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Happiest Workplace Summit 2022 में एक्सपर्ट्स ने बताए जीवन में खुश रहने के लिए 6 डायमेंशन

अक्सर युवा हाई होप लेकर आते हैं और जब सबकुछ उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं होता, तो तनाव में घिर जाते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

यह हमेशा से ही बहस का मुद्दा रहा है कि यंग वर्कफ़ोर्स ज्यादा बेहतर है या सीज़न्ड वर्कफ़ोर्स. BW बिजनेस द्वारा ‘Happiest Workplace Summit 2022’ में जब इस मुद्दे पर बात हुई, तो एक्सपर्ट्स ने एकसुर में कहा कि कंपनी के लिए दोनों ही समानरूप से महत्वपूर्ण हैं. इस कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई. एक्सपर्ट्स ने अपने विचार प्रकट किए और बताया कि कंपनी और कर्मचारियों के लिए क्या ज़रूरी है.
हुआ पैनल डिस्कशन
कार्यक्रम में Young Vs Seasoned Employees: Difference in Point of View for Employee Wellbeing’ विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ. जिसमें Happy Plus Consulting की सीनियर डायरेक्टर श्यामाश्री चक्रवर्ती, Gennova Biopharmaceuticals Ltd के ह्यूमन रिसोर्सेज के प्रमुख मेजर विशाल कराड और Sesa Goa Iron Ore के चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर प्रवीन जॉर्ज ने हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने विभिन्न सवालों के जवाब दिए. 

युवाओं में कम हुआ पेशन्स लेवल 
पैनल डिस्कशन की शुरुआत करते हुए श्यामाश्री चक्रवर्ती ने कहा कि किसी भी कंपनी के लिए यंग और सीज़न्ड दोनों ही वर्कफ़ोर्स ज़रूरी होती है. युवाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं का पेशन्स लेवल कम हुआ है और इसकी कई वजह हैं. एक शोध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 18 से 29 वर्ष के लोगों में स्ट्रेस लेवल अधिकतम होता है, जो कभी-कभी आत्महत्या का कारण भी बन जाता है. इस जनरेशन के लिए तनाव और वर्क के बीच संतुलन बनाना बहुत ज़रूरी है. अक्सर युवा हाई होप लेकर आते हैं और जब सबकुछ उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं होता, तो तनाव में घिर जाते हैं. जहां तक अनुभवी लोगों की बात है तो वह इस स्थिति से गुजर चुके होते हैं, उन्हें पता होता है कि इस स्थिति से कैसे बाहर निकला जाता है. इसलिए हमें दोनों तरह के कर्मचारियों की ज़रूरत होती है, किसी एक से काम नहीं चल सकता. 

मेजर ने बताया क्या है स्ट्रेस 
आब आगे बढ़ाते हुए मेजर विशाल ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि यंग और सीज़न्ड क्या होता है. ये केवल एक फिजिकल स्टेटस है, मेंटल नहीं. जहां तक स्ट्रेस की बात है, तो मुझे लगता है कि जो भी बदलाव आपको मानसिक, शारीरिक रूप से परेशान कर रहा है वो स्ट्रेस है. और वेलबीइंग वो है, जो मुझे खुश रहने में मदद करता है. मेजर ने कहा कि हैप्पीनेस की तरह वेलबीइंग भी कई प्रकार की होती है और एक ही फ़ॉर्मूला सभी पर लागू नहीं किया जा सकता. इसलिए बतौर HR हमारा काम लोगों की ज़रूरत के हिसाब से उनके लिए विकल्प निर्मित करना है, न कि उन्हें पहले से मौजूद विकल्प में जबरन धकेलना.

हैपीनेस यानी कर्मचारियों को जोड़े रखना
प्रवीन जॉर्ज ने अपने विचार रखते हुए कहा, ‘हमारी कंपनी की वर्कफ़ोर्स में दोनों तरह के कर्मचारी हैं. हम सबसे बड़े कैंपस रिक्रूटर्स में शामिल हैं और फ्रेशर को भी हायर करते हैं. एम्प्लॉयी वेलबीइंग हमारी संस्था का इंटिग्रेटेड हिस्सा है. जब एम्प्लॉयी वेलबीइंग कहते हैं तो यह सिर्फ शरीरिक, मानसिक, भावनात्मक तक ही सीमित नहीं है, यह उससे कहीं आगे है. हमारा लीडर्स बनाने का इतिहास है और यह तभी संभव हो पाया है, क्योंकि हमारे कर्मचारी खुश रहते हैं. हमारे लिए हैपीनेस है अपने कर्मचारियों को साथ जोड़े रखना.

96% रिटेंशन लेवल
मेजर विशाल ने अपनी कंपनी की सफलता के बारे में बताते हुए कहा कि हम कर्मचारियों के पास जाते हैं, उनसे उनकी ज़रूरतें पूछते हैं और फिर उन ज़रूरतों को पूरा करने का प्रयास करते हैं. हम 'उम्मीद' नाम से प्रोग्राम चलाते हैं जहां कर्मचारी ट्रेंड मनोचिकित्सक सेकोई भी बात साझा कर सकते हैं. हम हमारे फाइनेंशियल और फिजिकल वेलबीइंग सपोर्ट प्रदान करते हैं. हमारी कंपनी में पिछले 16 सालों से रिटेंशन लेवल 96% है, जो दर्शाता है कि कर्मचारी हमारे साथ कितने खुश हैं. 

हम कोई और बनना चाहते हैं
श्यामाश्री चक्रवर्ती ने आज के बदलते परिवेश पर बात करते हुए कहा, ‘आज हम कोई और बनना चाहते हैं. यदि कोई विदेश जाता है, तो हम भी जाना चाहते हैं. कोई और बनने के चलते हम भूल जाते हैं कि हमारे अंदर क्या यूनिक है और हम क्या चाहते हैं. उन्होंने मनुष्य के जीवन में खुश रहने के लिए 6 डायमेंशन का भी जिक्र किया. 1. आपका बीइंग क्या है?, उदाहरण के लिए मेंटल बीइंग, फिजिकल, फाइनेंसियल बीइंग. 2. आपका Mean क्या है, मतलब उद्देश्य. 3. अचीवमेंट, आप क्या हासिल करना चाहते हैं. 4. वर्कप्लेस, 5. रिलेशनशिप, जिसे हम सबसे ज्यादा नज़रंदाज करते हैं और 6. हम ये सब कैसे कर सकते हैं? इन सभी को प्राप्त करने के लिए हमें हैप्पी हेबिट निर्मित करनी होंगी. जिस भी काम में हमें खुशी मिलती है, उसके लिए वक्त निकालना होगा. प्रवीन जॉर्ज ने भी श्यामाश्री से सहमति जताते हुए कहा कि जब कर्मचारियों को अपने काम में आनंद आएगा, तभी वह कुछ ज्यादा करने की स्थिति में होंगे.


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