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राजकोषीय और मौद्रिक कदमों से निजी निवेश और आर्थिक वृद्धि को मिलेगा मजबूती का संकेत : RBI
आरबीआई के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर मजबूती की ओर बढ़ रही है. वित्तीय और मौद्रिक नीतियों, ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार, तथा डिजिटल लेनदेन की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता ने अर्थव्यवस्था को सतत विकास की दिशा में अग्रसर किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि इस वर्ष उठाए गए राजकोषीय, मौद्रिक और विनियामक कदम आने वाले समय में निजी निवेश, उत्पादकता और समग्र आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने वाले एक सतत और सकारात्मक विकास चक्र की शुरुआत करेंगे. केंद्रीय बैंक के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में गति बढ़ने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं.
अपनी मासिक बुलेटिन में आरबीआई ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, हालांकि अक्टूबर में लगातार एक साल से अधिक समय तक बढ़ने के बाद इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई. अक्टूबर के हाई-फ्रीक्वेंसी आंकड़े बताते हैं कि विनिर्माण और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में मजबूत विस्तार देखने को मिला है, जिसका श्रेय त्योहारों की मांग और जीएसटी सुधारों के निरंतर सकारात्मक प्रभाव को जाता है.
आरबीआई ने कहा, “मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर आ गई है और लक्ष्य दर से काफी नीचे बनी हुई है. वित्तीय स्थिति अनुकूल रही और वाणिज्यिक क्षेत्र को वित्तीय संसाधनों का प्रवाह पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है.”
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि बाहरी क्षेत्र की झटकों को झेलने की क्षमता समय के साथ बेहतर हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार नीतियों की अनिश्चितताओं के बीच भारत की लचीलापन बढ़ा है. डिजिटल लेनदेन के हालिया आंकड़ों के अनुसार देशभर में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता और उपयोग तेजी से बढ़ा है, चाहे वह किराना और सुपरमार्केट हों या फिर सोने की खरीद.
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “हम नवाचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं, साथ ही प्रणालीगत स्थिरता की सुरक्षा पर ध्यान बनाए हुए हैं. जहां संभव है, हम विनियमों को सरल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आवश्यक सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए. हम अन्य नियामकों के साथ समन्वय को मजबूत कर रहे हैं, जबकि उनके अधिकार क्षेत्र का सम्मान भी कर रहे हैं.”
अक्टूबर माह में समग्र मांग परिस्थितियों में भी सुधार देखने को मिला. ग्रामीण मांग ने कुल मांग को आगे बढ़ाया, जिसे अनुकूल मानसून, मजबूत कृषि गतिविधियों, जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारों के दौरान बढ़ी खरीदारी ने समर्थन दिया. दोपहिया वाहनों और ऑटोमोबाइल की ग्रामीण बिक्री में तेज उछाल आया, और दोनों ने अपनी अब तक की सबसे ऊंची वृद्धि दर्ज की.
शहरी मांग में भी गति आई, जहां पैसेंजर वाहन बिक्री ने पिछले नौ महीनों में अपना सर्वाधिक स्तर छू लिया. आरबीआई ने कहा कि मनरेगा (MGNREGS) के तहत काम की मांग में निरंतर कमी यह दर्शाती है कि ग्रामीण श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हो रहा है.
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