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लगातार दूसरे हफ्ते घटा विदेशी मुद्रा भंडार. $10 अरब से अधिक की गिरावट से बढ़ी चिंता

लगातार दो सप्ताह की गिरावट इस बात का संकेत है कि वैश्विक आर्थिक हालात और मुद्रा बाजार की चाल पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा. आने वाले समय में RBI की रणनीतियां और वैश्विक संकेतक इस ट्रेंड की दिशा तय करेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व $10.28 अरब घटकर $688.05 अरब रह गया. लगातार हो रही इस गिरावट ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा उतार-चढ़ाव को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट का रुख

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में यह गिरावट लगातार दूसरे सप्ताह देखने को मिली है. इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार $11.413 अरब घटकर $698.346 अरब पर आ गया था. हालांकि, फरवरी के अंत तक स्थिति काफी मजबूत थी और 27 फरवरी 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार $728.494 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें गिरावट का सिलसिला जारी है.

विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) में सबसे बड़ी कमी

इस गिरावट की मुख्य वजह विदेशी मुद्रा संपत्तियों (FCA) में आई कमी रही. FCA $6.622 अरब घटकर $551.072 अरब रह गया. इसमें डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है, जिससे कुल भंडार पर दबाव बढ़ा.

गोल्ड रिजर्व में भी आई गिरावट

देश के गोल्ड रिजर्व यानी सोने के भंडार में भी कमी दर्ज की गई. इस अवधि में गोल्ड रिजर्व का मूल्य $3.666 अरब घटकर $113.521 अरब रह गया. यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों और विनिमय दरों में बदलाव का असर भारत के भंडार पर पड़ रहा है.

SDR और IMF पोजीशन में हल्की बढ़त

जहां एक ओर कुल भंडार में गिरावट रही, वहीं कुछ घटकों में मामूली सुधार भी देखने को मिला. स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) $17 मिलियन बढ़कर $18.649 अरब हो गए.
इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिजर्व पोजीशन भी $17 मिलियन बढ़कर $4.816 अरब पर पहुंच गई.

पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन हालिया गिरावट का सिलसिला चिंता बढ़ाने वाला है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में अस्थिरता, डॉलर की मजबूती और अन्य प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत के फॉरेक्स रिजर्व पर पड़ रहा है.

 


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