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FY26 में 4% वृद्धि की राह पर पैसेंजर व्हीकल उद्योग, टैक्स रेशनलाइजेशन बना गेम-चेंजर
CareEdge Ratings की 19 नवंबर 2025 को जारी ताज़ा आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि मुख्य रूप से टैक्स रेशनलाइजेशन, घटती महंगाई, सस्ती फाइनेंसिंग और बेहतर हो रहे उपभोक्ता भरोसे से प्रेरित होगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत का पैसेंजर व्हीकल (PV) उद्योग वित्त वर्ष 2026 में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सकता है. CareEdge Ratings की 19 नवंबर 2025 को जारी ताज़ा आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि मुख्य रूप से टैक्स रेशनलाइजेशन, घटती महंगाई, सस्ती फाइनेंसिंग और बेहतर हो रहे उपभोक्ता भरोसे से प्रेरित होगी. रिपोर्ट बताती है कि यह वर्ष बाज़ार-चालित विस्तार की बजाय नीतिगत बदलावों से संचालित वास्तविकignment का होगा, खासकर दो साल की हाई-बेस मॉडरेशन के बाद.
FY25 में उद्योग ने 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो CareEdge की उम्मीदों के अनुरूप रही. महामारी के बाद उछाल के सामान्य होने और एंट्री-लेवल कारों की कमजोर बिक्री ने कुल डिमांड को सीमित रखा. SUVs ने वॉल्यूम में अपना दबदबा बनाए रखा, जहां यूटिलिटी व्हीकल्स FY25 में 14 प्रतिशत बढ़े, जबकि FY24 में यह वृद्धि 21.8 प्रतिशत रही थी. दूसरी ओर, पैसेंजर कारों की बिक्री FY25 में 11.5 प्रतिशत घट गई, जो छोटे कार सेगमेंट में वहन क्षमता की समस्या और उपभोक्ता पसंद में बदलाव को दर्शाती है.
FY26 की पहली छमाही में कुल PV वॉल्यूम 1.8 प्रतिशत की मामूली दर से बढ़े. छोटे कार सेगमेंट में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि SUVs 3.8 प्रतिशत बढ़ीं. मोड़ तब आया जब GST रेशनलाइजेशन लागू हुआ, जिसके तहत छोटे कारों पर टैक्स 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया और SUVs पर लगने वाला सेस पूरी तरह हटा दिया गया. अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच PV वॉल्यूम 3.9 प्रतिशत सालाना बढ़े. छोटे कार सेगमेंट में गिरावट घटकर सिर्फ 0.6 प्रतिशत रह गई, जबकि SUVs की वृद्धि 6.2 प्रतिशत पर पहुंच गई. अक्टूबर महीने में PV वॉल्यूम में 15 प्रतिशत की तेज़ बढ़त दर्ज की गई.
CareEdge Ratings का कहना है कि टैक्स कटौती से वहन क्षमता पहले से बेहतर हुई है, खासकर पहली बार कार खरीदने वालों के लिए, और आने वाले 12–24 महीनों में एंट्री-लेवल डिमांड के पुनर्जीवित होने की उम्मीद है. FY26 के लिए रिपोर्ट में मैक्रो परिस्थितियाँ भी अनुकूल बताई गई हैं, जिनमें लगातार रेपो रेट कटौती से लोन सस्ता होना और यूनियन बजट 2025–26 में Rs 12 लाख तक आय वाले व्यक्तियों को आयकर राहत शामिल है.
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