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बदला मन: जिस कंपनी से हाथ खींचने का था प्लान, अब उसी के हाथ मजबूत करेंगे Adani 

गौतम अडानी आने वाले दिनों में कुछ और कंपनियों के अधिग्रहण को अंजाम दे सकते हैं. कम से कम 3 कंपनियां उनके रडार पर हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अडानी समूह (Adani Group) के पोर्टफोलियो में जल्द ही कुछ नई कंपनियां शामिल होने वाली हैं. गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह की नज़रें इस समय देश के दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्र की कम से कम तीन कंपनियों पर है. दरअसल, यह डील अडानी विल्मर को मजबूत बनाने के लिए की जाएगी. यह कंपनी सिंगापुर के विल्मर ग्रुप और अडानी समूह का जॉइंट वेंचर है. कुछ समय पहले खबर आई थी कि अडानी इस जॉइंट वेंचर से बाहर निकलना चाहते हैं. लेकिन अब इसके लिए शॉपिंग का मतलब है कि उन्होंने शायद अपना मन बदल लिया है. 

बड़ा हो रहा बाजार
देश में पैकेज्ड कंज्यूमर गुड्स का बाजार लगातार बढ़ा होता जा रहा है. अडानी इस बढ़ते बाजार में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं. इसलिए वह दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्र की कम से कम तीन कंपनियों को खरीदने की तैयारी में जुट गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी विल्मर की अगले दो से तीन साल में कुछ कंपनियों के अधिग्रहण की योजना पर काम कर रही है. खासतौर पर देश के दक्षिणी और पूर्वी मार्केट में सक्रिय कम से कम तीन कंपनियों पर उसकी नज़र है. 

1 अरब डॉलर का प्लान 
अडानी ग्रुप ने FMCG कारोबार पर करीब 1 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान तैयार किया है. इसके तहत अडानी विल्मर को मजबूत किया जाएगा, ताकि सबसे ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल की जा सके. फिलहाल पश्चिम, मध्य और उत्तर भारत में मजबूत है, लेकिन अब वो दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में भी पैठ जमाना चाहती है. इसलिए अधिग्रहण पर फोकस किया जा रहा है. रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अडानी समूह ने कुछ कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिन पर भविष्य में दांव लगाया जा सकता है.

अडानी का इतना स्टेक
पिछले साल खबर आई थी कि अडानी अपनी कंपनी अडानी विल्मर लिमिटेड में पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. इस साल की शुरुआत में खबर आई कि प्राइसिंज को लेकर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए अडानी समूह सही डील मिलने तक इंतजार करेगा. लेकिन अज अडानी विल्मर को लेकर जो खबर आई है, उससे यही संकेत मिलता है कि अडानी ने अपना मन बदल लिया है. अब वह इस कंपनी को और मजबूत करना चाहते हैं. अडानी समूह और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. कंपनी फॉर्च्यून ब्रैंड (Fortune Brand) नाम से खाद्य तेल और पैकेज्ड ग्रोसरी बेचती है. Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बात करें, तो अडानी ग्रुप की 43.97% और विल्मर इंटरनेशनल की इसमें 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 12.06 प्रतिशत है.  

सुधर रही आर्थिक स्थिति
अडानी विल्मर की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है. कंपनी का पिछले साल रिवेन्यु 51,261.63 करोड़ रुपए रहा था. इसी साल जुलाई में कंपनी ने जून तिमाही के कारोबरी अपडेट जारी कर बताया था कि उसकी वॉल्यूम ग्रोथ सालाना आधार पर 13% रही है. उसके अल्टरनेटिव चैनल्स ने भी पहली तिमाही में 19 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ अपनी रफ्तार बनाए रखी है. इस चैनल में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स शामिल हैं. कंपनी के ब्रांडेड एक्सपोर्ट की वैल्यू में सालाना आधार पर 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. कंपनी ने कहा था कि उसने तिमाही की बिक्री के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त एजेंसियों को गैर-बासमती चावल बेचा, जिसने उसके तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाने में मदद की. उसके फूड एंड FMCG बिजनेस के वॉल्यूम में पिछले साल की तुलना में 23% का इजाफा हुआ है.

ITC से मुख्य मुकाबला
अडानी विल्मर शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है. अडानी विल्मर ने IPO के जरिए 3600 करोड़ रुपए जुटाए थे. विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.
 


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