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‘Go Air’ ढूंढ रहा है इमरजेंसी फंडिंग, क्या है पूरा मामला?

‘Go Air’ काफी समस्याओं से घिरी हुई है और माना जा रहा है कि बिजनेस में बने रहने के लिए ही एयरलाइन द्वारा यह मांग की गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

इस वक्त भारत में एयरलाइन्स काफी परेशानी में नजर आ रही हैं. जहां एक तरफ ‘Go Air’ है, जो परेशानियों के एक लंबे दौर से बाहर आने कि कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ Spicejet है, जो इस वक्त परेशानी से घिरी हुई है और अभी तक अपने वित्तीय नतीजे भी जारी नहीं कर पाई है. अब हाल ही में ‘Go Air’ ने उधारदाताओं से 100 करोड़ रुपयों की आपातकालीन मांग की है. 

क्या है पूरा मामला?
‘Go Air’, परेशानियों के एक दौर से बाहर तो आ चुकी है लेकिन एयरलाइन अभी भी काफी समस्याओं से घिरी हुई है और माना जा रहा है कि बिजनेस में बने रहने के लिए ही एयरलाइन द्वारा यह आपातकालीन मांग की गई है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कंपनी के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल शैलेन्द्र अजमेर द्वारा इस फंडिंग को हैंडल किया जा रहा है. शैलेन्द्र को EY (Ernst & Global Young) का समर्थन प्राप्त है और इस फंडिंग का इस्तेमाल एयरलाइन की बेसिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी किया जा सकता है. 

कहां इस्तेमाल होगी फंडिंग?
इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी के बेहद जरूरी ऑपरेशंस के लिए भी किया जाएगा जिसमें इंश्योरेंस जैसी बेसिक देयता भी शामिल है. यही वजह है कि इस फंडिंग को कंपनी के लिए काफी आवश्यक माना जा रहा है. फंडिंग का इस्तेमाल इंश्योरेंस के साथ-साथ रिपेयरिंग जैसी बेहद आवश्यक जरूरतों के लिए भी किया जाएगा. आपको बता दें कि एक एयरलाइन को सामान्य तरीके से काम करते रहने के लिए इंश्योरेंस और रिपेयरिंग जैसे कारकों का प्रमुख रूप से ध्यान रखना पड़ता है और इस फंडिंग का इस्तेमाल दोनों ही कारकों पर प्रमुख रूप से किया जाएगा और इसीलिए इस फंडिंग को कंपनी के लिए इतना जरूरी माना जा रहा है.

CoC में कौन कितना हिस्सेदार?
इस आपातकालीन फंडिंग के लिए कंपनी ने भारत के केंद्रीय बैंक, RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कॉर्पोरेट ऑफिस और बैंक ऑफ बड़ौदा को भी रिक्वेस्ट भेज दी है. कंपनी की CoC (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स) में बैंक ऑफ बड़ौदा और RBI की 72% की हिस्सेदारी है वहीं Deutsche बैंक 25% और IDBI शेष बचे 3% का हिस्सेदार है. आपको बता दें कि मई के महीने में एयरलाइन ने ‘Bankruptcy Protection’ की शुरुआत की थी और अमेरिकी कंपनी ‘Pratt & Whitney’ पर आरोप लगाया था कि कंपनी ने खराब इंजन प्रदान करवाए थे जिसकी वजह से ‘Go Air’ के विमान उड़ान नहीं भर पाए.
 

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