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भविष्‍य में इस एनर्जी से काम करेंगी Google, Microsoft और Amazon, जानते हैं क्‍या है मकसद 

कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए एक ओर जहां कंपनियां सोलर और विंड एनर्जी की ओर शिफ्ट कर रही हैं वहीं दूसरी ओर ये कंपनियां उससे एक कदम आगे निकलते हुए कुछ और भी तैयारी कर रही हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दुनिया में मौजूदा समय में सस्‍टेनेबिलिटी को लेकर तेजी से काम हो रहा है. हर कंपनी अपने ऑपरेशन से कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की तैयारी कर रही है. इसी कड़ी में Google, Microsoft और Amazon ने अब सोलर न्‍यूक्लियर और जियोथर्मल एनर्जी के जरिए अपने रोजाना के काम करने की तैयारी कर ली है. तीनों कंपनियों का मानना है कि आने वाले दिनों में उन्‍हें विंड और सोलर पावर के अतिरिक्‍त दूसरे विकल्‍पों को लेकर भी काम करना चाहिए. 

Google और Microsoft ने किया है ये समझौता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की टॉप 5 टेक कंपनियों में शामिल Google, Microsoft ने पिछले हफ्ते ही Nucor Corporation के साथ समझौता किया है. इस समझौते में Nucor Corporation इन कंपनियों की कमर्शियल जरूरत को पूरा करेगी. कंपनियों का मानना है कि ये डील उन्‍हें उनके कार्बन फुट प्रिंट को कम करने के लक्ष्‍य तक पहुंचने में मदद करेगी. गूगल ने जहां 2030 तक 24*7 क्‍लीन एनर्जी ऑपरेशन चलाने का लक्ष्‍य तय किया है. 2022 तक कंपनी प्रति घंटे के अनुसार 64 प्रतिशत तक कार्बन एमीशन कम करने के लक्ष्‍य तक पहुंच चुकी है.

ये भी पढ़ें: होली पर ऑनलाइन कंपनियों की सेल में हुआ जबरदस्‍त इजाफा, यहां तक पहुंची कमाई

Google ने इसे लेकर क्‍या कहा?  
Google ने एक बयान में कहा है कि सोलर और विंड टेक्‍नोलॉजी आज हमारे प्रयासों में अहम भूमिका निभा रही है. लेकिन कंपनियों का मानना है कि उन्‍हें क्‍लीन एनर्जी के लिए अपने पोर्टफोलियो को और बड़ा करने की जरूरत है. इसमें नेक्‍स्‍ट जनरेशन की जियोथर्मल एनर्जी, एडवांस न्‍यूक्लियर, क्‍लीन हाइड्रोजन और लॉन्‍ग ड्यूरेशन एनर्जी स्‍टोरेज जैसी सुविधाओं का विकास है. वहीं इस मामले को लेकर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का कहना है कि ग्रिडों को किफायती लागत से डीकार्बोनाइज करने और कार्बन-मुक्त ऊर्जा स्रोतों के साथ दुनिया की बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करने के लिए मजबूत और क्‍लीन ऊर्जा बिजली तकनीक और एनर्जी स्‍टोरेज प्रणालियों की जरूरत है. एजेंसी ने आगे कहा कि ये ऊर्जा विंड और सोलर ऊर्जा के बीच के गैप को भर सकती है और जिस ऊर्जा को जीवाश्‍म ईंधन से बनाया जा रहा है उसका विकल्‍प बन सकती है. 

बिजली खपत में एआई की भूमिका अहम 
बिजली खपत में एआई भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. डेटा सेंटर और उससे जुड़े नेटवर्क सेंटर भी बिजली की खपत में 2 से 3 प्रतिशत हिस्‍सा लेते हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बोस्‍टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट कहती है कि जेनरेटिव एआई बड़ी संख्‍या में प्रोसेसिंग पावर की खपत करता है. ये इतनी खपत करता है कि इससे बिजली की मांग 2030 तक 2 से 3 गुना तक बढ़ सकती है. रिपोर्ट ये भी कह रही है कि इन एडवांस टेक्‍नोलॉजी के लिए चुनौती बनी हुई है जिसमें जानकारी की कमी और जोखिम बड़ी भूमिका निभाता है. इससे पहले अमेजन तलेन एनर्जी (Talen Energy) के साथ 650 मिलियन की डील कर चुका है जिसमें Talen energy उसके डेटा सेंटर के लिए न्‍यक्लियर एनर्जी मुहैया करा रही है. 
 


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