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50% अमेरिकी शुल्क से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान तलाश रही सरकार : पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग संगठनों से की बातचीत, वैकल्पिक बाजारों और नीति हस्तक्षेपों पर जोर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत सरकार अमेरिका द्वारा कई भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% तक के आयात शुल्क के प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय हो गई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संघों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि सरकार कारोबारी सुगमता, नीतिगत हस्तक्षेप और लक्षित व्यापार सहयोग के जरिए मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है.
गुणवत्ता सुधार और वैकल्पिक बाजारों की तलाश पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैठक में पीयूष गोयल ने निर्यातकों से अपील की कि वे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारें, वैश्विक मानकों के अनुरूप ढलें, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाएं और वैकल्पिक निर्यात बाजारों की खोज करें. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यापारिक परिदृश्य को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है, जिन पर सरकार तेजी से काम कर रही है.
सरकार की अटूट प्रतिबद्धता: वाणिज्य विभाग का बयान
वाणिज्य विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया, "वैकल्पिक व्यवस्थाओं की जरूरत पर व्यापक सहमति बनी है. सरकार निर्यात में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है." बयान में आगे कहा गया कि "गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है."
निर्यातकों ने उठाई अतिरिक्त लागत की भरपाई और योजनाओं की मांग
बैठक में मौजूद निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न हुई चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा पर इसके असर को लेकर चिंता जताई. निर्यातकों ने सरकार से आग्रह किया कि 50% टैरिफ के कारण उत्पन्न लागत बोझ को साझा किया जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि प्रस्तावित निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के तहत योजनाओं को जल्द लागू किया जाए.
EPM योजना अब भी प्रतीक्षा में, वित्त मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श जारी
बता दें कि सरकार ने फरवरी 2025 के बजट में ₹2,250 करोड़ के निर्यात संवर्धन मिशन की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर अभी वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा जारी है. इस मिशन के तहत WTO-अनुरूप हस्तक्षेप, सस्ती फाइनेंसिंग और नए बाजारों तक आसान पहुंच जैसे कदम शामिल किए जाने हैं.
ज्यादा प्रभावित सेक्टर्स पर भी विशेष ध्यान
सरकार का फोकस उन श्रम प्रधान सेक्टर्स पर भी है, जो अमेरिकी शुल्क से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इनमें शामिल हैं:
- कपड़ा और परिधान
- रत्न एवं आभूषण
- चमड़ा एवं फुटवियर
- रसायन और इंजीनियरिंग उत्पाद
- कृषि एवं समुद्री उत्पाद
सरकार छोटे निर्यातकों को नकदी संकट से उबारने, कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने, और नौकरियों की रक्षा करने जैसे उपायों पर भी काम कर रही है.
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