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आखिर ऐसा क्या हुआ कि Dairy Products इम्पोर्ट करने की आ गई नौबत?

दूध के दाम पिछले कुछ समय में कई बार बढ़ चुके हैं. माना जा रहा है कि कीमतों में अभी और इजाफा हो सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारत को डेयरी प्रोडक्ट्स (Dairy Products) का आयात करना पड़ सकता है. इस खबर के सामने आने के बाद से ही यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर ऐसी नौबत आई कैसे? भारत में बड़े पैमाने पर दूध का उत्पादन होता है. FAOSTAT के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है. तो फिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार डेयरी प्रोडक्ट्स आयात करने पर विचार कर रही है?

इस वजह से बढ़ रहे दाम
दूध के दामों में पिछले 15 महीनों में 12 से 15 फीसदी की तेजी आई है, जो आगे भी जारी रह सकती है. यानी दूध अभी और महंगा हो सकता है. दूध की कीमतों में तेजी दो कारणों से आ रही है. पहला - मवेशियों का चारा लगातार महंगा हो रहा है और दूसरा - फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में दूध के उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. दरअसल, मवेशियों में लंपी बीमारी के कारण दूध का उत्पादन प्रभावित हुआ है. जबकि डिमांड 8 से 10 प्रतिशत बढ़ गई है. 

घी और मक्खन की किल्लत
मीडिया रिपोर्ट्स में सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि दूध उत्पादन वर्ष 2021-22 में 6.25 प्रतिशत फीसदी बढ़कर 22.1 करोड़ टन रहा था. उससे पहले 2020-21 यह में 20.8 करोड़ टन था, लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 में इसमें बढ़ोत्तरी नहीं हुई. बता दें कि भारत ने आखिरी बार साल 2011 में डेयरी उत्पादों का आयात किया था. अब वही स्थिति फिर से बन रही है. खासकर, घी और मक्खन जैसे उत्पादों को आयात करना पड़ सकता है. पशुपालन और डेयरी सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर डेयरी उत्पादों के आयात पर विचार किया जा सकता है. 

इस वजह से होगा आयात!
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में दूध उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. इस कारण डेयरी प्रोडक्ट्स डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर आ गया है. उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों में दूध के स्टॉक की स्थिति का आकलन करने के बाद यदि जरूरी हुआ, तो सरकार घी और मक्खन जैसे उत्पादों के आयात का फैसला ले सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में दूध की सप्लाई में कोई बाधा नहीं है. स्किम्ड मिल्क पाउडर का पर्याप्त भंडार है, लेकिन फैट, मक्खन और घी का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले कम है.

चारे की समस्या बढ़ी 
पशुपालन और डेयरी सचिव सिंह ने यह भी कहा कि फिलहाल आयात फायदेमंद नहीं है, क्योंकि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई है. हम देश के बाकी हिस्सों में उत्पादन का आकलन करेंगे और फिर कोई फैसला लेंगे. गौरतलब है कि पिछले साल लंपी बीमारी से 1.89 लाख मवेशियों की मौत हो गई थी. इससे दूध का उत्पादन तो नहीं बढ़ा, जबकि मांग में तेजी दर्ज की गई. सिंह ने माना कि चारे की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दूध के दामों में इजाफा हो रहा है. उन्होंने कहा कि चारे की आपूर्ति में समस्या है क्योंकि पिछले चार वर्षों में चारे की फसल का रकबा भी स्थिर रहा है.

भारत है दुनिया में नंबर 1 
हाल ही में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने लोकसभा में बताया था कि 2021-22 में वैश्विक दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी. साल 2014-15 और 2021-22 के बीच देश में मिल्क प्रोडक्शन में 51 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी. Food & Agriculture Organization Corporate Statistical Database (FAOSTAT) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है.
 


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