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सऊदी अरब में वेदांता को बड़ी सफलता: अनिल अग्रवाल की कंपनी को मिला कॉपर–गोल्ड खनन का लाइसेंस
वेदांता को मिला यह लाइसेंस न सिर्फ कंपनी की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि सऊदी अरब में तेजी से विकसित हो रहे खनन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta) को सऊदी अरब में तांबा और सोना निकालने के लिए आधिकारिक लाइसेंस मिल गया है. यह कदम न सिर्फ कंपनी के ग्लोबल एक्सपेंशन को नया आयाम देगा, बल्कि सऊदी अरब की ‘विजन 2030’ खनन रणनीति के लिए भी बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है.
कॉपर और गोल्ड के लिए मिला खजाने का लाइसेंस
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल लंबे समय से विदेशों में खनन कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं. इसी कड़ी में कंपनी को सऊदी अरब में ‘रेड एंड येलो मेटल्स’—यानी कॉपर और गोल्ड की खोज और खुदाई का लाइसेंस मिल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेदांता आने वाले छह से आठ महीनों में पश्चिमी सऊदी अरब में खनन कार्य शुरू कर देगी. यह पहली बार होगा जब कंपनी आधिकारिक रूप से इस रेगिस्तानी देश में खनिज खोज करेगी.
कई ग्लोबल कंपनियों को भी मिला लाइसेंस
वेदांता के साथ दुनिया की कई दिग्गज माइनिंग कंपनियों को भी सऊदी सरकार ने मंजूरी दी है. इनमें चीन की Zijin Mining Group और ऑस्ट्रेलिया की Gina Rinehart की Hancock Prospecting शामिल हैं. इससे साफ है कि सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय प्लेयर्स को आकर्षित कर खनन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है.
सऊदी अरब में सप्लाई चेन खड़ी करने की योजना
जानकारी के अनुसार, कंपनी की योजना सिर्फ खनिज खोजने तक सीमित नहीं है. लक्ष्य यह है कि सऊदी अरब में खनन से लेकर धातु तैयार करने तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाए. सऊदी अरब ने लगभग 100 अरब डॉलर के निवेश अवसरों की घोषणा की है, लेकिन अभी तक वह बड़ी माइनिंग कंपनियों को बड़े पैमाने पर आकर्षित नहीं कर पाया है. ऐसे में वेदांता का यह कदम स्थानीय खनन उद्योग को नई दिशा दे सकता है.
पहली खदान का कॉन्ट्रैक्ट जनवरी में
वेदांता के कॉपर और निकेल बिजनेस (भारत और खाड़ी देशों) के सीईओ पुनीत खुराना ने बताया कि कंपनी जनवरी के मध्य तक जबा अल-सैयद बेल्ट में स्थित अपनी पहली खदान के लिए खोज और विकास का कॉन्ट्रैक्ट जारी कर देगी. उन्होंने कहा, “भारत में हमने धातुओं की पूरी वैल्यू चेन विकसित की है. इसलिए हमें पता है कि क्या करना है और कैसे करना है. हम यह क्षमता सऊदी में भी ट्रांसफर करने को तैयार हैं.”
2 अरब डॉलर की कॉपर प्रोसेसिंग डील पहले ही फाइनल
वेदांता पहले ही सऊदी अरब के साथ कॉपर प्रोसेसिंग सुविधाएं स्थापित करने के लिए 2 अरब डॉलर के निवेश का समझौता कर चुकी है. इसे सऊदी खनन रणनीति में अब तक की किसी भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी का सबसे बड़ा भरोसा माना जा रहा है.
सऊदी अरब की ‘विजन 2030’ में खनन की बड़ी भूमिका
सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. खनन इस बदलाव का तीसरा प्रमुख स्तंभ है. सरकार का अनुमान है कि देश में तांबा, बॉक्साइट और फॉस्फेट जैसे खनिजों का भंडार 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता है. ये खनिज इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.
ग्लोबल कंपनियों के लिए तैयार हो रहा नया माइनिंग हब
सऊदी अरब का लक्ष्य है कि 2030 तक खनन से होने वाली आय को चार गुना बढ़ाया जाए. इसके लिए वह दुनिया की शीर्ष माइनिंग कंपनियों को आकर्षित कर रहा है. कनाडा की Barrick Gold Corp यहां पहले से एक तांबे की खदान चला रही है. हाल ही में Hancock Prospecting और Zijin Mining को भी नए अधिकार मिले हैं, और अगले पांच साल में उत्पादन शुरू करने की योजना है.
टैग्स copper–gold mining license