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युद्ध के हालात या भारत में चुनाव, विदेशियों ने 4 दिन में क्यों निकाले 20 हजार करोड़?

विदेशी निवेशक जिनसे भारतीय शेयर बाजार को ग्रोथ मिल रही थी वो तेजी से पैसा निकाल रहे हैं. क्या इसके पीछे- ईरान-इजराइल युद्ध है या भारत में चुनाव के नतीजों को लेकर आशंका ? इसे समझते हैं 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दुनिया में मौजूदा समय में घट रहे कुछ महत्‍वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच भारत के शेयर बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ रहा है. पिछले चार दिनों में एफआईआई ने बाजार से 20 हजार करोड़ रुपये निकाले हैं, जिसने बाजार को लाल निशान में ला दिया है. एक ओर जहां ईरान-इजराइल के बीच युद्ध चल रहा है वहीं दूसरी ओर भारत में लोकसभा का चुनाव चल रहा है. लेकिन बाजार के एक्‍सपर्ट इसे लेकर इतनी चिंता में नहीं है. उनका कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है और ये ज्‍यादा दिनों तक चलने वाला भी नहीं है. 

क्‍या है बाजार का हाल? 
अगर शुक्रवार की स्थिति पर नजर डालें तो बाजार में 600 प्‍वॉइंट्स की बढ़त देखने को मिली. बाजार 73088 प्‍वॉइंटस पर बंद हुआ. लेकिन इस स्थिति के बावजूद बाजार से पिछले चार दिनों में एआईआई ने 2000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की बिकवाली की है. एफआईआई की इस बिकवाली ने बाजार को लाल निशान में ला दिया है. हालांकि बाजार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है. लेकिन नेशनल सिक्‍योरिटीज डिपॉजिटरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से लेकर अप्रैल तक एफआईआई (फॉरेन इंस्‍टीट्यूशनल इनवेस्‍टर) ने इक्विटी से ज्‍यादा डेट में निवेश किया है. एफआईआई ने बाजार में जहां मात्र 13067 रुपये का निवेश किया है वहीं डेट में 55630 करोड़ रुपये का निवेश किया है. जानकारों का ये भी कहना है कि एफआईआई के इस व्‍यवहार का बाजार पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है. क्‍योंकि बाजार की घरेलू मांग पूरी हो रही है और निवेश के दूसरे साधनों के माध्‍यम से बाजार में पैसा आ रहा है. 

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घरेलू बाजार में हो रहा है बड़ा निवेश 
EquityRush के सीईओ और बाजार के जानकार कुनाल सारोगी कहते हैं कि हम देख रहे हैं कि लगातार एफआईआई की बिकवाली चल रही है, बाजार में जो गिरावट आ रही है वो उन्‍हीं की वजह से है. इसकी कई वजह हैं जिनमें ईरान का विवाद, चुनाव के क्‍या परिणाम निकल कर आएंगे, डॉलर में तेजी आ रही है उससे भी एफआईआई बाहर जा रहे हैं. ये एक तरह का एडजस्‍टमेंट है. लेकिन हमारे वहां जो घरेलू निवेश है वो बहुत स्‍ट्रांग है. म्‍यूचुअल फंड से लेकर स्‍मॉल कैप और मिड कैप में इतना पैसा आया है कि एक्‍सचेंज को और रेग्‍यूलेटर को उस पर रोक लगानी पड़ी. अगर घरेलू निवेश नहीं होता तो बड़ी गिरावट आ जाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. मुझे लगता है कि एक बार अगर एफआईआई चुनावों को लेकर कयास खत्‍म हो जाएंगे तो एआईआई का पैसा भी लौट आएगा. कुनाल ये भी कहते हैं कि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी युद्ध का असर दिखा हो इससे पहले इजराइल हमास के युद्ध का भी असर दिखा था लेकिन वो भी रिकवर हो गया. 

रेट कट न होने तक जारी रह सकता है सिलसिला 
एक अन्‍य एक्‍सपर्ट इस बारे में अपनी बात कहते हुए कहते हैं ऐसा नहीं है कि ये पिछले चार दिनों में एफआईआई का बिकवाली का दौर दिखा है ये लंबे समय से दिख रहा है. उनका कहना है कि जब भी बाजार में तेजी बढ़ी है तब तब एफआईआई की बाजार में तेजी देखने को मिली है. इसका कारण ये है कि इंडियन मार्केट पहले से ही ऑल टाइम हाई पर ट्रेड कर रहा है. वो लोग पहले से ही प्रॉफिट में है और वो लोग किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं. इसका एक कारण हमारे चुनाव हैं दूसरा अमेरिका में चुनाव है, तीसरा जो ब्‍याज दरें हैं वो भी एक बड़ी वजह है. इस साल जून में जो ब्‍याज दरों में कटौती की उम्‍मीद लगाई जा रही है, लेकिन इस बीच अमेरिका में महंगाई के जो आंकड़े सामने आए हैं उससे लग ये रहा है कि ये जुलाई अगस्‍त में ही देखने को मिलेगा. इन सभी की वजह से जो प्रॉफिट बुकिंग एफआईआई देखने को मिली है. मुझे लगता है कि जब तक रेट कट नहीं होता है तब तक रेट कट देखने को ना मिले. 


 
 


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