होम / बिजनेस / 12 साल बाद भारत के इस सेक्टर में कम हुई ग्रोथ, जानिए क्या रहे कारण?
12 साल बाद भारत के इस सेक्टर में कम हुई ग्रोथ, जानिए क्या रहे कारण?
मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि PMI सर्वेक्षण के अनुसार देश में न तो सर्विस सेक्टर में और न ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रोजगार में किसी तरह का बदलाव हुआ है, बावजूद उसके ये कमी देखी जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
एक ओर जहां दुनियाभर की कई कंपनियों में कॉस्ट कटिंग के बीच लगातार नौकरियों में कमी हो रही है वहीं दूसरी ओर भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ में पहली बार कमी देखी गई है. फरवरी में ये ग्रोथ रेट 12 साल के उच्च स्तर 59.4 से गिरकर मार्च में 57.8 हो गई है. क्योंकि मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि लागत पर दबाव होने के कारण नए व्यवसायों और उत्पादन में कमी आई है. इसे इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है. लेकिन जानकार कुछ और वजहों को भी इसके पीछे देख रहे हैं. ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी S & P के सर्वेक्षण में हेडलाइन का आंकड़ा अगस्त 2021 से लगातार जारी है. इस सर्वे में 50 से ऊपर रेटिंग का प्रिंट सर्विस सेक्टर के विस्तार को दिखाता है तो उससे नीचे होने पर ये कमी का संकेत देता है. सर्वेक्षण ये भी कह रहा है कि मांग में बढ़ोतरी और नए कारोबारी लाभ के चलते उत्पादन बढ़ा है. भले ही नए बिजनेस न शुरू हुए हों लेकिन मांग, प्रतिस्पर्धा और डिस्ट्रीब्यूसन के प्रयासों से बिक्री में मदद मिली है. इससे बढ़ोतरी भी हुई है. अंतर्राष्ट्रीय बिक्री में बढ़ोतरी होने के चलते ओवरऑल बिजनेस में तेजी देखी गई थी, जिसके चलते कंपनियों की एक्सटर्नल (बाहरी) मांग में बढ़ोतरी हुई.
क्या कहते हैं इस पर एक्सपर्ट
S & P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में अर्थशास्त्र के सहयोगी निदेशक पोलीन्ना डी लीमा ने कहा कि भारत के सेवा क्षेत्र में फरवरी में जो स्पीड बनी है उसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत में नए व्यापार, और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण तेजी बनी रहेगी. भारतीय सेवा फर्मों में इनपुट कीमतों में वृद्धि के बावजूद, हाई फूड डिमांड, ईंधन, परिवहन और मजदूरी लागत में बढ़ोतरी के बीच सर्वे में भाग लेने वाले ज्यादातर लोगों ने कहा कि फरवरी से खर्चों में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉ. लीमा का कहना है कि सर्विस इकोनॉमी में इनपुट प्राइस प्रेसर होने के कारण सब्सिडी जारी है, फिर भी, सेवा सेक्टर की बड़ी कंपनियों के एक बड़े हिस्से ने बढ़ती लागत के खिलाफ बचाव के लिए अपनी बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी को रास्ता अपनाया है.
रोजगार में जारी है कमी
रोजगार में लगातार कमी के बीच न तो सर्विस सेक्टर में और न ही मैन्युफैक्चरिंग में किसी तरह का बदलाव है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कंपनियों पर ऑपरेटिंग कॉस्ट का दबाव है जिसके चलते उन्होंने हाईरिंग रोकी हुई है. ज्यादातर सर्विस प्रोवाइडरों को लगता है कि साल के अंत तक ही हालातों में सुधार आएगा.
ग्रोथ में कमी की आशंका
मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि सर्विस सेक्टर में मामूली गिरावट के बीच विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत को लेकर अपने ग्रोथ रेट के अनुमानों में कुछ कमी जताई है. दोनों संस्थाओं ने भारत के लिए अपने FY24 आर्थिक विकास के अनुमानों को क्रमशः 30 और 80 आधार अंकों से घटाकर 6.3 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत कर दिया, वैश्विक और घरेलू दोनों कारणों से पैदा होने वाले विकास के रिस्क का हवाला देते हुए मौद्रिक नीति का कड़ा होना, भू-राजनीतिक तनावों का बिगड़ना और सरकार के मौजूदा खर्च में कमी को इसकी वजह बतायाद है.
मुश्किल दौर में फिर अडानी ने मारी बाजी
टैग्स