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सोना रखकर कर्ज उठाने का चलन और बढ़ा, गोल्ड लोन की डिमांड में 20% का इजाफा
जून तिमाही में गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इससे NBFC की आर्थिक सेहत में सुधार आया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बीते कुछ समय में सोने (Gold) की कीमतों में भारी उछाल आया है. इस उछाल का फायदा सोने में निवेश करने वालों के साथ ही गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों को भी मिला है. गोल्ड लोन की डिमांड में इजाफे से इन कंपनियों की आर्थिक सेहत में मजबूती आई है. क्रिसिल रेटिंग की रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में गोल्ड लोन की डिमांड में मई के मुकाबले 20% की वृद्धि दर्ज हुई है.
NBFC हैं सबसे आगे
रिपोर्ट में बताया गया है कि जून के महीने में बांटा गया लोन बीती तिमाही के हर महीने बांटे गए औसत लोन के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक रहा. गोल्ड लोन बांटने में NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां सबसे आगे हैं और इनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट पूरी इंडस्ट्री का 90 प्रतिशत है. रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन NBFC की ग्रोथ में सोने की कीमतों में उछाल मुख्य वजह है.
ड्यूटी में कटौती का असर नहीं
क्रिसिल रेटिंग की रिपोर्ट बताती है कि अधिकांश बैंक और एनबीएफसी 60 से 65 प्रतिशत तक लोन टू वेल्यू (LTV) रेश्यो मेंटेन कर रहे हैं. इसका मतलब है कि वे सोने की वैल्यू के मुकाबले ग्राहक के प्रोफाइल के आधार पर 60 से 65% तक ही लोन जारी कर रहे हैं. ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के ऐलान से सोने में आई गिरावट से भी ये कंपनियां बेसर हैं.
RBI के निर्देश का पड़ेगा असर
क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि रिजर्व बैंक द्वारा लोन को कैश में जारी करने के संबंध में दिए गए निर्देशों का असर गोल्ड लोन की डिमांड पर देखने को मिल सकता है. रिजर्व बैंक की तरफ से कहा गया है कि 20 हजार से ऊपर के गोल्ड लोन की रकम को कैश में नहीं दिया जाए ये रकम बैंकिंग चैनल के माध्यम से ही दी जाए. बता दें कि ग्राहकों की सुविधा के मद्देनजर NBFC लोन का 95% हिस्सा कैश में दे रही हैं.
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