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महंगाई की एक और मार के लिए हो जाइए तैयार, इस बार चावल की कीमतों की बारी
इस महीने के शुरू में भारत से ब्रोकन राइस के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी, जबकि ग़ैर बासमती चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारत में आने वाले दिनों में चावल की कीमतों में इज़ाफा हो सकता है. खरीफ की फसल के कम उत्पादन के पूर्वानुमान और ग़ैर बासमती चावल के निर्यात में 11 फीसदी की बढ़ोतरी को देखते हुए कीमतों में इज़ाफा आगे भी रह सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे की वजह हाल ही में हुए भारत की चावल नीति में बदलाव को बताया जा रहा है.
ब्रोकन राइस के निर्यात पर लगा दी थी रोक
कॉमर्स मंत्रालय ने इस महीने के शुरू में भारत से ब्रोकन राइस के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी, जबकि ग़ैर बासमती चावल पर20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया था. सरकार ने इसके पीछे की वजहों को बताते हुए कहा था कि पिछले कुछ समय में देश से पिछले साल के मुकाबले ज़्यादा ब्रोकन राइस जा रहा था जिसके कारण उसे ये क़दम उठाना पड़ा. मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि निर्यात की ये बढ़ोतरी साधारण नहीं है. जिसके चलते उसने तुरंत ब्रोकन राइस के निर्यात पर रोक लगा दी थी.
आखिर क्यों बढ़ रही है कीमत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चावल की घरेलू कीमतों में इज़ाफा होने का रूझान दिख रहा है. धान के लगभग 60 लाख टन कम उत्पादन के पूर्वानुमान और ग़ैर बासमती चावल के निर्यात में 11प्रतिशत की बढ़ोतरी को इसका कारण माना जा रहा है. इसमें कहा गया है कि खुले बाज़ार में घरेलू टूटे चावल की कीमत16रूपये प्रति किलोग्राम थी जो राज्यों में बढ़कर करीब 22 रूपये प्रति किलो हो गई
मांस और अंडे के दामों में भी हो सकता है इज़ाफा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बढ़ोतरी से पोल्ट्री और पशुपालन किसान फ़ीड सामग्री की चीज़ें भी प्रभावित हुई है. इस सेक्टर में इज़ाफा इसलिए हो रहा है कि पोल्ट्री फीड के लिए लगभग 60 से 65 फीसदी इनपुट लागत टूटे चावल से आती है. पोल्ट्री कारोबार से जुड़े जानवरों के खानपान की चीज़ों के महंगा होने के असर उनसे होने वाली चीज़ों पर भी जा रहा है, जिसके कारण इससे बनने वाले उत्पादों जैसे दूध, अंडा, मांस भी महंगे हो जाते हैं और उसका असर खाद्य मुद्रास्फीति पर भी देखने को मिलता है.
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