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मार्च 2026 तक हाईवे बैकलॉग खत्म करने की तैयारी में सरकार, जानें अर्थव्यवस्था पर इसका असर
राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लंबित कामों का निपटारा न केवल सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इससे रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक सकारात्मक बदलाव आएगा.
रितु राणा 5 months ago
देश में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के पूरे बैकलॉग को खत्म करने का लक्ष्य तय किया है. यह कदम न केवल देशभर में सड़क और हाईवे नेटवर्क को आधुनिक रूप देने में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिलेंगे. निर्माण गतिविधियों में तेजी, रोजगार के नए अवसर, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में सुधार, निवेश का बेहतर प्रवाह और क्षेत्रीय विकास, इन सभी पर इस पहल का बड़ा असर पड़ने वाला है. सरकार के इस फैसले से उद्योग, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं. आइए विशेषज्ञों की नजर से समझते हैं कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा.
लंबित परियोजनाओं का इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के लंबित कामों को पूरा करने से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश और निर्माण गतिविधियों में तेज़ी आएगी. यह कदम छोटे और बड़े व्यवसायों, गिग इकॉनमी और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा. एयू रियल एस्टेट डायरेक्टर आशीष अग्रवाल का कहना है कि नेशनल हाईवे के लंबित कामों को पूरा करने का सरकार का निर्णय देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा. जैसे‑जैसे सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होती है, उद्योग तेजी से बढ़ते हैं और नए विकास क्षेत्रों में हाउसिंग, कमर्शियल और रिटेल स्पेस की मांग बढ़ जाती है. दिल्ली‑मेरठ NH‑24 ने उदाहरण के तौर पर एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ पूरे क्षेत्र का रूप बदल दिया. बेहतर सड़कें स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जीवनशैली सुविधाओं के विकास को भी बढ़ावा देती हैं.
निर्माण उद्योग और उपकरण कंपनियों को नया उत्साह
सरकार के इस फैसले से कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री में भी नई रफ्तार आ गई है. इससे मशीनरी की मांग बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग होगा और प्रोजेक्ट्स की गति तेज होगी. एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) क्रेन्स के सीईओ मनीष माथुर का कहना है कि साल 2026 तक नेशनल हाईवे से जुड़े लंबित कामों को तेजी से निपटाने के सरकार के फैसले ने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री को नई रफ़्तार दे दी है. यह कदम बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़ाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा. कुल मिलाकर, यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा देगा और भारत की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ाने का शक्तिशाली कदम साबित होगा. उन्होंने कहा है कि अगर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, तो न केवल भूमि, मजदूर और मशीनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, सामुदायिक सुविधाओं आदि क्षेत्रों में समन्वित विकास संभव हो सकेगा.
प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगा लाभ
रोड & हाईवेज, रॉडिक कंसल्टेंट्स के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) होश राम यादव का कहना है कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लंबित कामों को पूरा करना है, जो भारत में बुनियादी ढाँचे की तेजी से वृद्धि और विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। सड़कें और राजमार्ग देश के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं, औद्योगिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, पर्यटन क्षमता को बढ़ाते हैं और समग्र आर्थिक प्रगति में बड़ी भूमिका निभाते हैं। रुकी हुई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने से काम की बाधाएँ कम होंगी, निवेश और पूंजी का बेहतर उपयोग होगा, गिग और कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार के नए अवसर बनेंगे और इससे छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। तेज गति से होने वाले इस विकास से लॉजिस्टिक व्यवस्था बेहतर होगी, माल ढुलाई तेज होगी, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और आर्थिक मंदी का असर कम करने में मदद मिलेगी। जैसे-जैसे परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम सस्टेनेबल, हाई-इम्पैक्ट ग्रोथ देने के लिए बेहतर स्थिति में होगा।"
रियल एस्टेट, व्यवसाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी इस पहल से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. देरी से चल रहे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने से लागत बढ़ने से रोका जा सकेगा, कैश फ्लो मजबूत होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के CFO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल ने कहा है कि सरकार द्वारा मार्च 2026 तक नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लंबित कामों को पूरा करने की तेज कोशिश से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा और सप्लाई‑चेन ज्यादा प्रभावी बनेगी. डेवलपर्स के लिए लगभग 60 प्रतिशत देरी से चल रहे प्रोजेक्ट को जल्दी मंजूरी और समय पर फंड जारी करके पूरा करना आसान होगा. इससे रेजिडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट की मांग बढ़ेगी और रोज़ाना निर्माण की गति भी तेज होगी. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से न सिर्फ बड़े शहरों और औद्योगिक हब्स को लाभ होगा, बल्कि ग्रामीण एवं उपशहरी इलाके भी तेजी से जुड़े होंगे, जिससे सप्लाई चेन, रोजगार, बाजार पहुंच और सामाजिक सुविधाओं में सुधार संभव होगा.
मौजूदा स्थिति: नेटवर्क, निर्माण की रफ्तार और महत्व
जानकारी के अनुसार 2014 में भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क करीब 91,287 किलोमीटर था; अब (2025 तक) यह बढ़कर लगभग 1,46,204 किलोमीटर हो चुका है, करीब 60 % की वृद्धि दर्ज हुई है. देश में लगभग 1,240 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 29,400 किलोमीटर लंबी हैं, और इनपर अनुमानित लागत ₹7.8 लाख करोड़ है. वित्त वर्ष 2024–25 में, NHAI ने 5,614 किलोमीटर राजमार्ग बनाए, जो कि उस वर्ष के लिए लक्ष्य से भी अधिक था. इसके अलावा, एक्सप्रेसवे/ हाई‑स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क में भी विस्तार हुआ है, 2014 में मात्र 93 किलोमीटर था, जो अब लगभग 5,110 किलोमीटर हो गया है.
इन तथ्यों से स्पष्ट है कि लंबे समय से जारी हाईवे‑विस्तार कार्यक्रम ने अब तक महत्वपूर्ण प्रगति की है; लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स अधूरे (backlog) हैं, जिन्हें 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
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