिर कर प्रणाली, सार्वजनिक-निजी सहयोग और दीर्घकालिक नीति ढांचे की वकालत करते हैं.

अगला अग्रदूत
जैसे ही वह आज 62 वर्ष के होते हैं, पुरी की पेशेवर यात्रा निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन साधने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. यह धैर्य बनाए रखने, अपने मार्ग पर टिके रहने और सही समय पर दिशा बदलने के बारे में है. यह आंतरिक ताकत का लाभ उठाने के साथ-साथ बाज़ार के साथ तालमेल में रहने के बारे में है.

कई मायनों में, ‘आईटीसी नेक्स्ट’ केवल एक रणनीति नहीं है. यह देवेश्वर के शिष्य से लेकर अपने विशिष्ट प्रभाव छोड़ने वाले नेता तक की उनकी दशकों लंबी यात्रा का चरम बिंदु है. जैसे-जैसे आईटीसी उपभोक्ता क्षेत्र में और गहराई से प्रवेश कर रहा है, यह भारत की अगली पीढ़ी की एफएमसीजी अग्रणी कंपनी बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है और इसमें कोई संदेह नहीं कि यह पुरी की विरासत का हिस्सा होगा.

आज यानी 18 जून को संजीव पुरी का जन्मदिन है और यह प्रस्तुति जन्मदिन के अवसर पर उन्हें समर्पित है. उनके नेतृत्व, दूरदर्शिता और आईटीसी को एक नए युग में ले जाने के सफर को सम्मानित करते हुए, यह लेख उनके योगदान और प्रेरणादायक यात्रा की झलक पेश करता है. 

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, श्री संजीव पुरी!


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