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ईंधन महंगा, खाद्य वस्तुओं पर दबाव; चार साल बाद थोक महंगाई 11% के पार
सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
देश में खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने भी चिंता बढ़ा दी है. सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39% हो गई, जो अगस्त में 9.92% थी. सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दोहरे अंकों में पहुंची है. कच्चे तेल, ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी के साथ खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई ने भी इस बढ़ोतरी में योगदान दिया है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 11.39% रही. यह अर्थशास्त्रियों के 10.18% के अनुमान से भी अधिक है. इससे पहले अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92% दर्ज की गई थी. वहीं, इस सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई दर भी अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई. खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह माना गया.
चार साल के उच्च स्तर पर पहुंची थोक महंगाई
सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दर 10% के पार पहुंची है. उस समय यह 10.70% दर्ज की गई थी. सितंबर 2026 का आंकड़ा पिछले चार वर्षों में थोक महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही थोक महंगाई में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इससे पहले नवंबर 2025 से जून 2026 तक थोक महंगाई में लगातार इजाफा हुआ था, जबकि जुलाई में मामूली गिरावट आई थी. अब एक बार फिर महंगाई में तेजी ने अर्थव्यवस्था और आम लोगों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है.
ईंधन और बिजली की महंगाई में सबसे ज्यादा तेजी
आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ईंधन और बिजली की महंगाई दर बढ़कर 25.85% हो गई, जो अगस्त में 22.93% थी. इसी तरह, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर अगस्त के 8.37% से बढ़कर सितंबर में 9.76% पर पहुंच गई.
प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी 7.76% से बढ़कर 8.67% हो गई. इस श्रेणी में खाद्य पदार्थों के अलावा गैर-खाद्य वस्तुएं और खनिज शामिल हैं. वहीं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को मिलाकर तैयार थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई दर सितंबर में 8.66% रही, जबकि अगस्त में यह 7.05% थी.
मंत्रालय के मुताबिक, थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, कोयला, लिग्नाइट, बुनियादी धातुएं, रसायन, कपड़ा, रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद और बिजली के उपकरण शामिल रहे.
कच्चे तेल की कीमतें कैसे बढ़ा रही हैं महंगाई?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे परिवहन, खेती, सिंचाई और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है. जब कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ती है, तो उसका असर उत्पादों की थोक कीमतों पर पड़ सकता है.
इसके अलावा, प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों से उर्वरकों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है. भारत खाद्य तेलों के आयात पर भी काफी निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है. पैकेजिंग, फसल सुरक्षा और माल ढुलाई की बढ़ती लागत भी खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित कर सकती है.
इस तरह ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच सकता है. यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो आने वाले समय में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
खाद्य महंगाई पर अल नीनो और कमजोर मानसून का खतरा
अर्थशास्त्रियों ने खाद्य महंगाई के लिए अल नीनो और मानसून की असमान बारिश को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है. मौसम में बदलाव से खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने और रबी की बुआई में देरी की आशंका बढ़ सकती है.
ICRA की अदिति नायर और ANZ के धीरज निम के मुताबिक, जलाशयों में पानी का स्तर औसत से कम रहना सर्दियों की फसलों के लिए चिंता का विषय है. हालांकि, खाद्य पदार्थों की कीमतों पर इसका वास्तविक असर फसल उत्पादन और आगे मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा.
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और अन्य जिंसों की कीमतें बढ़ने से भी खाद्य पदार्थों की लागत पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में घरेलू फसल उत्पादन और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की अहम भूमिका रहेगी.
महंगाई के मोर्चे पर RBI की चुनौती बढ़ी
थोक और खुदरा, दोनों तरह की महंगाई में बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी चुनौती बढ़ा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में RBI ने बेंचमार्क रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया था. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी बताई गई है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया था कि महंगाई और उसके अनुमान पिछले साल की तुलना में उतने अनुकूल नहीं हैं.
हालांकि, थोक महंगाई में बढ़ोतरी का खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर पड़ेगा, यह कंपनियों की लागत, मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. यदि कच्चे तेल और अन्य इनपुट की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो उत्पादन लागत के साथ उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
नई आधार वर्ष वाली सीरीज में जारी हुए आंकड़े
सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.
नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है. इसमें सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे ऊर्जा के नए स्रोतों को भी शामिल किया गया है. इससे थोक कीमतों में होने वाले बदलावों का आकलन पहले की तुलना में अधिक व्यापक आधार पर किया जा सकेगा.
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