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अमेरिका में ब्याज दरें फिर 0.75% बढ़ीं, फेड ने माना- मंदी की आशंका से इनकार नहीं
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल अबतक 5 बार ब्याज दरों में इजाफा किया है, ऐसा आक्रामक रुख अमेरिका को मंदी में धकेल सकता है, इस बात को फेड भी मान रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मुंबई: आखिरकार वही हुआ जिसका अनुमान पहले से ही था, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.75 परसेंट का इजाफा कर दिया है. फेडरल रिजर्व का ये कदम बाजार भी डिस्काउंट कर चुके थे, फिर ऐसा क्या हुआ कि पॉलिसी ऐलान के बाद अमेरिकी बाजार औंधे मुंह गिर पड़े.
लगातार 5वीं बार बढ़ाई दरें
सबसे पहले समझते हैं कि कल फेड ने क्या ऐलान किए. फेडरल रिजर्व ने दरों में 0.75 परसेंट का इजाफा किया, ये लगातार तीसरी बार है जब फेड ने ब्याज दरों में 0.75 परसेंट की बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही सेंट्रल बैंक का बेंचमार्क फंड रेट बढ़कर अब 3-3.25 परसेंट पहुंच गया है. जो कि 2008 में आई मंदी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. एक तरह से फेड की इतनी आक्रामक पॉलिसी 1990 के बाद देखने को मिल रही है. फेडरल रिजर्व इस साल अबतक लगातार 5 बार ब्याज दरों में इजाफा कर चुका है जबकि इस अभी दो पॉलिसी आना और बाकी है.
फेड चेयरमैन के बयानों से सहमे बाजार
हालांकि फेड ब्याज दरों में इजाफा करेगा और वो भी 0.75 परसेंट करेगा, इस बात को अमेरिका समेत दुनिया भर के बाजार पहले ही पचा चुके था और खुद को सेटल कर चुके थे, फिर ऐसा क्या हुआ कि अमेरिकी बाजार पॉलिसी ऐलान के बाद ही अचानक लुढ़क गए. दरअसल, बाजारों को फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की कमेंट्री भारी पड़ गई. उस कमेंट्री में कई बातें ऐसी थीं जिसे लेकर बाजार सहम गए और टूटते चले गए. एक एक करके समझते हैं
1. फेडरल रिजर्व का ग्रोथ को लेकर काफी बोल्ड बयान या है, फेड ने ये माना है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती चल रही है, आगे मंदी की आशंका से कोई इनकार नहीं किया जा सकता है. यानी एक तरह से फेड ने ये मान लिया है कि मंदी आ सकती है, इसने बाजारों को मूड खराब कर दिया
2. जेरोम पॉवेल ने कहा कि इस साल महंगाई दर गिरकर 5.5 परसेंट पर आ सकती है, मतलब ये कि 2 परसेंट का लक्ष्य हासिल करने के लिए महंगाई दर में 3.5 परसेंट की गिरावट और चाहिए, तबतक फेड रुकेगा नहीं
3. फेड चेयरमैन ने पॉलिसी ऐलान के दौरान कहा कि वो महंगाई दर को 2 परसेंट पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए वो आक्रामक रुख अख्तियार रखेंगे. अभी अमेरिका में महंगाई दर अगस्त में 8.3 परसेंट आई थी.
4. बेरोजगारी के मोर्चे पर भी बुरी खबर है, फेड के इन आक्रामक कदमों के चलते बेरोजगारी दर 3.7 परसेंट से बढ़कर 4.4 परसेंट तक जा सकती है.
5. पॉलिसी में ये भी अनुमान जताया गया कि साल 2023 तक टर्मिनल रेट यानी औसत दरें 4.6 परसेंट तक जाएंगी जो कि अभी 3.1 परसेंट हैं. मतलब ये कि इसमें भी 1.25.1.5 परसेंट का इजाफा होना तय है. एक्सपर्ट्स ये अनुमान जता रहे हैं कि ये बढ़ोतरी इसी साल हो सकती है, क्योंकि अभी दो पॉलिसीज आना बाकी हैं
6. शेयर बाजारों को झटका तब लगा जब फेड ने ये अनुमान जताया कि ब्याज दरों में जल्द ही कोई कटौती हो सकती है. जबकि बाजार ने ये अनुमान जताया था कि साल 2023 के मध्य के बाद दरों में कटौती की गुंजाइश बनेगी, लेकिन अब ये अनुमान साल 2024 तक चला गया है
तो कुल मिलाकर ये साफ है कि शेयर बाजारों में गिरावट दरअसल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते नहीं बल्कि फेड चेयरमैन के बयानों के चलते आई, जिसमें उन्होंन कई ऐसी बातें कहीं जिसकी उम्मीद बाजारों को नहीं थी.
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