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सरकारें कर रहीं अनदेखी, कचरे से 95% तक घट सकता है मीथेन उत्सर्जन : GAIA रिपोर्ट
GAIA की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि सरकारें वास्तव में मीथेन उत्सर्जन घटाने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें “ज़ीरो वेस्ट” मॉडल अपनाना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
दुनिया भर की सरकारें कचरे से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने के आसान और सस्ते उपायों को नजरअंदाज कर रही हैं. ग्लोबल एलायंस फॉर इन्सिनरेटर अल्टरनेटिव्स (GAIA) की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अधिकांश देशों की जलवायु योजनाएँ (NDCs) केवल कचरे के निपटान पर केंद्रित हैं, जबकि “जीरो वेस्ट” रणनीतियाँ उत्सर्जन घटाने के साथ-साथ रोजगार और सामाजिक समानता को भी बढ़ावा दे सकती हैं. रिपोर्ट में सरकारों से अपील की गई है कि वे आने वाले COP30 सम्मेलन में इस दिशा में ठोस कदम उठाएँ.
GAIA ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु निकाय को सौंपी गई 14 देशों की NDC योजनाओं का अध्ययन किया. इन देशों को उनकी जलवायु महत्वाकांक्षा और “जीरो वेस्ट” (शून्य कचरा) रणनीतियों के माध्यम से उत्सर्जन घटाने की क्षमता के आधार पर चुना गया था. ये सभी देश ग्लोबल मीथेन प्लेज और ऑर्गेनिक वेस्ट से मीथेन घटाने की घोषणा पर हस्ताक्षर कर चुके हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ चार देशों की योजनाओं में कुछ सकारात्मक तत्व मिले, वहीं दस योजनाएँ कमजोर या हानिकारक पाई गईं. किसी भी देश ने प्रभावी “ज़ीरो वेस्ट” रणनीति के तहत संभावित उत्सर्जन कटौती और सामाजिक लाभों का पूरा उपयोग नहीं किया.
रिपोर्ट में शामिल प्रमुख निष्कर्ष
1. ब्राजील ने अपने पिछले NDC की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है, जिसमें ठोस नीति ढाँचा और जैविक कचरे के प्रबंधन के ठोस कदम शामिल हैं.
2. बांग्लादेश, चिली, कोलंबिया और नाइजीरिया ने "न्यायसंगत परिवर्तन" (Just Transition) पर ज़ोर दिया, जिसमें पुनः प्रशिक्षण, कौशल विकास और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की समस्याओं का समाधान शामिल है.
3. अधिकांश देशों की योजनाओं में कचरा बीनने वाले श्रमिकों (waste pickers) को शामिल नहीं किया गया, जबकि वे “ज़ीरो वेस्ट” रणनीतियों को लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
4. नेपाल, उरुग्वे, कोलंबिया, मोरक्को और बांग्लादेश ने "वेस्ट-टू-एनर्जी" (कचरे से ऊर्जा उत्पादन) संयंत्र स्थापित या विस्तार करने की योजना बनाई है, जिसे इन्सिनरेशन भी कहा जाता है. यह प्रक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है, पुनर्चक्रण को कमजोर करती है और नौकरियाँ छीनती है.
GAIA की नीति एवं शोध अधिकारी डून मून ने कहा, “यह सकारात्मक है कि राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं में अब कचरे से उत्सर्जन घटाने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है. लेकिन ज्यादातर योजनाएँ कचरे के निपटान पर केंद्रित हैं, न कि उसे रोकने या पुनर्प्राप्त करने पर. हमारा अध्ययन बताता है कि समुदाय-आधारित ‘जीरो वेस्ट’ पहलें मीथेन उत्सर्जन घटाने के सबसे तेज और किफायती तरीकों में से एक हैं.”
रिपोर्ट बताती है कि कचरा मानव-जनित मीथेन उत्सर्जन का 20% हिस्सा है, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है. यदि स्रोत पर अलगाव, कंपोस्टिंग, बायो-स्टेबलाइजेशन और डंपसाइट्स के लिए बायो-कवर जैसी बेहतरीन तकनीकें अपनाई जाएँ, तो मीथेन उत्सर्जन में 95% तक की कमी लाई जा सकती है और साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं.
इसके अलावा, 70% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन "मटीरियल इकॉनमी" से आता है. “रिड्यूस, रियूज, रीसायकल” सिद्धांत पर आधारित “ज़ीरो वेस्ट” रणनीति उत्पादन से लेकर उपभोग तक हर चरण में उत्सर्जन घटा सकती है.
अध्ययन में शामिल देशों में बांग्लादेश, ब्राज़ील, चिली, कोलंबिया, इक्वाडोर, इथियोपिया, केन्या, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, पनामा, उरुग्वे, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल थे. रिपोर्ट का फोकस ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) के देशों पर है, जो उचित वित्तीय सहयोग के साथ इन्सिनरेशन जैसी गलत समाधानों को छोड़कर सीधे “जीरो वेस्ट” मॉडल अपनाने की दिशा में बढ़ सकते हैं.
GAIA की वैश्विक जलवायु कार्यक्रम निदेशक मैरिएल विलेला ने कहा, “हम सरकारों से आग्रह करते हैं कि वे ‘जीरो वेस्ट’ को एक जलवायु समाधान के रूप में अपनाएँ, जिसमें कचरा बीनने वाले और समुदाय केंद्र में हों. आने वाला COP30 सम्मेलन इस दिशा में सफल उदाहरण साझा करने और जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों तक वित्त पहुँचाने का सही अवसर है.”
GAIA ने चिली, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका के लिए “जीरो वेस्ट” को लागू करने हेतु विस्तृत नीति सिफारिशें भी प्रकाशित की हैं.
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