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मध्य पूर्व तनाव और ऊर्जा महंगाई से बढ़ीं वैश्विक खाद्य कीमतें: FAO

FAO का फूड प्राइस इंडेक्स, जो प्रमुख खाद्य वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ट्रैक करता है, मार्च में औसतन 128.5 अंक पर पहुंच गया. यह फरवरी के संशोधित स्तर की तुलना में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में मार्च महीने के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है. फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के आंकड़ों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण ऊर्जा लागत बढ़ी है, जिसका असर अब कृषि बाजारों पर दिखने लगा है.

FAO फूड प्राइस इंडेक्स का आंकड़ा
FAO का फूड प्राइस इंडेक्स, जो प्रमुख खाद्य वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को ट्रैक करता है, मार्च में औसतन 128.5 अंक पर पहुंच गया. यह फरवरी के संशोधित स्तर की तुलना में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.

ऊर्जा लागत बढ़ने से खाद्य आपूर्ति पर असर
संस्था के मुताबिक, इस वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है. ऊर्जा महंगी होने से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर अनाज की पर्याप्त उपलब्धता ने कीमतों में तेज उछाल को कुछ हद तक नियंत्रित रखा.

FAO के प्रमुख अर्थशास्त्री की चेतावनी
FAO के मुख्य अर्थशास्त्री Maximo Torero ने कहा कि फिलहाल इसका असर सीमित है, लेकिन यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आगे जोखिम बढ़ सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति 40 दिनों से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसका असर किसानों के फैसलों पर पड़ सकता है. बढ़ती लागत के कारण किसान उर्वरकों का उपयोग कम कर सकते हैं, खेती का रकबा घटा सकते हैं या कम संसाधन वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं.

वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर दीर्घकालिक प्रभाव
ऐसे बदलाव आने वाले सीजन में कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ेगा और कीमतों में और वृद्धि हो सकती है. FAO की यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि वैश्विक खाद्य बाजार ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, हालांकि फिलहाल उपलब्ध स्टॉक स्थिति को संतुलित बनाए हुए हैं.
 


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